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10 रुपए में बिक रही है चलती-फिरती बीमारी

गर्मियों का मौसम आ चुका है और ऐसे में लोग सड़कों पर गर्मी से राहत पाने के लिए कई तरह के पेय पदार्थों का सेवन करते हैं. जिनमें से गन्ने का रस भी आता है. हम गर्मी से त्रस्त होकर कई तरह के पेय तो पी लेते हैं लेकिन उनसे होने वाले नुकसान के बारे में ध्यान नहीं देते हैं जिस कारण हमें गंभीर बिमारियों से दो-चार होना पड़ता है.

 आज हम आपको गन्ने के रस के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे आप बड़े ही चाव के साथ पीते हैं. अगर आप भी गन्ने का रस पीने के शौकीन हैं, तोजो हम यहां आज आपको बताने जा रहे हैं उसे ध्यान से पढ़ियेगा.

अक्सर गन्ने वाले गर्मियों में गन्ने के रस में बर्फ की मिलावट कर देते हैं. लेकिन आपको यह पता होना चाहिए कि गन्ने का रस और बर्फ दोनों की तासीर अलग है. ये आपको गंभीर बीमारी भी दे सकता है. यदि आप जरा-सी सावधानी बरतेंगे तो बीमारी से बच सकते हैं. गन्ने का रस पीने से पहले एक बार देखिए कि वह बनता कैसे है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गन्ने की सफाई नहीं की जाती. गन्ने पर काली फफूंद लगी होती है. हो सकता है कि जिस गन्ने का जूस आप पी रहे हों, उस पर खेतों की मिट्टी न हटाई गई हो. या नींबू धब्बेदार हो. उसके बीज भी नहीं निकाले जाते. पुदीना धोया नहीं जाता. रस निकलकर जिस पतरे में आता है उसे हाथ से तपेली की तरफ बढ़ाया जाता है.

क्या आपने कभी यह चेक किया कि जिन हाथों से ऐसा किया जा रहा है वह साफ हैं या नहीं. उन्हीं हाथों से गन्ना पकड़ा जाता है, जनरेटर चलाया जाता है मशीन को घुमाया जाता है. हाथ कभी धोए नहीं जाते. बस यहीं से बीमारी के सारे लक्षण शुरू हो जाते हैं.

गन्ने पर जो फफूंद होती है उससे हेपेटाइटिस ए, डायरिया और पेट की बीमारियां होती हैं. इसी प्रकार गन्ने की मिट्टी से भी पेट संबंधी बीमारियां होती हैं. अब कुछ ध्यान देने वाली बातें. गन्ने में अगर लालिमा है तो इसके रस मत पीजिए. इस फफूंद को गन्ने की सड़ांध या रेड रॉट डिजीज कहा जाता है. यह एक तरह का फंगस है, जो गन्ने के रस को लाल कर देता है. इससे जूस की मिठास भी कम हो जाती है. ऐसा गन्ना सस्ता मिलता है और सेहत के लिए नुकसानदायक होता है.

अगर गन्ने का रस बनाते समय साफ सफाई का ध्यान न रखा जाए तो ज्वाइंडिस, हेपेटाइटिस, टायफायड, डायरिया जैसी बीमारियां हो सकती हैं.

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