Monday , December 17 2018
Home / देश / देश भर में 7063 किरायेदारों के एक नमूने से 5 नवंबर और 5 दिसंबर के बीच अध्ययन आयोजित किया गया

देश भर में 7063 किरायेदारों के एक नमूने से 5 नवंबर और 5 दिसंबर के बीच अध्ययन आयोजित किया गया

 भारत में घर की तलाश में संपत्ति का लेनदेन करने वालों के बीच डिजिटल संदेशवाहक एक क्रांति उत्पन्न कर रहे हैं, दुनिया के सबसे बड़े ‘पीयर-टू-पीयर’ रीयल एस्टेट पोर्टल ने हाल ही में वर्ष 2017 के लिए आवासीय किराये की रुझान रिपोर्ट प्रकाशित की है. यह एक अनूठा और विशिष्ट वार्षिक अध्ययन है जो आवासीय किराये के डोमेन के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करता है. यह सर्वेक्षण 5 नवंबर से 5 दिसंबर तक एक माह की अवधि में किया गया था। नो ब्रॉकर ने पूरे देश में 7063 किरायेदारों के एक बड़े नमूने पर इस सर्वे को किया, जिसमें संपत्ति को किराने पर देने की बात हो उस समय सबसे महत्वपूर्ण रुझानों का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण घरेलू निर्णय निर्माताओं को शामिल किया गया था।

नोब्रोकर की रिपोर्ट में पता चला है कि कुल किराएदारों में 52% 30 वर्ष से कम उम्र के थे और सिंगल थे। हाल ही में एक प्रमुख रियल एस्टेट की प्रवृत्ति उभर कर आई है, 83% जबाव देने वालों ने किराने के लिए संपत्ति की खोज करने के लिए ऑनलाइन को प्राथमिकता दी तो वहीं वहीं 31%  मित्रों और परिवार पर निर्भर थे। ऑनलाइन खोज करने वाले पसंदीदा लोगों में, डेस्कटॉप उपयोगकर्ता44%, 38% मोबाइल ऐप यूजर्स थे, और मोबाइल खोज उपयोगकर्ता कुल जनसांख्यिकीय के 29% थे। दिलचस्प है, 59% जबाव देने वालों ने अपने किराए का भुगतान ऑनलाइन करना पसंद किया!

नोब्रोकर की आवासीय किराया रुझान रिपोर्ट 2017 प्रासंगिक सांख्यकीय आंकड़ों के रूप में इसलिए भी विश्वसनीय है क्योंकि इसमें कई गुणवत्ता नियंत्रण पद्धतियों को प्रयोग किया गया है। उदाहरण के लिए, मालिकाना डिजिटल फिंगरप्रिंटिंग तकनीकों को किसी भी पेशेवर जबाव देने वालों, रोबोटों या एक से अधिक डिवाइस प्रविष्टियों को पहचानने और समाप्त करने के लिए प्रयोग किया गया था। स्पीड चेक तेजी से आने वाली प्रविष्टियों को अयोग्य घोषित किया। इसके बाद प्राप्त परिणामों का विश्लेषण नो ब्रॉकर डॉट कॉम में सांख्यिकीविदों, शोधकर्ताओं और मार्केटर की एक टीम ने किया.

रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए नोब्रोकर डॉट कॉम के प्रवक्ता ने कहा, “पिछले 18 महीने भारतीय रियल एस्टेट उद्योग के लिए बेहद अशांत रहे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में कई नीतिगत बदलावों के प्रभाव आए हैं जैसे नोटबंदी, आरईआरए, और जीएसटी। हालांकि, इस वर्ष, उम्मीद है कि किराए पर ध्यान दिया जाएगा। 2020 तक भारत के सबसे युवा देश होने का अनुमान है और रियल एस्टेट के लिए प्रमुख नीतिगत परिवर्तन के साथ, अपनी पेशेवर यात्रा शुरू करने लोग अब रियल एस्टेट की अपनी जरूरतों के बारे में उज्जवल भविष्य की तलाश में हैं”

संपत्ति संबंधी लेनदेन के लिए डिजिटल माध्यम को अपनाने के लिए बढ़ती प्राथमिकता के बावजूद, उपयोगकर्ता अभी भी डिजिटल डोमेन के साथ विश्वास की समस्या को  प्रदर्शित करते हैं। 52% जबाव देने वालों के अनुसार जानकारी की कमी या नकली फोटो लगाना इस तरह के अविश्वास का मुख्य कारण थे। औसतन, संभावित किरायेदारों ने कम से कम 6 संपत्ति के मालिकों से चुनाव करने से पहले संपर्क किया था, जबकि सर्वेक्षण में शामिल 80% ने कहा कि उन्होंने सम्पत्ति को जाकर देखा। इसके अलावा, 48% उत्तरदाताओं ने अपना खुद का किराया समझौता किया।

63% जबाव देने वालों ने ऑनलाइन प्लेटफार्मों के साथ बहुत संतुष्टि और खुशी व्यक्त की, और 54% ने ऑनलाइन खोजों के संचालन के पहले 30 दिनों के भीतर ही अपनी पसंद की संपत्ति को पाया। 72% उपयोगकर्ताओं ने अन्य प्रकार की संपत्तियों पर अपार्टमेंट को पसंद किया, 1 बीएचके और 2 बीएचके सबसे पसंदीदा प्रकार के घर रहे। जबाव देने वालों ने किसी भी जगह को फाइनल करते समय काम की जगह की निकटता को प्राथमिकता दी, विभिन्न शहरों में रहने वाले लोगों में 50% से 80% लोग रास्ते में 30 मिनट सेअधिक खर्च करते हैं।

उन्होंने कहा “ऑनलाइन प्लेटफार्मों की लोकप्रियता एंड यूजर्स के लिए बहुत ही लाभकारी है क्योंकि इससे दलाल गायब हो रहे हैं। लिस्टिंग और सुरक्षा के सत्यापन कर ये पोर्टल’ग्राहक-से-ग्राहक’ दृष्टिकोण अपनाने के जरिए, डोक्युमेंटेशन और  ब्रोकरेज लागत को कम कर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए न केवल संभावित किराएदारी में उछाल ला सकते हैं, बल्कि वे भारत में संपत्ति खरीदने वालों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं”।

भारतीय खरीदारों की सूची में सस्ता आवास भी सबसे ऊपर उभर रहा है, जिसमें एक तिहाई भारतीय किराएदार घर खरीदना चाहते हैं। 47% जबाव देने वालों ने कहा कि चालीस लाख रूपए से कम का घर आराम से खरीद सकते हैं, तो भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक फीनिक्स के रूप में किफायती आवास बढ़ाना चाहिए।

जब लागतों की बात होती है तो बंगलौर सबसे महंगा शहर है और इसमें किराए की दरों में बहुत ही मामूली अंतर दिखा है तो यह साल किराए के लिए बहुत ही सूखा साल रहा है। शहर में औसत जमा राशि 132,188.83 रुपये के आसपास थी, जो 9-10 महीने के मासिक किराये की थी। बेंगलुरु के लिए 2017 में एकत्रित सुरक्षा जमा की कुल राशि 7732 करोड़ रुपये थी, इसके बाद मुंबई ने 7080 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।

About Web Team

Check Also

पूल में शूट हुई थी मेरी अंडरवाटर तस्वीर, ज़हरीली झील में नहीं: अभिनेत्री

दक्षिण भारतीय ऐक्ट्रेस रश्मिका मंदाना ने उन तस्वीरों के बारे में अपनी प्रतिक्रिया दी है, …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *