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यूपी: हिजबुल का संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार, बड़े हमले की साजिश का खुलासा

यूपी पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने गुरुवार को कानपुर नगर पुलिस के साथ मिलकर हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकी कमरूज्जमां को गिरफ्तार कर लिया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी से मिली खुफिया सूचना के आधार पर उसे कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र स्थित शिव नगर से गिरफ्तार किया गया। कमरूज्जमां गणेशोत्सव के दौरान कानपुर में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना पर काम कर रहा था।

 

डीजीपी ओपी सिंह ने पत्रकारों को बताया कि कमरूज्जमां अपना नाम बदलकर सोशल मीडिया पर सक्रिय था। अप्रैल 2018 में उसने एके 47 लिए हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डाली थी, जिससे वह सुर्खियों में आया। यह फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी। उसने हिजबुल मुजाहिद्दीन का अपना नाम डॉ. हुरैरा पोस्ट किया। उसका एक नाम कमरुद्दीन भी है। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां उसे तलाश रही थीं। एनआईए के सहयोग से इंटेलीजेंस विकसित करते हुए उसे आज गिरफ्तार कर लिया गया।

फोन में मिला कानपुर के मंदिर का चित्र

प्रारंभिक पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर डीजीपी ने बताया कि उसकी गणेश चतुर्थी से संबंधित पर्व पर बड़ा हमला करने की योजना थी। इस स्वीकारोक्ति के साथ उसने यह भी स्वीकार किया कि वह हिजबुल मुजाहिद्दीन का सक्रिय सदस्य है और हिजबुल मुजाहिद्दीन ने ही उसे रेकी और तैयारी के लिए कानपुर भेजा था। डीजीपी ने कहा कि आतंकी कमरुज्जमां के मोबाइल फोन से एक वीडिया मिला है जिसमें कानपुर के एक मंदिर की रेकी के चित्र हैं।

कश्मीर में की थी ट्रेनिंग

डीजीपी ने बताया कि कमरुज्जमां अप्रैल 2017 में कश्मीर में ओसामा नाम के व्यक्ति के संपर्क में आया और उसी के माध्यम से हिजबुल मुजाहिद्दीन ज्वाइन किया। उसने हिजबुल की ट्रेनिंग किश्तवाड़ के ऊपर पहाड़ के जंगलों में की थी। उन्होंने बताया कि कमरुज्जमां मूल रूप से असोम का रहने वाला है। उसके पिता सैदुल हुसैन का निधन हो चुका है। वह असोम के होजाई क्षेत्र के सराक पिली गांव का रहने वाला है। वह बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित हुआ था लेकिन फेल हो गया था। उससे कम्प्यूटर कोर्स व टाइपिंग का डिप्लोमा किया हुआ है।

चार साल विदेश में भी रहा

डीजीपी ने बताया कि कमरुज्जमां वर्ष 2008 से 2012 तक फिलीपींस के निकट के एक छोटे से देश रिपब्लिक आफ पलाऊ में भी रहा है। इसकी शादी वर्ष 2013 में असोम में हुई। इसका एक बेटा भी है। गिरप्तारी के बाद अब एटीएस कस्टडी रिमांड लेकर उससे विस्तृत पूछताछ करेगी। उससे पूछा जाएगा कि कश्मीर से आकर यहां कब से छिपा था और उसके और कौन-कौन साथी हैं? उससे यह भी पूछा जाएगा कि इसके पास धन कैसे और कितना आया? इसके अलावा उसके टारगेट क्या-क्या थे? डीजीपी ने बताया कि एटीएस के एएसपी दिनेश यादव और डीएसपी दिनेश पुरी के नेतृत्व में इस आपरेशन को अंजाम दिया गया।

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