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फिल्म रिव्यू:हर मुस्लमान आतंकवादी नही होता यही मेसेज दिखाती अनुभव सिन्हा की ‘मुल्क’

मुल्क” की शुरुआत बनारस के एक खुशहाल मुसलमान परिवार से होती है जहां वकील मुराद अली मोहम्मद(ऋषि कपूर) अपने हिंदू पड़ोसियों के साथ बहुत अच्छा तालमेल है । इस परिवार का एक दिलचस्प किरदार है, वकील बहू आरती मोहम्मद (तापसी पन्नू) जो लंदन से अपने ससुराल वालों से मिलने आती है। कहानी में मज़ा तब आता है , जब अली मोहम्मद के भतीजे शाहिद( प्रतीक बब्बर) की शिनाख्त एक आतंकी हमले के जिम्मेदार आतंकवादी के रूप में होती है और पूरे परिवार को आतंकवादी माना जाता है ।खुशहाल परिवार की जिंदगी रातों-रात तबाह हो जाती हैं। शाहिद के पिता बिलाल (मनोज पाहवा) को इस आतंकी हमले का साजिशकर्ता मानकर गिरफ्तार कर लिया जाता है। सम्मानित वकील मुराद अली मोहम्मद को भी आरोपी बनाया जाता है। इस परिवार को आतंकवादी साबित करने के लिए सरकारी वकील संतोष आनंद (आशुतोष राणा) और पुलिस अफसर दानिश जावेद (रजत कपूर) कमर कस लेते हैं। असल में दानिश जावेद ही वह पुलिस अफसर है, जिसने शाहिद का एनकाउंटर किया था। अब मुराद अली मोहम्मद के पास अपने व अपने परिवार को निर्दोष साबित करने और अपने खोए हुए सम्मान को दोबारा पाने के अलावा और कोई चारा नहीं रह जाता। वह खुद अपने केस की पैरवी के लिए उठ खड़ा होता है, मगर कोर्ट में उसकी देशभक्ति और उसके मुसलमान होने को लेकर जिस तरह के सवाल उठाए जाते हैं, उससे विचलित होकर वह अपना केस अपनी बहू आरती मोहम्मद को लड़ने के लिए कहता है।

मुल्क’ आज के दौर की सबसे ज्यादा जरूरी फिल्म बन पड़ी है।लेखक-निर्देशक अनुभव सिन्हा फिल्म के सच्चे हीरो हैं जो पर्दे के पीछे काफी शानदार काम किया हैं।

अनुभव ने मुल्क के जरिए ऐसे मुद्दों और विषय पर प्रश्न किए हैं, जो आपके और हमारे जेहन में एक अरसे से दबे हुए हैं और हमारी सोच को कुंठित किए जा रहे हैं, मगर कोई भी इस पर संवाद नहीं करना चाहता। उन्होंने फिल्म में जेहाद के असली अर्थ की व्याख्या करते हुए बता दिया है कि उसका मतलब आतंकवाद नहीं बल्कि स्ट्रगल होता है। फिल्म में विभाजन की राजनीति पर भी प्रकाश डाला गया है।

फिल्म में कलाकारों का अभिनय पक्ष इतना सशक्त है कि आपको महसूस ही नहीं होतआतंकवादी करार देकर अपनी देशभक्ति को साबित करने का दर्द उन्होंने बखूबी बयान किया है। बिलाल के रूप में मनोज पाहवा की बेबसी और मासूमियत दर्शकों को गहराई तक जज्बाती कर देती है। उन्होंने अपने करियर का बेहतर किया है।

सरकारी वकील के रूप में आशुतोष राणा ने बहुत उम्दा काम किया तापसी और आशुतोष दोनों के बीच कोर्ट रूम ड्रामा दर्शकों के तालियों से सिनेमा हाल गुंज जायेगा।शाहिद के रूप में प्रतीक न शानदार अभिनय किया। फिल्म के अन्य किरदारों में नीना गुप्ता, प्राची पंड्या शाह और अन्य कलाकरों ने भी अच्छा काम किया हैं।। संगीत के मामले में ‘ठेंगे से’ और ‘पिया सामने’ जैसे गाने विषय के अनुरूप हैं।

रेटिंग:5/3.5

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