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कैश मैनेजमेंट पर रिजर्व बैंंक के निर्णय से हो सकती है राष्ट्रीय सुरक्षा को समस्या

नई दिल्ली।रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया का निर्णय जिसमें उसने विदेशी कैश मैनेजमेंट कंपनियों को देश भर के बैंक एवं एटीएम में नकदी वितरण करने और कैश की कमी पर एटीएम की रिफलिंग की इजाजत दी गई है, उससे आने वाले समय में देश के सामने राष्ट्रीय और वित्तीय संकट उत्पन्न हो सकता है। देश भर की निजी सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिनिधि संस्था CAPSI कापसी या सेंट्रल एसोसियेशन आॅफ प्राइवेट सिक्यूरिटी इंडस्ट्री के चेयरमेन कुंवर विक्रम सिंह ने यह विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, वित्त मंत्रालय को पत्र लिखते हुए रिजर्व बैंक के इस सिलसिले में जारी किये गए आॅर्डर—आदेश को रदद करने का भी अनुरोध किया है।

कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि यही नहीं, इस निर्णय से देश की करीब 5 हजार से अधिक मध्यम एवं छोटे उद्वोग (MSMEs) की अकाल मौत या उनके बंद होने का खतरा भी उत्पन्न हो गया है। ये ऐसे छोटे—मंझोले कैश—सुरक्षा एजेंसियां हैं जो पिछले 20 साल से भी अधिक समय से बैंकों और एटीएम को कैश सप्लाई का कार्य कर रही हैं। इसकी वजह से हजारोंं पूर्व सैनिक अपनी नौकरी—कारोबार गवां चुके हैं और इस समय बेहद खराब वित्तीय स्थिति में हैं। कैश मैनेजमेंट का कार्य कर रही भारतीय कंपनियां इस निर्णय की वजह से इस हालत में भी नहीं हैं कि वे कैश सप्लाई के लिए खरीदी गई वैन और अन्य वाहन की किश्त तक दे पाएं। रिजर्व बैंंक के इस औचक निर्णय से छोटी—मझोली भारतीय कैश मैनेजमेंट कंपनियों के सामने कारोबर बंदी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि ऐसी कोई भी वजह नहीं थी जिसकी वजह से कैश मैनेजमेंट कारोबार को लेकर रिजर्व बैंक को निर्णय देने या आॅर्डर निकालने की जरूरत थी। फिलहाल तक बैंक अपनी जरूरत, मानक और कानून प्रक्रियाओंं के तहत भारतीय कैश मैनेजमेंट कंपनियों को अनुबंधित करती थी। इतने वर्षो में एक भी ऐसा वाकया नहीं हुआ है जिसमेंं भारतीय कंपनियों की कैश वैन से रकम लूटी गई हो या चुराई गई हो और इसका नुकसान रिजर्व बैंक या बैंकों को हुआ हो। इसकी वजह यह है कि सभी भारतीय कंपनियो का यह कारोबार पूरी तरह से बीमा दायरे में है और इंश्योरड रहता है।

CAPSI Chairman कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि आरबीआई का इस तरह से अचानक से आॅर्डर निकालना कई चिंता उत्पन्न करता है। रिजर्व बैंक का अचानक से इस तरह समस्त कैश मैनेजमेंट विदेशी कंपनियों को सौंपने का आदेश चिंता उत्पन्न करता है। राष्ट्रीय कैश को पूरी तरह से विदेशी कंपनियों के हाथ में सौंपना ऐसे तंत्र पर विश्वास करना होगा जिससे हम परिचित नहीं है और जो कभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा से भी समझौता साबित हो सकता है। इस समय ऐसी एक कंपनी का स्वामित्व एक ऐसी कंपनी के पास है जिसमें विदेशी प्रतिभागी और शेयर हैं। ये विदेशी कंपनी पूंजी बाजार से जुड़ी होती हैं। जिसके पास अधिक शेयर हो वह कंपनी का मालिक हो जाता है। ऐसे में कल अगर ऐसी किसी कैश मैनेजमेंट कंपनी को चीन या पाकिस्तान की कोई मुखौटा या फ्रंट कंपनी खरीद लेती है तो फिर क्या होगा। यह हमारी आतंरिक, राष्ट्रीय और वित्तीय सुरक्षा के साथ एक समझौता होगा। जिससे बचने की जरूरत है।

कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि अगर इन कंपनियों के शेयर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार में गिरते हैं तो ये कंपनियां बंद हो सकती हैं और भारत में अपना कारोबार बंद कर सकती हैं। ऐसा होने पर समस्त बैंक और एटीएम लंबे समय के लिए नकदी या कैश समस्या से त्रस्त हो सकते हैं। बाजार में नकदी की कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति की कल्पना किजिए जब देश में नकदी नहीं हो। उस समय क्या हालात होंगे। देश मेंं कानून—व्यवस्था की स्थिति पर भी इसका असर हो सकता है। यह कानून—पुलिस व्यवस्था के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि वह पहले ही प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और वित्त मंत्री से मिलकर दखल देने का अनुरोध कर चुके हैं। हमनें उनसे आग्रह कियाा है कि वे स्थिति आकलन करे, उसकी विवेचना करें और इसकी समीक्षा कर रिजर्व बैंक के इस मनमाने आॅर्डर को त्वरित आधार पर निरस्त—कैंसिल करें। कुंवर विक्रम सिंह ने कहा कि हमनें प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को बताया है कि कैसे एक भारतीय कंपनी, जिसकी मजबूत राजनैतिक पकड़ है, उसने रिजर्व बैंक के साथ मिलकर राष्ट्रीय कैश नकदी पर कब्जा करने के लिए एक सुनियोजित तरीके से रिजर्व बैंक से इस तरह का आॅर्डर पारित कराया है। इस तरह की नीति बनवाई है कि विदेशी कंपनियों के सहारे केवल उसे लाभ हो। यही वजह है कि हमनेंं प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को त्वरित आधार पर यह निर्णय वापस लेने का अनुरोध किया है।

श्री सिंह ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले हमनें इस मामले में वित्त मंत्री का कार्यभार देख रहे श्री पीयूष गोयल से भी मुलाकात की थी। उस समय वह वित्त मंत्री श्री अरूण जेटली की अनुपस्थिति में वित्त मंत्रालय का प्रभार देख रहे थे। उन्होंने हमें आश्वस्त किया था कि वह इस गंभीर मुददे का संज्ञान लेंगे। इस पर कार्यवाही करेंगे।

हमनें एमएसएमई सूक्ष्म, मध्यम एवं मंझोले मंत्रालय में तैनात संयुक्त सचिव से भी मुलाकात की थी। उनसे भी हमनें अनुरोध किया था कि वह इस आॅर्डर के खिलाफ दखल दें क्योंकि यह एमएसएमई एक्ट MSME Act  का भी उल्लंघन करती है क्योंकि यह देश की करीब 2000 से अधिक छोटी—मंझोली कंपनियों से कैश मैनेजमेंट का कारोबार पूरी तरह से छीन लेती है और केवल 2—3 बहुराष्ट्रीय कंपनी को यह पूरा कारोबार सौंप देती है। हमनें भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग Competition Commission of India से भी दखल का अनुरोध किया है क्योंकि यह आॅर्डर कैश मैनेजमेंट कारोबार में एकाधिकार को स्थापित करता है, जो भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की मूल भावना पर हमला करता है और उसका विरोध करता है।

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