Monday , July 24 2017
Home / देश / विदेश में नौकरी पाने के लिये पासपोर्ट बाबा के दरबार में करते है फरियाद!

विदेश में नौकरी पाने के लिये पासपोर्ट बाबा के दरबार में करते है फरियाद!

जमशेदपुर। अगर आपकी विदेश जाने की तमन्ना है और कोई अड़चन आ रही है तो पासपोर्ट बाबा की मजार पर जरूर आएं। ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले बंदों की मन्नतें बाबा पूरी करते हैं। यही कारण है कि बारीडीह के कालूबागान स्थित सूफी संत हजरत मिस्कीन शाह की मजार पर हर दिन हाथों में पासपोर्ट की फोटोकॉपी लेकर लोग आते हैं और उस कॉपी को वहां बांध कर चले जाते हैं।

मन्नत मांगने के बाद बाबा के दरबार में सात सप्ताह में कम से कम एक दिन आना होता है। उसके बाद मन्नत मांगनेवालों की इच्छा पूरी हो जाती है। यहां सबसे ज्यादा भीड़ बृहस्पतिवार और शुक्रवार को देखने को मिलाती है। यहां आने वाले लोगों की मानें तो पासपोर्ट बाबा की मजार पर आने के बाद कई लोगों को विदेश में नौकरी मिली है। यहां आने वालों में सबसे ज्यादा तादाद उन लोगों की है जो नौकरी करने के लिए खाड़ी देश या यूरोप जाना चाहते हैं।

सूफी संत हजरत मिस्कीन शाह की मजार को लोग पासपोर्ट बाबा के नाम से इसलिए जानते हैं क्योंकि यहां सबसे अधिक लोग विदेश जाने के लिए बाबा के दरबार में मन्नत मांगते हैं। विदेश जाने के लिए पासपोर्ट की जरुरत पड़ती है। इसलिए पासपोर्ट की फोटोकॉपी यहां लटकी रहती है। इस वजह से लोग इस जगह को पासपोर्ट बाबा की मजार कहते हैं।

पासपोर्ट बाबा की मजार की देखरेख 70 वर्षीय पीर मोहम्मद करते हैं। वह वर्ष 1964 से अकेले ही मजार के देखभाल करते आ रहे हैं। वहीं पीर मोहम्मद का कहना है कि यहां लोग अपनी तकलीफ लेकर आते है और एक खत बाबा का नाम लिख कर पेड़ पर लगा कर चले जाते हैं। मन्नत पूरी हो जाने पर वे बाबा का आर्शीवाद लेते हैं और खुशी से जो उनसे बन पड़ता है वह दान देकर चले जाते हैं।

उनका कहना है कि विदेश में नौकरी पाने वालों के अलावा मजार पर छात्र-छात्राएं या उनके अभिभावक भी परीक्षा के एडमिट कार्ड की फोटोकॉपी पेड़ पर टांगने आते हैं जिससे रिजल्ट अच्छा आए। लोग नौकरी के लिए विदेशी कंपनियों में भेजे गए आवेदनों की प्रति भी पेड़ पर लटकाते हैं। उनका दावा है कि अब तक सैकड़ों युवक यहां मन्नत मांगकर विदेशों में अच्छी नौकरियां पा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह दरगाह सुबह छह बजे से रात साढ़े आठ बजे तक खुला रहता है। यहां साल मे दो बार उर्स मनाया जाता है। इस दौरान इस दरगाह मे काफी भीड़ रहती है । करने के बाद उनकी समाधि यहीं बना दी गई। मजार में अब तक बाबा के नाम एक लाख से भी ज्यादा खत आ चुके है।। जमशेदपुर के रहने वाली अर्पिता चढढा ने अपने पति की नौकरी और घर की बेहतरी के लिए बाबा को खत लिखा है।

About आयुष गुप्ता

Check Also

कारगिल वॉर Special: …जब इंडियन एयरफोर्स के डर से सामने आई ही नहीं पाक एयरफोर्स!

इंडियन एयरफोर्स दुनिया की सबसे खौफनाक एयरफोर्स में शामिल हैं। खास बात ये है कि …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *