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जिस शख्स को टीएसआई प्रेम शंकर शाही फूल दे रहे हैं इसी की ही शामत आई थी वह तो शुक्र करो फोटो मिल गया वरना...!

लखनऊ: TSI प्रेम शंकर शाही से बचो! खुद गुलाब देते हैं, पत्नी से पिटवाते हैं… और बचाते भी हैं!

एके शुक्ला (क्राइम एडिटर)

लखनऊ (ए के शुक्ला): किसी ट्रैफिक विंग में तैनात पुलिसकर्मी की तारीफ हो या ना हो लेकिन  यूपी की राजधानी लखनऊ में बतौर ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर अपनी सेवा दे रहे प्रेम शाही अक्सर चर्चा में रहते हैं। कभी यातायात नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लेकर तो कभी नन्हें-मुन्ने बच्चों को यातायात के प्रति जागरूक करके। लेकिन कभी-कभी उनकी दरियादिली आम लोगों पर आफत ला देती है।

ऐसा ही कुछ प्रेम शाही जी के ‘कारनामों’ की वजह से तस्वीर में दिख रहे इन जनाव के ऊपर आफत आ गया। आफत भी छोटी-मोटी जगह से नहीं बल्की ‘गृह मंत्रालय’ से यानि बीवी की तरफ से। दरअसल, टीएसआई शाही उन लोगों का अभिवादन कर रहे थे जो हेल्मेट आदि लगाकर वाहन चला रहे थे यानि यातायात के नियमों का पालन कर रहे थे। अभिवादन के तौर पर टीएसआई शाही खुद ऐसे लोगों को गुलाब का फूल देकर उन्हें प्रोत्साहित कर रहे थे जो यातायात के नियमों का पालन कर रहे थे।

तस्वीर में दिख रहा शख्स भी वहां से गुजरा जहां टीएसआई शाही लोगों को गुलाब का फूल दे रहे थे। इन जनाब को भी उन्होंने गुलाब का फूल दिया। अब इन जनाब की बदकिस्मती थी कि या कुछ और कि वह इस गुलाब को लेकर अपने घर चले गए और पत्नी की नजर गुलाब पर पड़ गई। फिर क्या था उसका अंदाजा आप लगा सकते हैं और इसे कांस्टेबल सचिन कौशिक जो पुलिस की छवि सुधारने के लिए फेसबुक पेज शुरू किए हुए हैं उन्होंने इस तरह पूरा वाकया लोगों के सामने रखा है।

आप भी पढ़िए और यातायात के नियमों को खासकर लखनऊ में मत तोड़िए वर्ना पुलिस तो बाद में बीवी पहले….!

प्रेम शंकर शाही: नाम सब इंस्पेक्टर का लेकिन काम बहुत बड़ा

प्रेम शंकर शाही वैसे तो पद से यातायात विभाग में सब इंस्पेक्टर हैं लेकिन वह इस समय पांच-पांच इंस्पेक्टरों का काम कर रहे हैं। जब भी लखनऊ में वीवीआईपी मूवमेंट होती है तो यातायात व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रेम शंकर शाही पर ही आ जाती है। वह मेट्रो यातायात के भी इंचार्ज हैं और ई-चालान सेक्शन के भी इंचार्ज हैं इसके अलावा भी वह दो विंग संभाल रहे हैं। कहने का मतलब शाही सिर्फ नाम के सब इंस्पेक्टर हैं लेकिन उन्हें काम इंस्पेक्टर का करना पड़ता है वह भी एक-दो नहीं बल्कि पांच-पांच इंस्पेक्टर का काम संभालना पड़ता है। शाही पिछले ढाई साल से यातायात विभाग में हैं।

नहीं आना चाहता था पुलिस में: शाही

सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही ने काफी समय पहले एके शुक्ला से हुई बातचीत में बताया था कि वह पुलिस में नहीं आना चाहते थे लेकिन हालात ऐसे बन गए कि उन्हें पुलिस में आना पड़ा। उन्होंने बताया कि वह सिविल जज, आईएएस अफसर बनना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने चार-चार बार परीक्षाएं भी दीं। इस बीच 2002 में माता-पिता का देहांत हो गया और उनकी सिविल सर्विसेज की तैयारी करने की उम्र भी खत्म हो रही थी। उन्होंने कई जगहों पर आवेदन कर रखा था। उनके पास अब बैंक, सचिवालय, पुलिस समेत पांच विकल्प बचे थे। अंतत: उन्होंने पुलिस में जाने का निर्णय लिया। शाही ने बताया कि उनका यही मन था कि अगर वह सिविल जज अथवा आईएएस अफसर नहीं बन पाते हैं तो वह एक अच्छा अधिवक्ता बनेंगे। शाही ने एलएलबी, एलएलएम तक शिक्षा हासिल की है।

टीएसआई प्रेम शंकर शाही

ड्यूटी टाइम सिर्फ ड्यूटी

सब इंस्पेक्टर प्रेम शंकर शाही जिस समय ड्यूटी पर रहते हैं तो वह सिर्फ ड्यूटी ही करते हैं। यातायात के नियमों को तोड़ने वाले को वह किसी भी हाल में नहीं बख्शते। वह कैबिनेट मिनिस्टर के काफिले के एस्कार्ट का भी चालान कर देते हैं। सब इंस्पेक्टर शाही के काम करने का तरीका अनोखा है। कभी-कभी वह नियमों के लिए अपने ही सहकर्मियों की बात नहीं सुनते।

शाही ड्यूटी के क्रम में इंसानियत को कभी नहीं भूलते। अक्सर ऐसे समाचार सुनने अथवा देखने को मिलते हैं कि पुलिस ने गाड़ी का चालान कर दिया और उसे क्रेन से उठा लिया और उस गाड़ी में बच्चा था…! प्रेम शंकर शाही के साथ भी ऐसा कई बार हो चुका है जब गाड़ी में उन्हें बच्चा मिला हो। वह बच्चे को उसके घर तक पहुंचाते हैं और वाहन स्वामी को उनके वाहन के चालान की जानकारी देते हैं।

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