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आयकर विभाग ने राबड़ी देवी और बेटी हेमा की तीन संपत्तियां अटैच की

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी बेटी हेमा यादव की तीन संपत्तियों को 3 महीनों के लिए अस्थायी तौर पर अटैच कर लिया है।

ये संपत्तियां दानापुर और फुलवारीशरीफ में हैं। विभाग ने संपत्ति अटैच करने की जानकारी राबड़ी देवी और उनकी बेटी हेमा को भेज दी है। साथ ही निबंधन कार्यालय पटना और दानापुर को भी सूचना दी गई है कि इनकी किसी भी प्रकार की बिक्री न हो।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट राबड़ी देवी और हेमा यादव को समन भेजकर फिर पूछताछ के लिए बुला सकता है। दोनों से पूछताछ के पश्चात संपत्तियों को 3 महीनों के अंदर स्थायी तौर पर अटैच किया जा सकता है।

संपत्तियों के स्थायी अटैच होने के बाद मामले का ट्रायल नई दिल्ली बेनामी संपत्ति न्यायालय में चलेगा। आयकर सूत्रों के मुताबिक ट्रायल में राबड़ी देवी, हेमा यादव, बेनामीदार ललन चौधरी और हृदयानंद चौधरी को आरोपी बनाया जाएगा।

यदि ट्रायल के बाद मामला सही सिद्ध हुआ तो बेनामी संपत्ति कानून के अनुसार सभी लोगो को सात वर्ष की सजा भी हो सकती है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक  फुलवारीशरीफ मौजा सगुना में राबड़ी देवी के नाम पर 2.5 डिसमिल जमीन है। यह जमीन विधान परिषद के चपरासी और लालू यादव के घरेलू नौकर ललन चौधरी ने राबड़ी देवी को जनवरी 2014 में दान में दे दी थी। ललन चौधरी ने फुलवारीशरीफ के एक किसान विष्णुदेव से 30 लाख रुपए में यह जमीन खरीदी ली थी।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ललन चौधरी को पूछताछ के लिए अपने पास बुलाया था। ललन ने अपने बयान में कहा है कि वह लालू प्रसाद के गोशाला में कार्य करता था। वह पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को अपनी बहन मानता है। आयकर सूत्रों के मुताबिक ललन चौधरी की इतनी आय नहीं है कि वह इतनी कीमती जमीन खरीद सके। आयकर अधिकारियों को आशंका है कि ललन चौधरी ने जो जमीन ली है, उसके पैसे का भुगतान किसी और व्यक्ति ने किया है।

दानापुर धन्नौत में ललन चौधरी ने ही 7.5 डिसमिल जमीन लालू प्रसाद की बेटी हेमा यादव को फरवरी 2014 को दान में दी है। यह जमीन भी ललन ने एक किसान से 62 लाख में खरीदी थी। हृदयानंद चौधरी ने 7.5 डिसमिल जमीन लालू प्रसाद की पुत्री हेमा यादव को फरवरी 2014 में दान में दी थी। हृदयानंद एसटीएफ के जलवाहक विंग में कार्यरत है और लालू प्रसाद के गोशाला में काम करता था। हृदयानंद ने यह जमीन एक किसान से 62 लाख रुपए में खरीदी थी। हृदयानंद भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं करता है और उसकी आमदनी इतनी नहीं है कि 62 लाख मूल्य की जमीन खरीद सके।

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