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EVM की हो पूरी जांच, इसमें झोल की पूरी संभावना: पूनावाला

  1. हाल ही में संपन्न हुए चुनावों के बाद हार-जीत के मुद्दे नें तो रफ्तार पकड़ी ही साथ में ई.वी.एम से हुई छेड़छाड़ का मुद्दा भी लगातार तूल पकड़ रहा है। वाद-विवाद अपील व सवालो के कारण चुनाव आयोग से इन तथ्यो व निष्पक्षता, ई.वी.एम. एवं वीवीपैट की सत्यता, जवाबदेही के पुन: मूल्यांकन को लेकर सूप्रीम कोर्ट के याचिकाकर्ता एवं एलं तहसीन पूनावाला नें आज राजधानी स्थित कटन्स्टीट्यूशनल क्लब में प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

मौके पर पूनावाला व रॉव दोनो नें मौजूद मीडिया-कर्मियों को संबोधित किया और उनके सामनें EVMसे जुड़े विभिन्न तथ्यो को रखा और अपील भी की। और साथ ही निष्पक्ष न्याय की मांग भी की। इस दौरान वी.वी. रॉव नें चीफ इलेक्शन कमिश्नर को लिखे गए खत से भी मीडिया को रूबरू कराया।

याचिका कर्ता वी.वी.रॉव द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका क्रं. 292 वर्ष 2009 में मुख्य चुनाव आयोग से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश एवं वैधानिक आवश्यकता को पूरा करनें हेतु भारत के सरकार द्वारा ई.वी.एम. एवं वीवीपैट निर्माताओ को भुगतान करनें हेतु हाल ही में जारी की गई राशि का अंतिम निर्धारण करनें से पहले- मीडिया द्वारा जारी की गई मध्यप्रदेश के भिन्ड जिले एवं राजस्थान के धौलपुर आदि में उपयोग किए गए ई.वी.एम. में गज़बड़ी की सूचना की गई कि ई.वी.एम. में डाले गए कुल वोटो की संख्या वीवीपैट से भिन्न पायी गई जिसमें भारत के चुनाव आयोग के सामनें मतदाताओ का भारतीय चुनाव पर विश्वास स्थापित करनें की एक नई चुनौती रखी गई।

इस देश की मीडिया, राजनीतिक दल और मतदाता इस बात का गवाह है कि याचिकाकर्ता के द्वारादर्शायी गयी चिंता से भारत का चुनाव आयोग सचेत हुआ है। और उन कई नए करीको पर ध्यान दिया है जिससे ई.वी.एम में छेड़छाडड की जा सकती है। इसमें सुरक्षा, प्रकियात्मक, तकनीकी, कानूनी और राजनीतिक चिंताएं सम्मिलित है। तकनीकि विशेषग्यों नें यह सिद्ध किया कि ई.वी.एम. से भी छेड़छाड़ की जा सकती है।

श्री राव नें बताया कि इस बात का खुलासा होनें पर कि वास्तव में ई.वी.एम. में छेड़छाड़ की जा सकती है, 13 राजनीतिक दलो के अध्यक्ष एक साथ भारत के चुनाव आयोग से मिले एवं याचिकाकर्ता और तकनीकि विशेषग्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए मतदाता सत्यापन पत्र के ऑडिट ट्रायल की आवश्यकता पर जोर दिया।

यद्यपि आरम्भ में भारत के चुनाव आयेग की ओर से प्रतिरोध दर्शाया गया पर बाद में चुनावो की पारदर्शिता ओर जवाबदेही के हित में इसके महत्व को समझनें के लिए नई समिति का गठन किया। इनके मार्गदर्शन में भारत के चुनाव आयोग नें उपलब्ध ई.वी. एम. में ही वीवीपैट को जोड़ना स्वीकार किया।

तहसीन पूनावाला नें याचिका के हवाले से बताया कि जहां सन् 2013 व सन् 2017 के बीच ज्यादातर मतदान केंद्रो में वीवीपैट आन्शिक रूप से उपलब्ध अथवा अनुउपलब्ध थे, तो एक ही विचार बचता है कि कागज के मत पत्रो का प्रयोग किया जाय।

पूनावाला ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय नें स्पष्ट रूप से माना है कि जब मतदाता अपना मत देता है तो वह संविधान की धारा 19(1)(अ) में स्थित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मूल अधिकार का प्रयोग करता है। इस प्रकार मतदाता द्वारा दिया गया मत पवित्र है और इसे चुनाव प्रक्रिया में प्रस्तुत होना चाहिए। श्री रॉव नें सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के हित में, हाल में हुए चुनाव में सामनें आए मुद्दो के बाद वीवीपैट के साथ ई.वी.एम. की प्रमाणिकता की सत्यता के लिए उठाए गए कदमों, प्राप्त सुझावों और इस चुनौती का सामना करनें के लिए प्रस्तावों से अवगत करानें की गुजारिश की है।

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