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भूखे रहने वाले युवा हो रहे है मधुमेह का शिकार

युवाओं की दिनचर्या में बदलाव के साथ भोजन छोड़ने से वे मधुमेह का शिकार हो रहे हैं. आम विश्वास के विपरीत भोजन छोड़ने से वास्तव में एक व्यक्ति मोटापे का शिकार हो सकता है. मधुमेह रोगियों को आंखों, किडनी, दिल, दिमाग, पैर और नसों को प्रभावित करने वाली लंबे वक्त की बीमारियां होने की ज्यादा संभावना होती है.

आधुनिक जीवन शैली के चलते लोगों के पास वक्त की कमी हो गई है और लोग अक्सर अपनी व्यस्त जीवन शैली से कदम मिलाने के लिए भोजन छोड़ देते हैं. यह भी एक मशहूर धारणा बन चुकी है कि खाना न खाने से वजन घटता है. हालांकि, हकीकत यह है कि वजन कम करने के लिए रोजाना की जाने वाली कैलोरी खपत में कमी की जरूरत होती है. जबकि पूरी तरह से भोजन छोड़ने का परिणाम थकान और खराब पोषण हो सकता है.

कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल, गाजियाबाद के डॉ स्वप्निल जैन , कंसल्टेंट एंडोक्रिनोलॉजी, कहते हैं, “आम धारणा के विपरीत खाना छोड़ने से एक व्यक्ति वजन घटाने की बजाए बढ़ा सकता है. खाना न खाने से लिवर की कोशिकाएं  इंसुलिन की प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं. इंसुलिन हार्मोन शर्करा को तोड़ने के काम आता है. इसकी वजह से खून में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा बढ़ जाती है जो शरीर में वसा के रूप में इकट्ठा हो जाती है. लोग विशेषकर युवा आज व्यस्त कार्यक्रमों या फिर वजन कम करने के मकसद से एक या दो बार का भोजन भी नहीं करते हैं. इसकी वजह से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है.

सामान्य ब्लड शुगर स्तर बरकरार रखने के लिए मानव शरीर कई चयापचय (मेटाबोलिक) प्रक्रियाओं का उपयोग करता है. जब कोई व्यक्ति एक बार का भोजन छोड़ देता है, तब शरीर सोचता है कि यह भूखे रहने की अवस्था है, इसकी वजह से शरीर को संकेत मिलता है कि वो चयापचय का प्रक्रिया को धीमा कर दे. इसके साथ ही कम ब्लड शुगर स्तर मस्तिष्क को संकेत भेजता है कि शरीर भूखा है और भूख का स्तर बढ़ रहा है. परिणामस्वरूप अगली खुराक लेते वक्त व्यक्ति ज्यादा खा लेता है जिससेे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है. इसके अलावा चूंकि मेटाबोलिज्म (चयापचय) पहले से ही धीमा था, शरीर इस ज्यादा भोजन को पचाने में ज्यादा वक्त लेगी. असंतुलित ब्लड शुगर स्तर के साथ चयापचय के बढ़ने-घटने से आने वाले वक्त में मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है.

जिन लोगों को मधुमेह होता है उनमें आंखों, किडनी, दिल, दिमाग, पैर और नसों की लंबी वक्त तक की बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है. इन परेशानियों से बचने या इन्हें दूर रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि अपने ब्लड शुगर स्तर को नियंत्रित रखा जाए और मधुमेह होने की संभावना से बचा जाए. दिनचर्या में मामूली सुधार करके मधुमेह को शुरुआती स्तर में रोका जा सकता है. अनाज, दाल, फल, सब्जियां और कम वसा वाले दुग्ध उत्पाद समेत संतुलित आहार को चुनना चाहिए. पूरी तरह से भोजन न करने के बजाय नियमित अंतराल पर छोटी-छोटी खुराक (भोजन) करना, दिनचर्या में सुधार करने का सबसे मूलभूत तरीका है जो मधुमेह को लंबे वक्त तक दूर रखता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत में मधुमेह से पीड़ितों की संख्या करीब 5 करोड़ है और यह संख्या हर साल बेहद तेजी से बढ़ रही है. रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत मधुमेह के मामले में दुनिया की राजधानी बन चुका है और देश में अनुमानित रूप से ब्लड शुगर स्तर के बढ़ने से 34 लाख मृत्यु हो रही हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि आधुनिक जीवनशैली अपनाने वाले लोगों द्वारा भोजन छोड़ने की आम आदत और संतुलित आहार की कमी इस बढ़ती महामारी की प्रमुख वजह बनी है.

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