Thursday , February 22 2018
Home / खेल / AIBA: बॉक्सिंग यूथ चैंपियनशिप में इंडिया ने जीते 5 गोल्ड, क्या मिलेगी देश की अगली मैरीकॉम?
AIBA, Boxing, Youth World Championships, gold medals In Boxing, Assam, Bhiwani Boxing Acedemy, Vijender Singh
PC: Kodmedia

AIBA: बॉक्सिंग यूथ चैंपियनशिप में इंडिया ने जीते 5 गोल्ड, क्या मिलेगी देश की अगली मैरीकॉम?

भारतीय युवा मुक्केबाजों ने महिलाओं की यूथ चैंपिंयनशिप में अपने मुक्के का दम दिखाया है। अबतक भारत AIBA के इस युवा महिला चैंपियनशिप में सिर्फ 2 स्वर्ण पदक ही जीत सका था, लेकिन इस बात एक साथ भारतीय युवा मुक्केबाजों ने 5 स्वर्ण पदक देश की झोली में डाल लिए। ये चैंपियनशिप असम के गुवाहाटी स्थित नबीन चंद्र बद्रोलोई इंडोर स्टेडियम में आयोजित हुई।

AIBA के इस युवा महिला चैंपियनशिप में नीतू (48 किलो भार वर्ग), ज्योति गुलिया (51किलो भारवर्ग), साक्षी चौधरी (54 किलो भारवर्ग), शशि चोपड़ा (57 किलो भारवर्ग) और अंकुशिता बोरो (64 किलो भारवर्ग) ने स्वर्ण पदक जीते। भारत आखिरी बार इन खेलों में साल 2011 में स्वर्ण पदक जीत पाया था, जो उसे सर्जूबाला देवी ने दिलाया था। भारत के लिए सोना जीतने वाली ये युवा मुक्केबाज देश के दूरस्थ इलाकों से आती हैं। जानें,

ज्योति ने रूस की एकातेरिना मोलचनोवा को हराकर स्वर्ण पदक जीता। ज्योति के पिता ममन सिंह एक किसाब हैं। वो कहते हैं कि ज्योति ने जब हमसे बॉक्सिंग के बारे में बताया तो हम बेहद गुस्सा हुए। वो अच्छी डांसर है। इसीलिए हम चाहते थे कि वो डांस ही करे। ममन सिंह ने कहा कि मेरी बेटी ने मुझे बॉक्सिंग में उसके भविष्य के बारे में बताया। तब जाकर मेरी समझ में आया।

इस चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली साक्षी और नीतू रेल पकड़कर भिवानी बॉक्सिंग एकेडमी पहुंचती हैं। ये बॉक्सिंग एकेडमी साल 2008 में तब चर्चा में आया, जब विजेंदर सिंह ने ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। साक्षी का कहना है कि मेरी दो बहनों की शादी विजेंदर के गांव कलुवास में हुई है। मेरे परिवार में लोग विजू भाई से जुड़े हुए हैं। ऐसे में जब हमने भिवानी बॉक्सिंग एकेडमी में शुरुआत की, तो हमने सोचना शुरू कर दिया कि हम भी उनकी तरह विश्वस्तर पर पदक जीतेंगे। उनके पिता हरियाणा विधानसभा में काम करते हैं।

जानें, इन युवा स्वर्ण पदक विजेताओं का कैसा रहा प्रदर्शन:

नीतू (48 किली भारवर्ग): नीतू की उम्र 17 साल है। नीतू ने फाइनल में कजाखस्तान की झाजिरा उराखायेवा को 5-0 से मात दी। नीतू ने भिवानी के बॉक्सिंग क्लब में बॉक्सिंग सीखी है। वो पिछले 2 सालों से राष्ट्रीय कैंप का हिस्सा भी नहीं हैं। नीतू सुबह के दौरान गांव के मैदान का चक्कर लगाती हैं, तो शाम के समय बॉक्सिंग की ट्रेनिंग करती हैं।

ज्योति गुलिया(51 किलो भारवर्ग): गुलिया भी महज 17 सालों की हैं। जीवन के शुरुआती दिनों में ही काफी कठिनाइयां आईं, क्योंकि पिता ने खेलों में हिस्सा लेने से मना कर दिया था। ज्योति ने फाइनल में रूस की एकातेरिना मोलचनोवा को 5-0 से हराया। ज्योति ने रोहतक के नजदीक स्थिति रुड़की गांव के सरपंच(कोचिंग भी देते हैं) सुधीर हुडा से बॉक्सिंह के दांवपेंच सीखे हैं।

साक्षी चौधरी(54 किलो भारवर्ग): साक्षी भी भिवानी के बॉक्सिंग क्लब से आती हैं। साक्षी ने फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड की इवी-जेन स्मिथ को कांटे के मुकाबले में 3-2 से मात ही। साक्षी को 2015 के जूनियर विश्वकप के लिए भी टीम में रखा गया था।

शशि चोपड़ा(57 किलो भारवर्ग): मैरी कॉम के लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद शशि बॉक्सिंग में उतरी। चोपड़ा ने फाइनल में वियतनाम की होंग डो को 4-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता।

अंकुशिता बोरो(64 किलो भारवर्ग): असम के मेगाई गैर्रन गांव की अंकुशिता बोरो ने साल 2012 से बॉक्सिंग में कदम रखा। उन्होंने साल 2013 में जिला स्तर पर सबसे बेहतरीन मुक्केबाज का खिताब जीता। साल 2015 में बोरो ने राज्य प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। यही नहीं, इसी साल आयोजित राष्ट्रीय युवा खेलों में भी बोरो कांस्य पदक जीत चुकी हैं। बोरो ने फाइनल में एकातेरिना डायनिक को 4-1 से हराया।

वैसे, भारत की इस सफलता को विदेशी कोच से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इटली के राफैले बर्गामास्को को हाल ही में कोचिंग के लिए लाया गया है। उन्होंने ट्रेनिंग के तरीकों में बदलाव किया है। इस सफलता के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि भारतीय लड़कियों के मुक्के बेहद मजबूत हैं। वो भले ही गांव से आती हैं, पर उनकी तकनीक बेहद अच्छी है। एक ही चीज गलत है कि वो मानसिक तौर पर इन सबके लिए तैयार नहीं हैं। मैं हमेशा उन्हें साथ में ट्रेनिंग के लिए कहता हूं। कोचिंग स्टाफ से जुड़ते ही मैंने उनके लिए म्यूजिक की व्यवस्था की। पर जब मुख्य प्रशिक्षक भास्कर ने इसके बारे में सुना, तो वो हैरान रह गए। बाद में मैंने उन्हें समझाया कि लड़कियों को मानसिक तौर पर बॉक्सिंग के साथ जोड़ने के लिए ऐसा करने देना चाहिए। और अब नतीजा सामने हैं।

खास बात ये है कि पिछली बार भारत इन खेलों में सिर्फ एक कांस्य पदक ही जीत सका था। पर इस बार पदकों की संख्या को लेकर हुए भारतीय मुक्केबाजी के उज्जवल भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके साथ ही देश में इस बात पर भी बहस हो सकती है कि इन लड़कियों में से अगली मैरी कॉम कौन बन सकती है। क्योंकि मैरीकॉम ही महिला मुक्केबाजी में हमेशा से सबसे बड़ा चेहरा रही है। यहां तक कि उन्होंने लंबे ब्रेक से लौटने के बाद 3 बच्चों की मां होते हुए भी पिछले माह ही रिकॉर्ड पांचवीं बार एशियाई चैंपिंयनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया।

About Team Web

Check Also

‪‪Punjab National Bank‬, ‪Nirav Modi‬, ‪Narendra Modi‬‬,Punjab National Bank‬, ‪Securities and Exchange Board of India‬, ‪Reserve Bank of India,pnb share price,Punjab National Bank‬, ‪Mukesh Ambani‬, ‪Dhirubhai Ambani‬‬

PNB को चूना लगाने वाले नीरव मोदी और उसके परिवार के भागने की ये है तारीखें!