Sunday , February 24 2019
Home / देश / अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट से शिया वक्फ बोर्ड को झटका, सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर 5 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई
PC: emitpost

अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट से शिया वक्फ बोर्ड को झटका, सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर 5 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली: अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में 7 साल बाद सुनवाई शुरू हुई। हालांकि मामले में कुछ आज खास नहीं हुआ सिवाय इसके कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई फिलहाल 5 दिसंबर तक के लिए टाल दी। कोर्ट ने लगभग चार माह का ये समय सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर दिया है। बता दें कि पक्षकारों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी।

 

सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा समय मांगने पर कोर्ट ने यह समय दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से दस्तावेजों के अनुवाद के लिए कुछ समय मांगा था। वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कई दस्तावेज जो दूसरी भाषाओं में हैं, उनका अनुवाद नहीं हो पाया है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीफ 5 दिसंबर तक के लिए टाल दी।

 

दूसरी ओर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका पर कहा कि वो पहले तीनों मुख्य पक्षों की दलीले सुनेगी, बाद में आपका नंबर आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में रामलला के प्रतिनिधि पहले पक्षकार के तौर पर हैं तो दूसरे और तीसरे पक्षकार के तौर पर सुन्नी वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा है।

 

बता दें कि कुछ दिन पहले ही शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायरा कर खुद को पक्ष बनाने के लिए कहा था, साथ ही दावा किया था कि बाबरी ढांचा उसकी संपत्ति थी। शिया वक्फ बोर्ड ने ये भी कहा था कि वो मामले का शांतिपूर्ण हल चाहता है और इसके लिए वो विवादित श्रीरामलला जन्मभूमि की मुख्य जगह से इतर किसी मुस्लिम बहुल इलाके में मस्जिद बनाने को तैयार है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के इस रूख के बाद ये साफ हो गया है कि अभी मामले में तीन ही मुख्य पक्ष हैं और शिया वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं माना गया है।

 

इससे पहले, मामले की सुनवाई के समय सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कई दस्तावेजों के अनुवाद का काम अबतक नहीं हो पाया है। ये दस्तावेज संस्कृति, फारसी, उर्दू, अरबी और अन्य भाषाओं में हैं। इनके अनुवाद के लिए थोड़े समय की जरूरत है।

इस मामले में कुछ समय पहले बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले की जल्द सुनवाई की गुहार लगाई थी।  वहीं जुलाई के पहले हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वामी को भी मामले में पक्षकार बनने की इजाजत दी है। स्वामी ने यह भी कहा था कि हाईकोर्ट के फैसले को लेकर दायर मुख्य अपील पिछले सात वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है लिहाजा इस पर तत्काल सुनवाई होनी चाहिए। स्वामी ने इस मामले में याचिका दायर कर उस जगह पर पूजा करने के लिए जगह को खोलने की इजाजत भी मांगी थी।

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने वर्ष 2010 में विवादित स्थल के 2.77 एकड़ क्षेत्र को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला के बीच बराबर-बराबर हिस्से में विभाजित करने का आदेश दिया था।  कुछ महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का अदालत से बाहर समाधान निकालने की संभावना तलाशने के लिए कहा था। इसे लेकर पक्षकारों की ओर से प्रयास किए गए लेकिन समाधान नहीं निकल सका। लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को अब मेरिट के आधार पर ही इस विवाद का निपटारा करना है।

About RITESH KUMAR

Check Also

आदिवासियों की समस्या को उजागर करती टी-सीरीज की शार्ट फिल्म ” जीना मुश्किल है यार” विश्व फ़िल्मफेस्टिवल में  

   आदिवासियों की समस्या को उजागर करती शार्ट फिल्म ‘ जीना मुश्किल है यार’ का …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *