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Part 2: कहानी है छोटे शहर से निकल कर आए सिद्धू यानि सिद्धार्थ की…!

एक दिन काव्या का फोन आता है। मेरे घर वाले तुमसे मिलना चाहते हैं। क्या वजह है, पूछने पर वो कुछ नहीं बोलती। पर एक उदासी होती है। सिद्धू पहले तो कुछ समझ नहीं पाता, पर जब वो जोर देता है तो काव्या उसे बताती है।

काव्या की बातें सुनकर सिद्धू हैरान रह जाता है। अभी कल ही की तो बात है, जब दोनों ऑफिस के सामने आराम से चाय पी रहे थे। फिर दोनों साथ मूवी देखने के लिए निकले और देर रात तक घूमते रहे। वो उसे पीजी भी तो छोड़ने गया था… नहीं नहीं। वहां से दोनों एक कॉमन फ्रेंड के घर निकल गए थे। और फिर सुबह तक वो काफी मस्ती करते रहे। काव्या सारी रात खूब चहकती रही। शायद उसे आने वाला दिन बेहद बेहतरीन दिख रहा था। पर हकीकत हमेशा हमारे सोचने से जुदा होती है।
खैर, उसने कहा कि वो थोड़ा सोच कर कॉल करता है और विस्तार से इस बारे में चर्चा करेगा। कि आखिर वो क्या जवाब दे। काव्या के फोन रखने के बाद वो सोच में पड़ जाता है। आखिर उसने ऐसा क्यों किया? क्या वो कुछ दिन और सारी बातों को सिर्फ हम दोनों के बीच नहीं रख सकती थी? आखिर उसे किस बात का डर था या किस बात की जल्दी थी? अभी तो वो सिद्धू के बारे में सबकुछ सही से जान भी नहीं पाई थी और अब ये सबकुछ।

उस पूरे दिन सिद्धू ने काव्या को फोन करने की हिम्मत नहीं की। या यूं कहें कि वो हिम्मत जुटा ही नहीं पाया। पूरी दुनिया के लिए आज का दिन तेजी से बीत रहा था। पर सिद्धू के लिए मानो वक्त थम सा गया था। वो पूरे दिन इसी पसोपेश में रहा कि वो आखिर क्या करे। काव्या को क्या जवाब दे और फिर उसके घर वाले आ रहे हैं तो वो उनसे किस तरह से पेश आए? वो पूरी तरह से खुद को भुलाए बैठा था। सभी के लिए शाम हो गई थी, पर उसके लिए एक दिन ढल रहा था। जिसे कभी आना ही नहीं था। तभी उसके फोन की घंटी बजती है…
सिद्धू-हेलो
काव्या-हाय सिद्धू.. कहां हो तुम?
सिद्धू- कहीं नहीं, बस घर पर ही था।
काव्या- तो तुमने क्या सोचा? कुछ बताया नहीं…
सिद्धू- क्या ही बोलूं? खैर, अपना बताओ। कैसा रहा पूरा दिन? ऑफिस में सबकुछ ठीक रहा?
काव्या- हां, ऑफिस में तो सबकुछ ठीक ही रहा। वैसे, अभी मैं तुम्हारे घर के सामने खड़ी होकर भी फोन पर ही बात करूं, या दरवाजा भी खोलोगे ?
सिद्धू- क्या? तुम घर के बाहर ही हो? पागल हो? तुमने बताया क्यों नहीं? रुको… अभी आता हूं।

To be continued.
इस प्रेम कहानी के अगले कई हिस्से आएंगे, पर वो आप सभी के रिएक्शन पर है।

पहले भाग के लिए यहाँ क्लिक करें

(C) Copyright: Shravan K Shukla

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