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राजघराने की लड़ाई का फायदा उठा रही बीजेपी, कांग्रेस को उसके घर में मिल रही चुनौती!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 में बाजी मारने के लिए सभी दल अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। जोड़-तोड़ तो हर दिन की आम खबर बन गई है। पर बीजेपी ने यूपी में, वो भी कांग्रेस के गढ़ में ऐसा तीर चलाया है, जो कांग्रेस के लिए अभेद्य किले की तरह रहे अमेठी-रायबरेली में कांग्रेस की चूले हिला सकती है। भारतीय जनता पार्टी ने अमेठी राजघराने की बहू(बागी) गरिमा सिंह को टिकट देकर मैदान में उतार दिया है। गरिमा सिंह का राजमहल भूपति भवन पर कब्जे को लेकर संजय सिंह के साथ विवाद चल रहा है। संजय सिंह मौजूदा समय में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं। भारतीय जनता पार्टी का ये दांव अमेठी और रायबरेली में समूचे कांग्रेस नेतृत्व को घुमा सकता है।

अमेठी को जानने वाले लोग जानते हैं कि संजय सिंह कभी संजय गांधी के बेहद करीबी रहे हैं। वो राजीव के भी करीबी रहे हैं। अमेठी रियासत के राजा संजय सिंह भारतीय जनता पार्टी में भी रह चुके हैं, तो पिछले लोकसभा में वो कांग्रेस के टिकट पर सुल्तानपुर लोकसभा सीट से चुनाव भी जीत चुके हैं। वहीं, अमेठी के कांग्रेसी किले को अभेद्य बनाने वाले प्रमुख सिपहसालारों में भी वो रहे हैं। पर उनकी पहली पत्नी से अमेठी राजमहल पर कब्जे को लेकर विवाद चल रहा है। उन्होंने दो शादियां की है, जिसमें अमिता सिंह उनकी दूसरी पत्नी हैं। अमिता सिंह 2008-2012 तक अमेठी सीट से कांग्रेस की विधायक रह चुकी हैं। लेकिन हवेली की लड़ाई जब साल 2014 में चरम पर आई, तो अमेठी के लोग पहली बहू के पक्ष में खड़े हो गए।

पहली बहू से मतलब संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह से हैं। उनके पुत्र अनंत विक्रम सिंह भी बीजेपी से जुड़ चुके हैं। कुछ समय पहले अमेठी राजघराने के 450 साल पुराने महल भूपति भवन पर कब्जे को लेकर जमकर गोलीबारी भी हुई थी, जिसमें कई लोगों की जानें भी गईं थी। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोग गरिमा सिंह और अनंत विक्रम सिंह के पक्ष में लामबंद हो चुके हैं। इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अमेठी से गरिमा सिंह को टिकट दे दिया है। साथ ही अमेठी जोन में प्रचार में भी उन्हें अहम जगह दी जा रही है।

गरिमा सिंह के साथ आम लोगों की भावनाएं तो जुड़ी ही हैं. गरिमा शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी के करीब भी रही हैं। जनता दल के बड़े नेताओं से गरिमा के घरेलू संबंध रहे हैं। यही वजह थी कि साल 1988 में संजय सिंह गरिमा की वजह से गांधी परिवार का साथ छोड़कर जनता पार्टी में चले गए थे। उन्होंने 1989 में राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। पर वो हार गए। लेकिन साल 1998 में वो अमेठी से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत गए थे। इसके आगे साल 1999 में उन्होंने अमेठी से सोनिया गांधी को सीधी चुनौती दी, पर वो हार गए और साल 2003 में वापसी करते हुए कांग्रेस से जुड़ गए। कांग्रेस से दुबारा जुड़ते हुए उन्होंने पुराने रिश्तों को मजबूत कर लिया, पर गरिमा सिंह परिवार से बेदखल हो गई थी।

इन सबकी कहानी सैय्यद मोदी जैसे बड़े बैडमिंटन खिलाड़ी की हत्या, उनकी पत्नी अमिता मोदी से संजय सिंह का विवाह, हाइकोर्ट द्वारा संजय-गरिमा सिंह के तलाक को अवैध ठहराना और गरिमा सिंह की भूपित महल में वापसी जैसे तमाम किस्से अमेठी के लोगों की जुबान पर है। जो इस बार की चुनावी लड़ाई में बीजेपी के लिए कांग्रेसी किले को वेधने में निर्णायक भूमिका भी निभा सकते हैं।

 

About Anchal Shukla

Young journalist from New Delhi. कराटे में ब्लैकबेल्ट चैंपियन। भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी की प्रशिक्षु नृत्यांगना। लचीली पर बेहद मजबूत। राजनीति से लेकर खेलों(हर तरह के खेल), मनोरंजन(हर इंडस्ट्री की खबरें), व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय खबरें(व्यापार, तनाव, युद्ध) के साथ ही साहित्य में भी रूचि। सबकुछ समेटे और समाज की बुराइयों से लड़ने की ताकत रखने वाली मजबूत कलमकार बनने की कोशिश...

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