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FILM REVIEW:शिक्षा के व्‍यवसाय को दर्शाती ‘हिंदी मीडियम’

कुछ संदेशों के साथ ‘हिंदी मीडियम’ उन प्रश्नों के जवाब देने की कोशिश करती है जो आज की एज्युकेशन सिस्टम से जुड़े हुए हैं। यह आज के स्कूलों की खामियों और कमियों पर प्रकाश डालती है।स्‍कूलों में शिक्षा से ज्‍यादा पैसे का बोलबाला है। देश के कई बड़े स्‍कूल एक प्रॉडक्‍ट की तरह अपनी ब्रांडिंग कर रहे हैं। विज्ञापन के माध्‍यम से लोगों को रिझाने में तो ये स्‍कूल सफल हैं, लेकिन शैक्षिक गुणवत्‍ता के मामले में कहीं न कहीं जरूर पीछे हैं। ऐसे ही स्‍कूल जो शिक्षा को व्‍यवसाय बना चुके हैं, उनकी असली तस्‍वीर को फिल्‍म ‘हिंदी मीडियम में दर्शाया गया है।

फिल्म की कहानी है दिल्ली के चांदनी चौक की मेन बाजार में रेडीमेड गार्मेंट्स का शोरूम चलाने वाले पुरानी दिल्ली की गलियों में रहने वाले राज बत्रा (इरफान खान) की है। राज सरकारी स्कूल के हिंदी मीडियम का छात्र रह चुका है, औरे राज टूटी-फूटी अंग्रेजी भी बोल लेता है। वहीं, अगर उसकी सुंदर वाइफ मीता उर्फ मीठू (सबा कमर) की बात करें तो अंग्रेजी बहुत बोलती है। मीता का बस सपना एक ही है कि उसकी इकलौती बेटी पिया बत्रा शहर के टॉप अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई करे। राज अपनी वाइफ से बहुत प्यार करता है।

और अपनी वाइफ के इस सपने को किसी भी हाल में पुरा करना चाहता है। राज और मीता अपनी ओर से बहुत कोशिश करते हैं कि उनकी बेटी का ऐडमिशन अंग्रेजी मीडियम स्कूल में हो जाए। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए दोनों चांदनी चौक को छोड़कर वसंत विहार मे रहने लगते है।और कई स्कूलों में पूरी तैयारी के साथ इंटरव्यू देने जाते है। लेकिन कोई भी कोशिशें काम नहीं आती।और तब उन्हें पता चलता है इन टॉप स्कूलों में गरीब कोटे में उनकी बेटी का ऐडमिशन हो सकता है। बस फिर क्या दोनों बेटी को साथ लेकर एक स्लम बस्ती में रहने भीचल जाते हैं। एक्टिंग की बात करें तो तारीफ चांदनी चौक स्टाइल में इरफान खान ने दिल जीत लिया। इरफान एक ऐसे बिजनसमैन के रोल को पर्दे पर जीवंत कर दिखाया है जो सरकारी स्कूल से पढ़ा हुआ है। यकीनन इस किरदार में इरफान ने उम्दा ऐक्टिंग की है और इरफान की वाइफ के रोल में सबा कमर की एक्टिंग भी तारीफे-काबिल है। इन दो कलाकारों के बीच दीपक डोबरियाल ने अपनी बेहतरीन ऐक्टिंग के दम पर कम फुटेज मिलने के बावजूद कमाल का अभिनय किया है। स्कूल को अपने कायदे-कानूनों पर चलाने वाली प्रिसिंपल के रोल में अमृता सिंह बिल्कुल फिट बैठी है।

इस फिल्म की रिलीज से कई हफ्ते पहले ही फिल्म के दो गाने ‘सूट-सूट जिंदड़ी’ और ‘इश्क तेरा तड़पावे’ म्यूजिक लवर्स की जुबान पर अभी तक हैं। वहीं, डायरेक्टर साकेत की तारीफ भी करनी होगी कि उन्होंने इन गानों को ऐसी सिचुएशन पर फिट किया है जहां यह कहानी में रुकावट नहीं बनते।

और एक बात और कान खोलकर सुन लिजीए इस फिल्‍म की समीक्षा पढ़ने के बाद इसकी तुलना आमिर खान की ‘तारे जमीन पर’ और ‘3 इडियट्स’ से मत करिएगा। क्‍योंकि उन दोनों का कॉन्‍सेप्‍ट पूरी तरह इससे अलग था।

मो. मुज्ज़मिल

रेटिंग:4 स्टार

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