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ऑस्ट्रेलिया के कोल प्लांट में अडानी ग्रुप का खेल खराब, अब कहां से मिलेगा फाइनेंसर?

ऑस्ट्रेलिया में कोयला खदान के विकास और खनन के मामले में अडानी ग्रुप को बड़ा झटका लगा है। जी हां, जिस डील को लेकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की फंडिंग पर भारत देश में खूब बवाल मचा था, अब वो डील अडानी ग्रुप के लिए टेढ़ी खीर साबित होने वाली है। इस मामले में अब ऑस्ट्रेलिया की स्थानीय सरकार भी अपना हाथ खींच सकती है, जिसने पहले इसका समर्थन किया था। दरअसल, इस पूरे प्रोजेक्ट में अडानी इंटरप्राइज लिमिटेड को ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य की सरकार की तरफ से 900 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर(68.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर) का लोन मिलने वाला था। लेकिन अब ये नहीं मिल पाएगा।

जानें, क्या है पूरा मामला…

अडानी ग्रुप को ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में कोयला खदान के विकास और खनन का ठेका मिला था। इसमें भारतीय स्टेट बैंक की तरफ से भी वित्तीय निवेश की बात सामने आ रही है। इस मामले में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को विपक्ष ने खासा घेरा भी था। पर अब इस खदान के विकास के रास्ते में ही वित्तीय समस्याएं खड़ी हो गई हैं। इसके लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार की ओर से काफी कम दर पर लोन मिलने वाला था, पर क्वींसलैंड में लेबर पार्टी ने सत्ता में लौटने के साथ ही इस लोन को रोक देने के ऐलान किया है। इस मामले में केंद्रीय ऑस्ट्रेलियाई सरकार मदद करना भी चाहे तो क्वींसलैंड की राज्य सरकार इस पर ‘वीटो’ लगा देगी, जिसका उसे अधिकार है।

अडानी ग्रुप के लिए ये एक बड़ा झटका इसलिए भी है, क्योंकि क्वींसलैंड की स्टेट प्रीमियर(राज्य प्रमुख) अनास्टाकिया पालास्जुक ने ही इसका ऐलान किया है। जिन्होंने पहले इस सौदे को हरी झंडी दिखाई थी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट का समर्थन किया था, पर अब वो ही इसके विरोध में आ चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन(एबीसी) के मुताबिक क्वींसलैंड में सत्ताधारी लेबर पार्टी को सत्ता में वापसी के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा था।

अडानी ग्रुप को कोयले की जो खान मिली है, जो प्रशांत महासागर के व्यापारिक बंदरगाह से 400 किमी दूर है। ऐसे में कोयले को खदान से बंदरगाह तक लाने के लिए रेल की पटरियां भी बिछाई जानी थी। यही नहीं, इस प्रोजेक्ट को कमाई के लिहाज से बेहद खर्चीला भी माना जा रहा है। क्योंकि इस खदान के विकास के साथ ही इसके लिए ढांचागत विकास की भी जरूरत पड़ रही है।

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड बैंक ने कहा कि लेबर पार्टी द्वारा अडानी कोयला खदान पर रोक लगाने से दिक्कतें खड़ी हो गई हैं। ऐसे में ढांचागत विकास के लिए वित्तीय समस्याएं पैदा हुई हैं। भले ही 68.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर का ये लोन पूरे प्रोजेक्ट के 16.5 बिलियन (ऑस्ट्रेलियाई) डॉलर का छोटा हिस्सा हो, पर ये पहले से पिछड़ चुके प्रोजेक्ट के लिए फाइनेंसिंग की पहली सीढ़ी थी। अभी तक अडानी ग्रुप ने इस मामले में अपना पक्ष नहीं रखा है।

इस पूरे मामले में मैकरी कंजर्वेशन ग्रुप के कैंपेनर मैगी मैक्योन ने कहा कि अगर इस प्रोजेक्ट के लिए वित्तीय मदद रोक दी गई है, तो ये अडानी ग्रुप के इस बड़े प्रोजेक्ट में धन लगा रहे निवेशकों के लिए चेतावनी है कि ये प्रोजेक्ट राजनीतिक और आर्थिक तौर पर बेहद खतरनाक साबित होने वाला है। मैगी, इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे ग्रुप के सदस्य हैं।

अडानी ग्रुप अब इस प्रोजेक्ट के लिए 2 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का वित्तीय मदद बाहर की कंपनियों से ढूंढ रही है, खासकर चाइना मशीनरी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन(सीएमईसी) की तरफ से। दरअसल, इस प्रोजेक्ट के लिए बड़े बैंक भी वित्तीय मदद से इनकार चुके हैं, जिसमें डच बैंक के साथ ही कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है।

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