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मिशन-2019 के लिए मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक, OBC कोटे में कोटा देगी

मोदी सरकार ओबीसी कोटे के अंदर कोटे की व्यवस्था करने के फिराक में है। ओबीसी के अंदर एक उप श्रेणियां बनाने के लिए एक आयोग के गठन को प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेज दी गई है। आयोग अपने गठन के बाद 3 महीनें में सरकार को रिपोर्ट देगा। केंद्र सरकार की मंशा झारखंड, बिहार समेत 11 राज्यों की तर्ज पर पिछड़ी जातियों और अति पिछड़ी जातियों की उप श्रेणियां बनाने की हैं।

इसके लागू हो जाने से सेंट्रल गवर्मेंट की नौकरियों में भी आरक्षण का लाभ उठाने से वंचित कुछ जातियों को सीधा लाभ मिल जाएगा।

कैबिनेट की बैठक के बाद वित्तमंत्री ने ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की सीमा को छह लाख से बढ़ा कर आठ लाख करने का निर्णय के बारे में बताया।

पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का निर्णय कर चुकी मोदी सरकार ने अब ओबीसी कोर्ट के अंदर कोटे की व्यवस्था करके पिछड़ी जातियों में शुमार उन जातियों को राहत देने की तैयारी कर ली है, जिन्हें आरक्षण का लाभ पूरा नहीं मिल पाता है।

गौरतलब है कि नब्बे के दशक में मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू होने के बाद से ही ओबीसी आरक्षण व्यवस्था की सिफारिश की मांग बराबर उठती रही है। जेटली ने बताया की कांग्रेस के शासनकाल के दौरान साल 2011 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने ओबीसी में उपश्रेणियां बनाने की सिफारिश सरकार से की थी। उसके बाद साल 2012-13 में संसद की स्थाई समिति ने भी इसी संबंध में सिफारिश की थी।

अब मंत्रिमंडल ने सिफारिशों के अनुरूप नई व्यवस्था के लिए आयोग गठित करने का निर्णय लिया है। यूपीए सरकार के दौरान वर्ष 2013 में इसकी समीक्षा की गई थी मगर किसी भी निर्णय पर नही पंहुचा जा सका था।

बिहार की कर्पूरी ठाकुर सरकार ने 70 के दशक में की थी पहल

ओबीसी में उपश्रेणियां बनाने की सबसे पहले पहल बिहार की कर्पूरी ठाकुर सरकार ने की थी। उस वक़्त ओबीसी कोटे में कोटा देने के लिए अनुसूची एक और अनुसूची दो की व्यवस्था की गई थी। इसके तहत ओबीसी को दो भागों पिछड़ी जाति और अत्यंत पिछड़ी जाति (ईबीसी) के रूप में बांटा गया था।

अत्यंत पिछड़ी जाति में उन जातियों को शामिल किया गया जो ओबीसी में शामिल दूसरी जातियों के तुलना में काफी पिछड़े थे। बाद के वर्षो में इस व्यवस्था को झारखंड, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, आंधप्रदेश प्रदेश, तेलंगाना सहित 11 राज्यों ने अपने यहां लागू की। पर देश के सबसे बड़े राज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश में इस तरह की कोई व्यवस्था लागू नहीं है।

केंद्र की बीजेपी सरकार का दोहरा सियासी दांव

क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ाने के अतिरिक्त उपश्रेणियां बनाने के लिए आयोग गठन के निर्णय को मोदी सरकार की दोहरी सियासी दांव माना जा सकता है। दरअसल मिशन-2019 के लिए ये व्यवस्था बीजेपी और मोदी सरकार के लिए संजीवनी का काम करेगी, क्योंकि बीजेपी की पहले से ही पिछड़ी जातियों में पैठ बढ़ाने पर नजर है।

इसी क्रम में सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का निर्णय करने के बाद इसका जम कर प्रचार-प्रसार किया। क्रीमी लेयर की सीमा बढ़ा कर इसी वर्ग को अपने पाले में लाने की दिशा में एक और कदम है। पर उपश्रेणियां बना कर मास्टर स्ट्रोक लगाया।

केंद्र सरकार और पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस दांव से ओबीसी में आरक्षण का पूरा लाभ लेने से वंचित जातियां बीजेपी के पक्ष में खड़ी होगी। क्योंकि इसमें शामिल ज्यादातर जातियां एक दो जाति विशेष पर आरक्षण का लाभ हजम करने का दशकों से आरोप लगाती आ रही है।

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