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कहानी है छोटे शहर से निकल कर आए सिद्धू यानि सिद्धार्थ की…!

कहानी है छोटे शहर से निकल कर आए सिद्धू यानि सिद्धार्थ(25) की।  जिसे मोहब्बत हो जाती है।  और उस मोहब्बत की कहानी में क्या रंग आते हैं,  ये उसी का वृतांत है।

वैसे,  सिद्धू  भले ही छोटे शहर का था,  पर उसके सपने बड़े थे।  आसमान बड़ा था,  तो जमीन भी बड़ी थी उसके लिए।  कहने को वो इंजीनियर था,  पर मोहब्बत ने उसे बुद्ध बना दिया।  जी हां,  इस छोटी सी प्रेम कहानी ने उसे दुनियादारी सिखा दी।  वैसे तो काव्या से वो सालभर पहले ही मिल चुका था।  काव्या(24) उसे उससे भी पहले से जानती थी।  वजह थी,  काव्या के पिता(51) भी इंजीनियर ही थे,  और वो भी।  उसने साल भर पहले जब सिड को देता था तो उसमें उसे अलग ही बात दिखी थी।  सिद्धू ,  जो सेल्फमेड बंदा था,  वो थोड़ा फक्कड़ किस्म का था।  अपने दिल की सुनता था।  हालांकि दिन में तबतक प्यार के देवता यानि क्यूपिड की एंट्री नहीं हो पाई थी।  उसकी वजह भी था कि वो अपनी दुनिया में इतना खोया रहता था कि उसे किसी बात की परवाह ही नहीं होती थी।  इंडस्ट्री में ढेर सारे दोस्त थे।  लड़कियां भी थी।  कुछ कॉमन फ्रेंड्स भी थे।  पर उसे किसी बात की परवाह नहीं थी।  यही वजह है कि जब दोनों का पहली बार सामना हुआ तो सिड का ध्यान काव्या की तरफ गया ही नहीं।  वो दोनों अजनबी ही रहे।  पूरे साल भर।  इस बीच काव्या ने अपनी तरफ से पहल भी की,  तो सिद्धू  की तरफ से कोई रिस्पांस ही नहीं आया।  वो क्या है न,  उस समय सोशल मीडिया का अलग ही स्वैग हुआ करता था।  और सिद्धू  सोशल मीडिया पर अंजान लोगों से दूर ही रहता था।  ऐसे में बात आई गई हो गई,  पर काव्या की नजर उसपर बनी रही।

इत्तेफाक की बात है कि जिस तरह से दोनों पहली बार मिले थे,  उसी तरह से एक पार्टी में दोनों दूसरी बार भी मिले।  इस बार काव्या अपने पापा के साथ ही नहीं,  मम्मी के साथ भी थी।  पर करीब दो दिनों तक आसपास रहने के बावजूद सिद्धू  का ध्यान काव्या की तरफ गया ही नहीं।  जबकि उसके पापा से उसकी खूब बातचीत हुई,  मां से भी उसने ढेर सारी बातें की।  लेकिन काव्या को अनदेखा कर दिया।  हालांकि ये सिर्फ इत्तेफाक की बात थी।  क्योंकि उसे तो पता ही नहीं था कि उसकी जिंदगी में एक तूफान आने वाला था।  वो तूफान जो प्यार का देवता यानि क्यूपिड राजा लाने वाले थे।  वही क्यूपिड राजा,  जो लोगों के दिनों पर प्यार वाला तीन चलाकर घायल कर देते हैं और आदमी खुद को भी भूल जाता है।

खैर,  उस मुलाकात में भी दोनों की कोई बात नहीं हुई,  सिवाय दो कॉमन फ्रेंड्स की फोटोग्राफी वाली कारगुजारियों के।  एक कॉमन फ्रेंड ने दोनों की ही तस्वीरें खींची थी और लोग पार्टी ये विदा हो रहे थे फिर से मिलने के वादे के साथ।  इस बीच पार्टी में मौजूद रही कॉमन पर सीनियर मैडम ने काव्या की मम्मी-पापा के साथ तस्वीरें खिंचवाई वो भी सिड से बोलकर।  इस बीच तस्वीरों में काव्या भी आ गई थी।  खैर,  पार्टी के बाद सब लोग अपने घर पहुंचे और बातों को याद करते हुए मुस्करा ही रहे थे कि तभी काव्या की तस्वीर अचानक सिद्धू के सामने आ गई।  उसे यही सोचकर तस्वीरें सभी के पास भेज दी कि जिसकी तस्वीरें होंगी वो ले लेगा।  लेकिन,  ये उसकी लव स्टोरी का एंट्री पॉइंट बन गया।  एक दिन वो देखता है कि वही सीनियर मैडम सिद्धू की खींची तस्वीर को काव्या के साथ टैग करके ढेर साला प्यार जता रही थी।  सिद्धू ने भी तस्वीर देखी,  पर उसे हैरानी हुई कि वो उसके ही सीनियर साथी की बेटी है,  जो उसके करीबी हैं।  पर पता नहीं था कि उनकी बेटी भी है।  खैर,  यहीं कमेंट बॉक्स में खूब सारी बातें की गई और तभी पता चला कि काव्या का ऑफिस उसके साथ ही बगल वाली बिल्डिंग में ही है।  वो सालभर से यहीं है और काव्या के मैसेज को भी वो इग्नोर कर चुका है।  और फिर हैरानी जताने के बाद दोनों चाय पर मिलने को सहमत हो जाते हैं। जिसके बाद,  कहानी एक नया मोड लेती है…

To be continued.. (C) Copyright: Shravan K Shukla

 

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