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कैशलेस हो रहा देश फिर से कैश को पसंद करने लगा!

नई दिल्ली। भारत फिर से कैश को पसंद करने लगा है। दिसंबर तक डिजिटल ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी हो रही थी, परंतु जनवरी में कार्ड से पेमेंट में गिरावट से साफ है कि लोगों का रूझान कैश पेमेंट की तरफ लौट रहा है। नए नोटों की सप्लाई बढ़ने से भी कैशलेस पेमेंट को बड़ा झटका लगा है।

कैश ना हो तो कैशलेस चलेगा, कैश हो तो कैश ही चलेगा। ये है देश की जनता का संदेश। पिछले 15 दिनों के आंकड़े दिखाते हैं कि लोग फिर से कैश ट्राजैक्शंस की तरफ लौट रहे हैं। नोटबंदी के बाद कैश की किल्लत के चलते डिजिटल ट्रांजैक्शन में जो इजाफा देखने को मिला था, वो अब पीछे छूट गया है।

साफ है कि नोटबंदी के 50 दिन भी लोगों की आदत में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सके। इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 9 नवंबर से 17 नवंबर के बीच 27 सर्विसेज के लिए 28 करोड़ 60 लाख से ज्यादा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हुए, वो दिसंबर के दूसरे हफ्ते से ही घटने लगे थे। और 9 से 18 जनवरी के बीच सिर्फ करीब 21 करोड़ ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हुए। जानकारों के मुताबिक ई-ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए सरकार को कुछ बातों पर ध्यान देना होगा।

दरअसल, 30 दिसंबर तक डिजिटल ट्रांजैक्शन के चार्जेस पर जो छूट थी, वो धीरे-धीरे बैंकों और ई-वॉलेट कंपनियों ने हटा ली हैं। इससे डिजिटल ट्रांजैक्शन कैश के मुकाबले महंगा हो गया है। साथ ही, सिस्टम में अब कैश भी बढ़ने लगा है। हाल ही में आरबीआई ने एटीएम से पैसे निकालने की सीमा को 4500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया है। इन सबका असर कैश ट्रांजैक्शन में बढ़ोतरी के रूप में दिख रहा है।

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