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अफगानिस्तान की पहली महिला पायलट नीलोफर रहमानी को जान का खतरा, अमेरिका से मांगी शरण

नई दिल्ली । नीलोफर रहमानी अमेरिका में शरण लेने की जगह तलाश रही हैं। इन्हें तीन साल पहले अफगानिस्तान के वायु सेना में उड़ान भरने वाली पहली महिला पायलट बनने का गौरव प्राप्त हुआ था, लेकिन एक साहसी और महिला सशक्तीकरण के लिए इतिहास में स्थान बना चुकी रहमानी को आज अपनी ही मातृभूमि में रहने के लिए अपनी इस योग्यता की कीमत चुकानी पड़ रही है। अब वह

कैप्टन रहमानी ने कहा कि अफगानिस्तान में लंबे समय तक रहना सुरक्षित नहीं है। रहमानी की वकील किंबर्ली मोटली ने कहा कि अफगानिस्तान में उनकी मुवक्किल को विद्रोहियों की ओर से सजा भुगतने की अनगिनत धमकियां मिल चुकी हैं। मोटली ने सीएनएन से कहा कि यदि वह अफगानिस्तान लौट भी जाती हैं तो उसे हमेशा सुरक्षा को लेकर भय सताती रहेगी। रहमानी के अनुसार, उनके मुल्क में कोई बदलाव नहीं आया है। स्थिति अभी भी पहले जैसे ही है। नीलोफर का कहना है कि वह अमेरिका की वायुसेना की पायलट बनना चाहती हैं। अब वह अमेरिका में शरण लेने के लिए एक याचिका दायर की है।

पिता के सपने को साकार किया

रहमानी के अनुसार, मैंने हमेशा एक पायलट बनने का सपने देखा। 25 वर्षीय रहमानी के अनुसार, उसके पिता ने उसे लेकर जो सपने देखे थे उसने उसे पूरा किया। रहमानी के अनुसार, मैं हमेशा पायलट बनने के सपने देखा करती थी। एक पायलट के रूप में देखना उनके पिता का भी एक सपना था। रहमानी के लिए इस लक्ष्य को हासिल करना उसके पिता के लिए उस समय सम्मान की बात थी जब पूरी दुनिया में यह कहा जा रहा था कि अफगानिस्तान में वही लड़कियां नौकरी कर सकती है जो एक पुरुष की इच्छा के अनुरूप हो। रहमानी आज दुनिया में महिलाओं, प्रवासियों और मुस्लिमों के लिए एक चमकती हुई सितारा हैं। कइयों के लिए रहमानी आज रोल मॉडल की तरह हैं।

 

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