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राइट टू प्राइवेसी मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा निर्णय

सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ आज ऐतिहासिक फैसला देगी जिसका प्रभाव देश के 134 करोड़ लोगों के जीवन पर पड़ेगा। निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है या नहीं, इसपर सुप्रीम कोर्ट की पीठ फैसला सुनाने वाली है। कोर्ट 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगी। इसमें बताया जाएगा कि ‘निजता के अधिकार’ को मौलिक अधिकारों के स्तर पर लाया जा सकता है या नहीं। शनिवार को रिटायर हो रहे चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर की अध्यक्षता वाली नौ जजों की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद 3 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

नौ जजों की पीठ के गठन के पहले चीफ जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने कहा था कि बड़ी बेंच पूर्व के दो फैसलों-खड़क सिंह और एमपी शर्मा मामले का परीक्षण करेगी। छह और आठ जजों की पीठ के इन फैसलों में कहा गया था कि ‘निजता का अधिकार’ मौलिक अधिकार नहीं है। नौ जजों की पीठ का फैसला आधार कार्ड की अनिवार्यता के मामले के निपटारे में सुप्रीम कोर्ट बेंच की मदद करेगा। आधार की अनिवार्यता के खिलाफ याचिकाएं थीं कि आधार से व्यक्ति की निजता का उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि इसमें दिया गया बायोमीट्रिक डाटा लीक हो सकता है।

केंद्र सरकार ने आधार योजना को जबरदस्त समर्थन दिया और कहा कि देश के करोड़ों गरीबों को भोजन, आश्रय और कल्याण के उपायों के जरिए जीवन का अधिकार चंद इलीट लोगों की निजता की चिंताओं से ज्यादा महत्वपूर्ण है। सरकार ने कहा कि देश में 100 करोड़ लोगों ने आधार कार्ड बनवा लिया है जिसमें छह हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आया है अब इसमें पीछे नहीं जाया जा सकता।

क्या कहना है सरकार का…

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राइट टू प्राइवेसी पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। यह बहुत कन्फ्यूजिंग है। आधार कार्ड के मामले की वजह से ही सही, इस पर क़ानूनी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। अटॉर्नी जनरल का तर्क था कि आठ जजों और फिर छह सदस्यों वाली खंडपीठ ने कहा था कि राइट टू प्राइवेसी (निजता का अधिकार) मौलिक अधिकार नहीं है, इसलिए इस मामले को नौ सदस्यों वाली खंडपीठ के पास भेजा जाना चाहिए ताकि इस पर क़ानून स्पष्ट हो।

सुप्रीम कोर्ट का क्या है कहना…

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को वाजिब प्रतिबंध लगाने से नहीं रोक नहीं सकते। क्या कोर्ट निजता की व्याख्या कर सकता है? आप यही केटेलॉग नहीं बना सकते कि किन तत्वों से मिलकर प्राइवेसी बनती है। कोर्ट ने कह चुका है कि राइट टू प्राइवेसी का साइज इतना बड़ा है कि ये हर मुद्दे में शामिल है। अगर हम निजता को सूचीबद्ध करने का प्रयास करेंगे तो इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। निजता सही में स्वतंत्रता का एक सब सेक्शन है।

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