Friday , October 19 2018
Home / देश / अक्षय कुमार और शबाना आजमी ने किया माहवारी के दौरान स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक

अक्षय कुमार और शबाना आजमी ने किया माहवारी के दौरान स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक

आपने अक्सर बुजुर्ग महिलाओं को यह सलाह देते सुना होगा कि पीरियड्स यानी माहवारी के समय हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। वह अक्सर पूजा-पाठ से दूर रहने, कहीं बाहर जाने और रसोई में प्रवेश नहीं करने की अनगिनत सलाह देती ही रहती हैं। लेकिन, आज पीरियड्स यानी माहवारी से जुड़े मिथक को खत्म करने का समय आ गया है। आम जनता ने इस अंधविश्वास को जड़ से खत्म करने के लिए बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार की अगुवाई में पैडमैन चैलेंज नामक एक अभियान भी चलाया है, जिसका उद्देश्य लोगों को पीरियड्स के बारे में जागरूक करना है।

Akshay Kumar to tackle period taboos at Niine Menstrual Awareness Conclave

इसी सिलसिले में माहवारी के दौरान स्वच्छता के महत्व पर जागरूकता बढ़ाने और मासिक धर्म से जुड़े मिथिकों से निपटने के उद्देश्य से पांच साल की एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत 28 मई, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के तौर पर चिह्नित करने के लिए मासिक धर्म जागरूकता सम्मेलन का ‘नीयन आंदोलन’ के रूप में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया। मासिक धर्म जागरूकता सम्मेलन भारत के पैडमैन अक्षय कुमार और शबाना आजमी द्वारा समर्थित है, जो इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। यह आयोजन दिल्ली के पंचतारा होटल आईटीसी मौर्य में हुआ था, जिसमें कई कार्यकर्ता भी शामिल हुए और उन्होंने इस पर चर्चा भी की।

Akshay Kumar to tackle period taboos at Niine Menstrual Awareness Conclave

बता दें कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) की 2015-16 की रिपोर्ट में सेनिटरी पैड के उपयोग को लेकर खुलासे हुए हैं। इस रिपोर्ट में साफ तौर से कहा गया है कि देश में आज भी 62 फीसदी लड़कियां और महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण भारत में केवल 48 फीसदी महिलाएं तो शहरी क्षेत्रों में केवल 78 फीसदी महिलाएं ही सेनिटरी पैड का उपयोग करती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत हुए सर्वे के अनुसार बिहार में 82 फीसदी महिलाएं पीरियड्स के दौरान कपड़े का इस्तेमाल करती हैं, वहीं उत्तर प्रदेश व छत्तीसगढ़ में यह आंकड़ा 81 फीसदी है, जो कि देश में सबसे ज्यादा है।
चुप्पी और शर्म के कारण मासिक धर्म पर चर्चा न करने के परिणामस्वरूप महिलाएं और लड़कियां इस संबंध में न केवल विकल्पहीन हो गई हैं, बल्कि इसी शर्म-ओ-हया ने उन्हें असुरक्षित मासिक धर्म प्रथाओं में भाग लेने के लिए छोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप मूत्र और प्रजनन पथ संक्रमण, तनाव और चिंता होती है। कुछ मामलों में, इसके परिणामस्वरूप लड़कियों और महिलाओं को लिंग आधारित हिंसा का शिकार बनना पड़ा, जिसमें उत्पीड़न, शारीरिक हमला और बलात्कार भी शामिल है।

इस मासिक धर्म जागरूकता सम्मेलन के समर्थन में अक्षय कुमार ने कहा कि ‘निन मेनस्टुªअल जागरूकता सम्मेलन दिमाग, प्रभावक और मासिक धर्म जागरूकता चैंपियनों की एक महत्वपूर्ण सभा है, जिसमें सभी को एक छत के नीचे बुलाकर इस संबंध में तत्कालिक मुद्दों, तालिकाओं और कलंकों का सामना करने के सामान्य लक्ष्य के साथ मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता से जोड़ा गया है। एक सामूहिक समाज के रूप में हम इस संबंध में चर्चा शुरू करने के बाद केवल बदलाव को प्रभावी कर सकते हैं। हम कह सकते हैं कि अंतरराष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर आयोजित यह सम्मेलन राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं के लिए एक उपयुक्त मंच है। साथ में यहां हम यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि प्रत्येक महिला और लड़की को अपनी इस खास अवधि को सुरक्षित रूप से और गरिमा के साथ प्रबंधित करने का अधिकार है।

About KOD MEDIA

Check Also

बधाई हो रिव्यूःइंतजार मत किजिए बस बधाई दे आईए

  मान लिजिए कि आपकी काँलेज खत्म हो गई। और नौकरी लग गई और अपनी …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *