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“गोरखपुर में रहना है तो योगी योगी कहना है”

उत्तर प्रदेश के आखिरी छोर का जिला गोरखपुर जो राजधानी लखनऊ से 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गोरखपुर शहर मौर्य, कुषाण, शुंगा और गुप्त साम्राज्य का एक खास हिस्सा रहा है। इस शहर का नाम ऋषि गोरखनाथ के नाम पर रखा गया था।

गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है और यह शहर के बीचों बीच स्थित है। यह मंदिर उस जगह बनाया गया है जहाँ गुरु गोरखनाथ साधना किया करते थे। यह मंदिर 52 एकड़ जमीन पर बनाया गया है। यह मंदिर इस क्षेत्र में सबसे सुंदर और विशिष्ट मंदिरों में से एक है। प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी के दिन यहां मकर सक्रांति मेले का आयोजन किया जाता है। लाखों की संख्या में भक्त और पर्यटक विशेष रूप से मंदिर में होने वाले मेले में सम्मिलित होते हैं, इस मंदिर के महंत हैं योगी आदित्यनाथ।

आदित्यनाथ का असली नाम ‘अजय सिंह’ है। जो समय के साथ योगी आदित्यनाथ हो गया। अजय का जन्म उतराखण्ड के गढ़वाल में 5 जून 1974 को एक राजपूत परिवार में हुआ था। गढ़वाल विश्विद्यालय से गणित में बीएससी करने के बाद अजय सिंह ने गोरखपुर में गुरु गोरखनाथ जी पर शोध करना शुरू किया। जिसके बाद गोरखनाथ पीठ के महंत अवैद्यनाथ की दृष्टि आदित्यनाथ पर पड़ी। महंत अवैद्यनाथ के प्रभाव में आकर अजय सिंह का झुकाव अध्यात्म की ओर हो गया। जिसके बाद ही 22 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन त्यागकर योगी आदित्यनाथ सन्यासी हो गए। महंत ने अजय सिंह को नया नाम दिया ‘योगी अदियानाथ’।

अवैद्यनाथ ने 1998 में राजनीति से संन्यास लिया और योगी आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। यहीं से योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक पारी शुरू हुई है। 1998 में गोरखपुर से 12वीं लोकसभा का चुनाव जीतकर योगी आदित्यनाथ संसद पहुंचे तो वह सबसे कम उम्र के सांसद थे, वो 26 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने। 1998 से लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। योगी यूपी बीजेपी के बड़े चेहरे माने जाते थे। 2014 में पांचवी बार योगी सांसद बने। राजनीति के मैदान में आते ही योगी आदित्यनाथ ने सियासत की दूसरी डगर भी पकड़ ली, उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी का गठन किया और धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी। कट्टर हिंदुत्व की राह पर चलते हुए उन्होंने कई बार विवादित बयान दिए। योगी विवादों में बने रहे, लेकिन उनकी ताकत लगातार बढ़ती गई। 2007 में गोरखपुर में दंगे हुए तो योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाया गया, गिरफ्तारी हुई और इस पर कोहराम भी मचा। योगी के खिलाफ कई अपराधिक मुकदमे भी दर्ज हुए।

 

7 सितंबर 2008 को योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हमला हुआ था, यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से अधिक वाहनों को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहुलुहान कर दिया था, इस हमले में योगी बाल-बाल बचे थे। आदित्यनाथ,  गोरखपुर दंगों के दौरान तब गिरफ्तार किए गए जब मुस्लिम त्यौहार मोहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू युवा की जान चली गई थी। डीएम ने योगी को उस जगह जाने से मना कर दिया, लेकिन आदित्यनाथ उस जगह पर जाने के लिए अड़ गए और अगले दिन उन्होंने शहर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करने की घोषणा की, लेकिन जिलाधिकारी ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया। आदित्यनाथ ने भी इसकी चिंता नहीं की और हजारों समर्थकों के साथ अपनी गिरफ्तारी दी। उनकी गिरफ्तारी के अगले दिन ही जिलाधिकारी और पुलिस का तबादला हो गया।

 

योगी आदित्यनाथ सबसे पहले 1998 में गोरखपुर से चुनाव भाजपा प्रत्याशी के तौर पर लड़े और तब उन्होंने बहुत ही कम अंतर से जीत दर्ज की। लेकिन उसके बाद हर चुनाव में उनका जीत का अंतर बढ़ता गया और वे 1999, 2004, 2009 व 2014 में सांसद चुने गए।

 

अब योगी आदित्यनाथ की हैसियत कुछ अलग है जहां वो खड़े होते, सभा शुरू हो जाती, वो जो बोल देते हैं, उनके समर्थकों के लिए वो कानून हो जाता है यही नहीं, होली और दीपावली जैसे त्योहार कब मनाया जाए इसका ऐलान भी योगी ही करते हैं।  गोरखपुर और आसपास के इलाके में योगी आदित्यनाथ और उनकी हिंदू युवा वाहिनी की तूती बोलती है और बीजेपी में भी उनकी जबरदस्त धाक है। गोरखपुर में उनके समर्थक नारे लगाते है“ गोरखपुर में रहना है तो योगी योगी कहना है”।

About विभव शुक्ला

Young Journalist from Delhi. Core team membar of Khabar On Demand

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