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भारत में कुपोषण का दुष्चक्र मां का पोषण, नवजात शिशु का स्वास्थ्य तय करता है

खराब जीवनशैली से जुड़ी आदतों के चलते गैर संचारी रोग के निरंतर बढ़ते बोझ ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) को ईट राइट मूवमेंट शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

इस आंदोलन का लक्ष्य पोषण के चार प्रमुख मुद्दों- 1.फूड फोर्टिफिकेशन, 2.खाद्य सुरक्षा, 3.नमक, चीनी और तेल का सेवन घटाने और 4. पोषण के प्रथम 1000 दिवस को लेकर जागरूकता फैलाना है। छोटे शहरों और कस्बों में पैठ बनाने के लिए ईट राइट मूवमेंट के विस्तार के तौर पर स्वस्थ भारत यात्रा शुरू की गई।

स्वस्थ भारत यात्रा एक साइक्लोथॉन है जिसे करीब 750 साइकिल सवारों का समर्थन मिला है। ये साइकिल सवार 2,000 जगहों की यात्रा कर 27 जनवरी को नई दिल्ली पहुंचेंगे।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के सीईओ श्री पवन कुमार अग्रवाल ने कहा,“जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में बढ़ोतरी को देखते हुए एफएसएसएआई में हमने ईट राइट मूवमेंट शुरू किया जिसका लक्ष्य नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार लाकर उन्हें सशक्त करना है।

छठे नेशनल हेल्थ राइटर्स एंड एडिटर्स कनवेंशन में पैनलिस्टके तौर पर हिस्सा लेते हुए विश्व बैंक के वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ आशी कठुरिया ने कहा, “पोषण केवल खाद्य के बारे में नहीं है बल्कि इससे परे भी है। त्रुटिपूर्ण एवं अपर्याप्त खाने की आदतें अक्सर हमें अस्वस्थ स्थिति में ला देती हैं। जरूरत से अधिक खाने या नमक, चीनी और तेल की अधिकता वाले खाद्य पदार्थ खाने से अक्सर लोग मोटापे का शिकार होते हैं जोकि गैर संचारी रोग (ह्रदय घात, मस्तिष्क घात, मधुमेह) का मुख्य कारण है। अस्वस्थ खानपान का दूसरा पहलू ऐसी चीजें खाना है जिनमें पोषक तत्वों की कमी होती है और इससे कुपोषण संबंधी बीमारियां होती हैं। ईट राइट मूवमेंट सही पोषण की दिशा में एक समग्र दृष्टिकोण है। यह स्वास्थ्यवर्धक खानपान के लिए केवल वयस्क लोगों को ध्यान में नहीं रखता, बल्कि गर्भावस्था के दौरान या जीवन के शुरुआती वर्षो में भी पोषण पर जोर देता है।

भारत में मां बनने लायक एक तिहाई महिलाएं कुपोषण की शिकार हैं। कुपोषित महिलाएं कमजोर बच्चे को जन्म देती हैं। गर्भ में उस बच्चे को जब आहार की सबसे अधिक जरूरत होती है, उसे आहार की कमी का सामना करना पड़ता है।

जन्म के बाद जीवन के प्रथम घंटे में मां का दूध शिशु के जीने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है। हालांकि, भारत में महज 41.6 प्रतिशत नवजात शिशुओं को जन्म के प्रथम घंटे में मां का दूध पीने को मिल पाता है। यह कमजोर आंकड़ा ईट राइट मूवमेंट के पोषण के प्रथम 1000 दिवस (गर्भधारण के दिन से लेकर) के एजेंडे को शामिल करने को न्यायोचित ठहराता है।

यह महत्वपूर्ण है कि लोग प्रारंभिक पोषण का मूल्य समझें। एक स्वस्थ मां ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है और जीवन के प्रथम घंटे में स्तनपान बच्चे को आवश्यक पोषण और साथ ही एंटबॉडीज़ प्रदान करता है जिससे उसकी रोग प्रतिकारक क्षमता मजबूत होती है। यह लड़ाई यहीं खत्म नहीं होती और जीवन के प्रथम 6 महीने सिर्फ स्तनपान एक बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह संक्रमण उसे आहार में अन्य खाद्य पदार्थों को देने से हो सकता है। एक लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए एक मजबूत नींव जरूरी है।

इसी कनवेंशन में बॉलीवुड के वेलनेस गुरू और ऑस्ट्रिया में वीवामेयर के संस्थापक निदेशक डाक्टर हराल्ड स्टोसिएर ने कहा, “ईट राइट मूवमेंट एक ऐसा प्रयास है जिसकी सराहना की जानी आवश्यक है। ऑस्ट्रिया में हम पोषण तकनीकियों के साथ लोगों को यही चीज़ समझाने का प्रयास कर रहे हैं। यह महत्वपूर्ण है कि लोग अपने शरीर की संरचना को समझें। खानपान की खराब आदतें ज्यादातर बीमारियों का कारण हैं और हमें यह समझना होगा कि हमारे शरीर के अन्य अंगों की तरह आंतों को भी आराम देना जरूरी है।

बीच बीच में उपवास रखने से एक व्यक्ति के स्वास्थ्य में चमत्कारिक बदलाव आ सकता है बशर्ते यह सही ढंग से किया जाए। भाग-दौड़ भरी जिंदगी ने हमारे खानपान की आदतों को बुरी तरह से प्रभावित किया है और अब समय आ गया है कि हमें हमारी जड़ों की ओर लौट आना चाहिए और सुबह का नाश्ता भरपूर और रात का खाना हल्का रखना चाहिए।

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