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रोहिंग्‍या मुद्दा: मुस्लिमों के खिलाफ म्यांमार हिंसा पर संयुक्त राष्ट्र में चीन के बदले सुर

नई दिल्ली। रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों के विरुद्ध उनके ही देश में हो रहे हिंसा पर जहां सारे देश अपनी-अपनी राय रख रहें है वही इस मुद्दे पर चीन ने हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अपने बोल बदल हैं।

पहले जहां चीन ने रोहिंग्या मुस्लिम आतंकियों के विरुद्ध म्यांमार की सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराया था वही अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाते ही इसके सुर बदल गए और इन्होंने म्यांमार की हिंसा पर अपनी चिंता जता दी। सुरक्षा परिषद के साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरस ने भी म्यांमार की हिंसा पर दुःख और चिंता जताते हुए कहा की वहां पर जल्द शांति स्थापित होने की सख्त जरूरत है। आपकों बता दे की हिंसाग्रस्त म्यांमार से अब तक चार लाख रोहिंग्या मुसलमान भागकर पड़ोसी देश बांग्लादेश पहुंच चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि म्यांमार के रखाइन प्रांत की दशा अल्पसंख्यक मुक्त बनाने की दिशा में मूलवासियों का एक प्रयास है।

अब तक म्यांमार की एक तिहाई से ज्यादा अल्पसंख्यक आबादी अपना देश छोड़कर भाग चुकी है। इसलिए वहां म्यांमार सरकार तत्काल प्रभाव से सेना की कार्रवाई रोके और जारी हिंसा को खत्म कराए, कानून का राज स्थापित करे। उन लोगों की सुरक्षित वापसी की कोशिश करे, जो हिंसा के वजह देश छोड़कर गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने बताया कि उन्होंने इस मसले पर म्यांमार की नेता आंग सान सू ची से बात की है। म्यांमार सरकार के मुताबिक, 25 अगस्त को रोहिंग्या आतंकियों के सुनिश्चित हमले के विरुद्ध जब सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की तो आतंकियों ने आमजनों को ही अपना ढाल बनाया। इसी की वजह से हालात बिगड़े। वही इस पर पीड़ित लोगों का कहना है कि सेना ने सीधे उनके विरुद्ध ही कार्रवाई की और उन्हें मारा-पीटा गया और हमारें घरों में आग लगा दी गई। पीड़ित सैन्य कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या एक हजार से अधिक बता रहे हैं और सरकार मारे गए आतंकियों की संख्या करीब चार सौ बता रही है।

बुधवार को ब्रिटेन और स्वीडन के अनुरोध पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद ने म्यांमार के परिस्थितियां पर विचार किया। परिषद ने वहां के हालात की निंदा करते हुए उसमें सुधार की मांग की। सदस्यीय सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने वहां पर सैन्य कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से बंद करके हालात को काबू करने की म्यांमार सरकार से मांग की। उल्लेखनीय है कि चीन सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और उसने इससे पहले बयान जारी करके म्यांमार में आतंकियों के विरुद्ध सेना कार्रवाई पर अपना समर्थन किया था। इधर म्यांमार सरकार ने चीन के इस बदले रुख पर हैरानी जताई है।

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