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मौसम विभाग का अंदेशा, इस वर्ष पड़ेगी भीषण गर्मी

नई दिल्ली। फरवरी के आखिरी दिन तापमान एक डिग्री और बढ़ गया। मंगलवार को दिन का तापमान 35.5 डिग्री तक पहुंच गया। पिछले 115 साल में 2016 देश का सबसे गर्म साल रहा और 2017 में भी लोगों को सामान्य से ज्यादा गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।

भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) ने इस साल मानसून पूर्व के महीनों मार्च से मई तक के संभावित मौसम का हाल जारी करते हुए कहा है कि इस दौरान देश के लगभग सभी हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा। वहीं उत्तर पश्चिमी भारत में तापमान के सामान्य से कुछ ज्यादा ही अधिक रहने की संभावना है। इसका आगाज जनवरी 2017 से हो चुका है जो 1901 से अभी तक का आठवां सबसे गर्म पहला महीना रहा।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, इस बार लू की स्थिति भी प्रचंड रह सकती है। दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा व तेलंगाना राज्यों और मराठवाड़ा, विदर्भ, मध्य महाराष्ट्र और तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में मानसून पूर्व के मौसम में लू की स्थिति सामान्य से तीव्र रहेगी। मौसम विभाग की ओर से 2017 के मार्च से मई तक के लिए जारी संभावित मौसम के हाल के मुताबिक, ‘देश के सभी भागों में इस दौर का औसत तापमान सामान्य से 1 डिग्री अधिक रह सकता है। वहीं उत्तर पश्चिमी भारत में इसके सामान्य से 1 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक रहने की संभावना है।

मौसम विभाग के मुताबिक, साल 2016, साल 1901 के बाद अभी तक का सबसे अधिक गर्म साल रहा जिस दौरान वार्षिक औसत तापमान वर्ष 1961-1990 के बीच के औसत से 0.91 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। साथ ही 2016 में मार्च से मई के बीच का समय 1901 से अभी तक का दूसरा सबसे गर्म दौर रहा जब औसत तापमान सामान्य से 1.36 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।आइएमडी के मुताबिक, जनवरी 2017 का औसत तापमान सामान्य से 0.67 डिग्री सेल्सियस रहा। 2017 के मानसून पूर्व महीनों के लिए मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, ‘देश के दक्षिण से लेकर उत्तरी भाग तक तापमान की असामान्यता में बढ़ोतरी का पैटर्न दिख रहा है।

इन महीनों का औसत अधिकतम तापमान उत्तर, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वी मध्य भारत से सटे हिस्सों के लिए सामान्य से 1 डिग्री या उससे अधिक होगा जबकि शेष भागों के लिए यह असामान्यता 5 डिग्री तक जा सकती है। वहीं न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के महेश पलावत के मुताबिक, इस साल ठंड के मौसम में देर से शुरू हुई बर्फबारी और बारिश कम होने के कारण जनवरी और फरवरी का महीना अपेक्षाकृत गर्म रहा। पलावत ने कहा, ‘बर्फबारी देर से हुई और एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ आने के कारण ठंडी उत्तरी हवाएं कम चलीं, जिससे तापमान ज्यादा नीचे नहीं आ पाया, वहीं जाड़े की बारिश में कमी का परिणाम रहा कि आर्द्रता कम रही और कोहरा भी कम देखने को मिला जिससे कोल्ड डे की अवस्था कम बन पाई।

पलावत के मुताबिक आगे भी मार्च से अप्रैल के बीच में मानसून पूर्व बारिश और ओले की संभावना कम है, जिससे बढ़ते तापमान पर लगाम नहीं लग पाएगी। हालांकि, उन्होंने इस गर्म मौसम के पीछे स्थानीय कारणों को ही जिम्मेदार बताया और कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया में चक्रवात का कम आना, कमजोर ला-नीना और अल-नीना जैसे कई कारण रहे, लेकिन ग्लोबल वॉर्मिंग से भी इनकार नहीं किया। पिछले साल की तरह आइएमडी इस साल भी हर पांच दिन के अंतराल पर लू और अत्यधिक गर्म दिनों का पूर्वानुमान जारी करेगा।

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