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सावधान: एक तिहाई बच्चे गुजर रहे हैं मानसिक तनाव से!

भोपाल प्रदेश के एक तिहाई से अधिक स्कूली बच्चे किसी न किसी न किसी तनाव से गुजर रहे हैं। ऐसे बच्चो को निराशा एवं अवशाद से निकालनें के लिए निरंतर देखरेख और काउंसलिंग की जरूरत है। स्कूल के अध्यापक एवं अभिभावक को इस मामले में अधिक सतर्तता रखनें की जरूरत है।

बच्चों में चल रहे तनाव की भयावह स्थिती का खुलासा ग्वालियर मेडिकल कॉलेज द्वारा की गई एक रिसर्च मे हुआ। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. राघवेंद्र नें इस रिसर्च के नतीजो का ब्यौरा सरकार को भेज कर जरूरी उपाय करनें का आग्रह किया है। साथ ही प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में भी खास सावधानी बरतनें तो भी कहा है। इस संबंध में उन्होनें स्कूलो को भी पत्र भेजा।

आयोग के अध्यक्ष नें बताया कि ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज के डॉ. पीयूष दत्त स्वामी एवं उनकी टीम को 15 अलग अलग स्कूलो के 500 बच्चो पर की गई इस रिसर्च के चौकानें वाले परिणाम को दिखाया। मानसिक समस्याओ के चलते 26% स्कूली लड़किया एवं 21% लड़के तनाव से जुझ रहे हैं। बच्चो का यह तनाव उनके व्यवहार में भी झलकनें लगता है। इससे उबरनें के लिए ‘एडल्ट सेट फेंड्रली हेल्थ क्लीनिक’ बनानें का सुझाव दिया गया।

बाल आयोग के अध्यक्ष नें बताया कि उन्होनें राज्य सरकार को इस संबंध में उपाय करनें का सुझाव दिया है। साथ ही इस रिसर्च का ब्यौरा भी भेजा है। रिसर्च में तनावग्रस्त बच्चों के जो लक्षण बताए गए हैं उनके अनुसार पहली ही नजर में बच्चों को चिन्हित किया जा सकता है। उनपर विशेष ध्यान दिया जाय तो ये बच्चे उलझन से बाहर भी आ सकते हैं।

तनावग्रस्त बच्चों के लक्षण:

– पारिवारिक-सामाजिक कार्यक्रमों में दिलचस्पी कम हो जाना।
– बच्चों में भूलमें की आदत का पैदा होना।
– बच्चों का अपनी ही धुन या किसी विचार में खोए रहना।
– स्वभाव में चिड़चिड़ापन का बढ़ना।
– किसा बात का जवाब ठीक से न देना।

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