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इन कठिन दिनों में लड़कियां बन जाती हैं कैदी !

मुजम्मिल

लड़की अगर पिरीयड्स में आती हैं तो उन्हें अलग-अलग नाम से जाना जाता हैं पिरीयड्स में हैं मासिक धर्म कुछ लोग कपड़ा भी कहते हैं और कुछ लोग गंदा भी कहते हैं.. लड़की को गंदा हुआ हैं ऐसा कहते है और ऐसे समय पर लड़की नही कैदी बन जाती हैं अलग थाली, अलग ग्लास ,अलग जगह पर सोना मंदिर में नही जाना आचार को नही छुना यार ये बताओ कहा पर लिखा हुआ हैं. पिरीयड्स के दौरान लड़कियों को ये सब चीजें करनी है.मम्मी ने जो बोला बस उसको फौलो करना हैं बिना कुछ पुछे अगर लड़की ने कुछ पुछा तो मम्मी उसे चुप करा देती हैं।क्योंकि मम्मी के मम्मी ने भी मम्मी को चुप करा दिया था तो मम्मी भी यही करेगी न और ये साईकल बस चलती रहती हैं.

लड़कियों से निवेदन हैं आपका भाई छोटा हो या बड़ा जब भी थोड़ा मैच्योर हो उसके साथ बैठकर बात करो बाँयफ्रेंड या पति से पिरीयड्स के बारे में बात करो।जब भी पिरीयड्स में हो उनको ऐसा कभी मत बोलो मेरा पेट दर्द कर रहा उनको सीधा बोलो की मैं पिरीयड्स में हूं, उनको समझाओं की इन दिनों के दौरान आपको क्यू खुन आता हैं और क्यू आपको दर्द होता है.

पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है. कुछ महिलाओं में ये साइकल पांच से सात दिन की होती है तो कुछ में चार से पांच दिन की. इस दौरान महिला को चिड़‍चिड़ेपन, शरीर में दर्द और पाचन से जुड़ी समस्या हो जाती है. कई बार कब्ज की समस्या भी हो जाती है पर ये सभी परेशानियां पीरियड्स के खत्म होने के साथ ही दूर हो जाती हैं.

परिवार में हमेशा एक ऐसा समय आता है जब एक माँ को अपने बेटी के साथ बैठ कर पीरियड्स (माहवारी) के बारे में बात करनी चाहिए . उसे साधारण जीवन से पीरियड्स वाले जीवन की और जाने के लिए तैयार करना चाहिए .

किसी भी लड़की के जीवन में माहवारी की शुरुवात एक बहुत बड़ी बात होती है और जरुरी है की उसे इसकी जानकारी पहले से हो , ताकि वो पीरियड्स के लिए तैयार रहे .

अपने पहले पीरियड के दौरान हर लड़की का अलग अलग रिएक्शन होता है . ये रिएक्शन आराम के रूप में या उत्साह के रूप में यहाँ तक की डर,डिप्रेशन या आत्मग्लानि के रूप में भी हो सकता है . अब ये रिएक्शन चाहे जो भी हों अगर उसे पहले से पीरियड्स की जानकारी हो तो पीरियड्स के दौरान होने वाले भावनात्मक बदलावों पर काबू किया जा सकता है और इस स्थिति को बेहतर समझा जा सकता है .

अब जरुरी नहीं है की बेटी को पीरियड के बारे में बताने के लिए उससे लम्बी बातचीत ही की जाए . इसकी जगह समय समय पर पीरियड्स की जानकारी देते रहना सही रहता है .

हमेशा याद रखें की पहला माहवारी एक लड़की के जीवन में भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा अहम् होता है इसलिए ध्यान रखें की केवल पीरियड्स के फैक्ट ही ना बताएं . इस बात को समझें की आप उसे एक लड़की से महिला बनने की दिशा में तैयार कर रही हैं .

पीरियड्स के दौरान मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, चर्च या किसी भी धार्मिक स्थान पर जाने की मनाही होती है. हालांकि, यह मनाही कब और कैसे शुरू हुई, इसके बारे में पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. आज भी 99 फीसदी लड़कियां और महिलाएं पीरिएड्स के दौरान पूजा-पाठ नहीं करतीं क्योंकि इस दौरान वे खुद को ‘अपवित्र’ मानती हैं. यह धारणा पढ़े-लिखे और मॉर्डन परिवारों की भी है. हालांकि यह पूरी तरह गलत है.

28 दिन में पीरियड आना चाहिए
अधिकतर महिलाओं को एेसा लगता है कि हर 28 दिन पर पूरा होता है, जबकि एेसा नहीं है. हर महिला के लिए यह अलग-अलग हो सकता है. ये महिला के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर निर्भर करता है. माहवारी चक्र 20 दिन से लेकर 35 दिन के भीतर हो सकता है.

सेक्स नहीं करना चाहिए
अामतौर पर एेसी धारणा है कि माहवारी के समय सेक्स नहीं करना चाहिए. इससे दर्द की संभावना बढ़ जाती है, लेकिन जानकारों की मानें तो पीरियड के दौरान सेक्स करने से महिलाओं को दर्द और एेंठन से राहत मिलती है. हां, अगर आप दोनों सहज नहीं हैं तो सेक्स टाल सकते हैं. कई शोधों से इस बात की पुष्टि होती है कि पीरियड के दौरान सेक्स करने से महिलाओं को कमर और पेट दर्द से राहत महसूस होती है.

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