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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केसः असीमानंद को मिली बेल, अजमेर ब्लास्ट मामले में हो चुके हैं बरी

नई दिल्ली। हैदराबाद की मक्का मस्जिद धमाका मामले में स्वामी असीमानंद की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। हैदराबाद की अदालत ने उन्हें जमानत दी है।

अदालत ने इस मामले में तीन अन्य लोगों की जमानत पहले ही मंजूर कर चुकी है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार राष्ट्रीय जांच एजेंसी असीमानंद को मिली बेल को चैलेंज नहीं करेगी। असीमानंद को कुछ दिनों पहले ही अजमेर दरगाह ब्लास्ट में बरी किया गया है। हालांकि वह समझौता ब्लास्ट केस में आरोपी हैं।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को असीमानंद को मिली बेल की कॉपी आज मिलेगी, जिसके बाद ही यह फैसला किया जाएगा कि असीमानंद की बेल को चैलेंज किया जाना है या नहीं। एनआईए ने 2007 के समझौता ट्रेन ब्लास्ट केस पर बेल का विरोध नहीं किया था। असीमानंद समझौता ट्रेन ब्लास्ट के मुख्य आरोपियों में से एक थे। 2014 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने असीमानंद को इस मामले में जमानत दे दी।

हैदराबाद से बाहर नहीं जा सकेंगे असीमानंद

गुरुवार को कोर्ट ने बेल देते हुए कहा है कि असीमानंद बिना इजाजत के हैदराबाद से बाहर नहीं जाएंगे और जरूरत पड़ने पर मुकदमे की सुनवाई के लिए उपस्थित रहेंगे। गौरतलब है कि स्वामी असीमानंद का असली नाम नाबा कुमार सरकार है जिसे 19 नवंबर 2010 को हरिद्वार से यहां मक्का मस्जिद विस्फोट मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। यह घटना 18 मई 2007 की है। इसमें नौ लोग मारे गए थे।

हालांकि, इस साल आठ मार्च को असीमानंद और छह अन्य को 2007 के अजमेर विस्फोट मामले में जयपुर की एक अदालत ने बरी कर दिया था। मक्का मस्जिद मामले में कुल 166 गवाहों से मुकदमे के दौरान पूछताछ की गई है और 100 से अधिक गवाहों से पूछताछ की जानी अभी बाकी है। मामले के आठ आरोपियों में तीन पहले से जमानत पर रिहा हैं। NIA ने यह मामला सीबीआई से अपने हाथ में ले लिया था।

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