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कोलंबिया अस्‍पताल गाजियाबाद के चिकित्‍सकों के ‘सावधानी भरे शब्‍द आपका मोबाइल मस्तिष्‍क ट्यूमर का कारण बन सकता है

गाजियाबाद । आजकल जमाना पूरी तरह से तकनीक पर निर्भर हो गया है इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि लैपटॉप टैबलेट और स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट अब शहरी क्षेत्रों में लोगों की काफी हद तक प्रभावित कर रहे हैं। 2011 में डब्ल्यूएचओ ने सेलफोन विकिरण को 2बी कार्सिनोजन में वर्गीकृत किया था जो कि उपयोगकर्ताओं के बीच ट्यूमर के बढ़ते खतरे में संभावित वृद्धि के प्रमाण के आधार पर ही था। 2007 में ऑक्‍कप एनवायरन मेड नामक पत्रिका में आश्‍चर्य कर देने वाला शोध प्रकाशित हुआ इसमें यह पाया गया कि सेलुलर फोन का ज्‍यादा समय तक प्रयोग (लगातार 10 से अधिक वर्षों तक) करने से मस्तिष्क ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है।

जैसा कि हम इस वर्ष हम विश्व मस्तिष्क ट्यूमर दिवस मना रहे हैं कोलंबिया एशिया अस्पताल गाजियाबाद के डॉक्टरों का कहना है कि शहर में ब्रेन ट्यूमर और अन्य प्रकार के कैंसर की बढ़ती घटनाओं के पीछे सबसे अधिक सेलफोन का उपयोग और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का अधिक उपयोग इसके लिए जिम्‍मेदार प्रमुख जोखिम कारक बनते जा रहे हैं।

पिछले दशक से सेलफोन का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। शहरी क्षेत्रों में खासकर गाजियाबाद जैसे शहरों में बढ़ते ऐशो-आराम बढ़ने के साथ लोगों की शारीरिक गतिविधि में लिप्‍तता कम हुई है इसके अलावा लोग जंक फूड का सेवन भी अधिक करने लगे हैं इसके साथ इस गैजेट की लत लोगों को लगती जा रही है जो कि स्‍वास्‍थ्‍य के लिए एक खतरे की तरह है। तकनीक उन्‍नत होने के कारण मोबाइल फोन विकिरण के कारण होने वाले कार्सिनोजेनिक प्रभाव को अच्‍छी तरह से जांचा जा चुका है जिसके कारण इससे होने वाले नयूरोलॉजिकल रोगों की समझ चिकित्‍सा जगत को हो गई है। मोबाइल फोन के प्रयोग से न केवल प्रयोगकर्ता प्रभावित होता है बल्कि इसके आसपास रहने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं। मोबाइल फोन का प्रयोग लंबे समय तक करना निसंदेह ही भयावह स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी खतरे की तरफ इशारा करता है। पूर्व में इससे संबंधित हुए शोधों में इस बात का पता चल भी चुका है। दरअसल सेलफोन प्रयोग के दौरान निकलने वाले विकिरण दिमाग के अंदर लगभग दो इंच तक के क्षेत्र को प्रभावित करते हैं और इससे दिमाग क्षतिग्रस्‍त भी हो सकता है। ये बातें डॉ। सुधीर वर्मा, चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख,कोलंबिया एशिया अस्पताल गाजियाबाद ने कहीं।

सेलफोन अगर हाथ में हो तो भी इससे हानिकारक रेडियोफ्रीक्वेंसी (आरएफ) तरंगों का उत्सर्जन होता है। सेलफोन के पास रहने वाले ऊतकों को यह वॉयरलेस ऊर्जा क्षतिग्रस्‍त कर देती है जिसके परिणामस्‍वरूप न्यूरोलॉजिक समस्‍यायें जैसे – नियोप्‍लाज्‍म एकाउस्टिक न्‍यूरोमा ग्‍लीओमा और दूसरे विभिन्‍न तरह के कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है। दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच है, सेलफोन विकिरण जब हमारे शरीर में प्रवेश करता है तब ये हमारे शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। इसके अलावा पश्चिमी देशों में हुए शोध की मानें तो सेल फोन के अधिक प्रयोग के कारण शरीर की ऊर्जा का स्‍तर कम हो जाता है भावनात्‍मक और मनोवैज्ञानिक व्‍यवहार भी इससे प्रभावित होता है और शरीर का मेटाबॉलिज्‍म भी प्रभावित होता है।

एक अग्रणी फोन कंपनी के एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि औसतन एक भारतीय 16 घंटे के लंबे चक्र के दौरान प्रत्‍येक 6 मिनट 30 सेकेंड्स में अपने फोन को देखता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ प्रीनेटिव मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक 20-45 साल के उम्र वर्ग के बीच कम से कम 10% चोटों के लिए जिम्‍मेदार कारक स्मार्ट फोन और कंप्यूटर हैं।

सेल फोन का उपयोग करते समय लोग अपने सिर को इसके बहुत करीब रखते हैं लेकिन इस बात से ट्यूमर का कितना संबंध है या फिर यह ट्यूमर को कितना प्रभावित करता है इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है। अतीत में जानवरों के अध्ययन से पता चला है कि आरएफ एनर्जी कार्सिनोजन के कारण ट्यूमर के विकास को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि ये बातें मनुष्य के लिए भी सच हो सकती हैं या नहीं, अभी भी इस पर विवाद है। हमने वास्तव में पाया है कि मस्तिष्क के ट्यूमर सिर के किनारे पर अधिक होते हैं जहां लोग अपने सेलफोन को बार-बार पकड़ते हैं। हालांकि हम 21वीं सदी में सेलफोन से दूर नहीं कर सकते हैं लेकिन हमें इसके दुरुपयोग से खुद को बचाना होगा इसके सही तरीके से प्रयोग पर बल देना होगा। ताकि शरीर को वास्तविक दुनिया में रहने की अनुमति मिल सके,जिससे हमारा शरीर प्राकृतिक वातावरण में रहे और हम चैन की नींद ले सकें और इससे ब्रेन कैंसर होने की संभावना को कॉफी हद तक कम करने में मदद भी मिल सकती है। Þ डॉ। सुधीर वर्मा, चिकित्सा सेवाओं के प्रमुख, कोलंबिया एशिया अस्पताल गाजियाबाद ने ये बातें भी कहीं।

 

नियमित रूप से सेलफोन का सुरक्षित और सही तरीके से उपयोग करने और इससे संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों की संभावना कम करने के लिए यहां कुछ अन्य युक्तियां दी गई हैं:

  • मोबाइल की विभिन्‍न कं‍पनियों द्वारा फोन एसएआर (विशिष्ट अवशोषण दर) रेटिंग के साथ उपलब्‍ध है। उन मोबाइल फोन को खरीदें जिनका न्‍यूनतम एसएआर हो।
  • फोन के दैनिक उपयोग को कम करें बहुत आवश्‍यक हो तभी इसका प्रयोग करें। अधिक देर तक बात करने के लिए लैंडलाइन का प्रयोग करें।
  • बार-बार फोन करने की बजाय मैसेज करें और जब भी लगे कि अब आपने फोन का प्रयोग कर लिया है तो कुछ वक्‍त के लिए इसे ऑफ करके बगल में रख दें।
  • जब भी आप किसी से बात करते हैं तो हमेशा अपने हेडसेट का प्रयोग करने की कोशिश करें हालांकि ब्लूटूथ इयरफोन का उपयोग न करें क्‍योंकि यह भी विकिरण उत्सर्जित करता है।
  • जब आप अपने सेल फोन पर नेटवर्क संबंधित दूसरे काम नहीं कर रहे हैं तो इसे सामान्‍य काम के लिए ऐरोप्‍लेन मोड पर कर लें। इस मोड पर आप गेम या दूसरे काम भी कर सकते हैं।
  • सोने से कुछ घंटों पहले से ही मोबाइल का प्रयोग करना बंद कर दें और उठने के तुरंत बाद इसका प्रयोग करने से बचें। बेड पर बिना फोन जाने का नियम बनायें और अपने पार्टनर के साथ परिवार के दूसरे सदस्‍यों से भी इस नियम का पालन करने के लिए कहें।

 

 

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