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मालेगांव ब्लास्ट: 9 वर्ष बाद जेल से निकले कर्नल पुरोहित, बोले- देश की सेवा करना चाहता हूं

नई दिल्ली: मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित नौ साल बाद बुधवार को जेल से बाहर आ गए। उन्हें सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। जिसके बाद वे मंगलवार को जेल से रिहा होने वाले थे। लेकिन देर रात तक कागजी कार्रवाई पूरी न होने की वजह से उन्हें रिहा नहीं किया जा सका। रिहाई के बाद बुधवार को वे सीधे अपने घर पुणे आएंगे। मंगलवार को कोर्ट में पेशी के बाद जेल जाते वक्त पुरोहित ने कहा कि, आर्मी ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा।

एनआईए कोर्ट ने मानीं शर्तें…

मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। इसके बाद पुरोहित को मंगलवार दोपहर स्पेशल एनआईए कोर्ट में पेश किया गया था।

दोपहर में उनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट में बेल की शर्तों में कुछ बदलाव की अपील की। कोर्ट ने इन्हें मान लिया। लेकिन, एनआईए कोर्ट से रिलीज ऑर्डर में देरी हो गई। शाम 7 बजे पुलिस उन्हें वापस नवी मुंबई के तलोजा जेल ले गई थी।

अार्मी अपने साथियों को निराश नहीं करती’

एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए उन्होंने कहा, “आर्मी ने कभी उन्हें निराश नहीं किया, आर्मी और उनके साथी हमेशा उनके साथ खड़े रहे। यह आर्मी की परंपरा रही है कि कभी अपने साथियों को निराश नहीं करती है। मुझे कभी एहसास नहीं हुआ कि मैं सेना से बाहर हूं।”
पुरोहित ने आगे कहा, “मैं अपनी यूनिफार्म फिर पहनना चाहता हूं, आर्मी में वापस जाना चाहता हूं। वर्दी मेरे शरीर की स्किन की तरह है। मुझे इसे वापस पाने में बेहद खुशी होगी।” आगे उन्होंने कहा कि जेल से निकलने के बाद वे सबसे पहले अपने घर जाएंगे।

‘किसी और को नहीं किस्मत को दोष देता हूं’

पुरोहित ने आगे कहा, “9 साल जेल में रहने के बाद मैं किसी और को नहीं, बल्कि अपनी किस्मत को दोष देता हूं। सेना ने मुझे चरित्र सिखाया, यह केस मुझे परेशान नहीं करता है।”ब्लास्ट केस में नाम जुड़ने पर पूछे सवाल पर पुरोहित ने कहा, “अगर मैं इस तरह के काम से जुड़ा रहता तो मेरी पत्नी और मां मुझे छोड़ देती।”

क्यों हुई रिहाई में देरी?

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर पुरोहित को स्पेशल एनआईए कोर्ट जज एसडी तिकाले के सामने पेश किया गया। इस कोर्ट को ही पुरोहित पर आरोप तय करने हैं।दोपहर में सुप्रीम कोर्ट में पुरोहित के वकील श्रीकांत शिवदे ने एक एप्लीकेशन फाइल की। उन्होंने अपील में कहा कि उनके मुवक्किल को बेल देते वक्त जो शर्तें लगाई गई हैं, उनमें कुछ बदलाव किया जाए। शिवदे ने कहा कि श्योरिटी की जगह उन्हें कैश बेल दी जाए। सुप्रीम कोर्ट इसकी इजाजत दे दी।
इसके बाद, एनआईए कोर्ट से रिलीज ऑर्डर की प्रॉसेस शुरू हुई। इसमें काफी वक्त लगा और शाम के 7 बज गए। पुलिस पुरोहित को वापस जेल ले गई।

आर्मी की गाड़ी भी खाली लौटी

पुरोहित को जेल से लेने के लिए आर्मी की एक गाड़ी आई थी, लेकिन इसमें मौजूद अफसरों को जब लगा कि रिहाई आज नहीं हो पाएगी तो शाम को गाड़ी वापस चली गई।

रिहाई के बाद यूनिट को रिपोर्ट करेंगे

पुरोहित जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद अपनी यूनिट को रिपोर्ट करेंगे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, पुरोहित को 20 जनवरी 2009 को गिरफ्तारी के बाद सस्पेंड कर दिया गया था। उस वक्त वे सेना की पचमढ़ी स्थित यूनिट में तैनात थे। सूत्रों का कहना है कि सस्पेंड अफसर या जवान को जमानत मिलने पर उसे 24 घंटे में अपनी यूनिट में रिपोर्ट करना होता है। सेना मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उसके सस्पेंशन का रिव्यू करती है। इस दौरान उसको ‘ओपन अरेस्ट’ यानी खुली गिरफ्तारी में रखा जाता है और उसकी एक्टिविटी पर नजर रखी जाती है। उसे वर्दी पहनना जरूरी होता है, लेकिन विशेष अनुमति में वह सादे कपड़े भी पहन सकता है।

क्या है मामला?

बता दें कि 29 सितम्बर 2008 को महाराष्ट्र में नासिक जिले के मालेगांव में बम ब्लास्ट हुआ था। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई थी, करीब 100 लोग जख्मी हुए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और पुरोहित समेत 12 लोग अरेस्ट किए गए थे।
ब्लास्ट उस वक्त किए गए थे, जब लोग रमजान के दौरान नमाज पढ़ने जा रहे थे। इन ब्लास्ट के पीछे हिंदू राइट विंग ग्रुप्स से जुड़े लोगों का हाथ होने की बात सामने आई थी।

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