Thursday , May 24 2018
Home / क्राइम / सीएम योगी का ‘चेला’ है दहेज लोभी पति, इसलिए नोएडा पुलिस नहीं कर रही कार्यवाई

सीएम योगी का ‘चेला’ है दहेज लोभी पति, इसलिए नोएडा पुलिस नहीं कर रही कार्यवाई

टीम खबर ऑन डिमांड

नोएडा: महिला सुरक्षा का दावा करके यूपी में सरकार बनाने के बाद बीजेपी इस मुद्दे को भूल चुकी है। अब आलम यह हो गया है कि खुद सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ रहनेवाले कुछ लोग इतने दहेज लोभी हो गए हैं कि अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया है।

इस शख्स का नाम अतुल कुशवाहा है। मूल रूप से यह कानपुर में रहता है औऱ लगभग डेढ़ साल पहले इसने अपनी पत्नी को घर से सिर्फ इस वजह से क्योंकि प्रेम विवाह होने की वजह से उसे ससुराल से दहेज नहीं मिल सका था। काफी समय तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद पीड़त महिला के दवाब बनाने पर अतुल ने उससे शादी की थी। शादी को दो तीन महीने तक सब ठीक रहा और उसके बाद अतुल और उसके परिवार का दहेज रूपी दानव का घिनौना चेहरा धीरे-धीरे सामने आने लगा।

दहेज लोभी अतुल लाल घेरे में सीएम योगी के साथ

दहेज के दानवों अतुल कुशवाहा (पति), ससुर रामलखन कुशवाहा, सास छुन्नी देवी कुशवाहा, देवर अनुज कुशवाहा ने नवविवाहिता को जान से मारने की कोशिश की। पीड़िता किसी तरह घर से भागकर कल्याणपुर थाने (कानपुर) पहुंचती है। वहां वह मामले की पूरी जानकारी पुलिस को देती है।

अनुराग ठाकुर के साथ आरोपी अतुल कुशवाहा (लाल घेरे में)

मामला घरेलू होने की वजह से विवचक जगदीश वर्मा ने मामला दहेज अधिनियम में दर्ज करने की बजाय IPC 323 और 354 में दर्ज किया। आरोप यह भी है पीड़िता जो तहरीर लेकर थाने गई थी उसे बदलने के लिए उसपर दवाब बनाया गया और मामूली आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।

आरोपी अतुल (बाएं) का दावा है कि उसका कानपुर से विधायक सत्यदेव पचौरी (दाएं केक काटते हुए) से अच्छा सम्बन्ध है पुलिस कुछ नहीं कर सकती उसका।

पीड़िता जीवन यापन के लिए भागकर नोएडा चली है। लेकिन यहां पर भी अतुल कुशवाहा और उसके परिवार ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और तलाक देने के लिए दवाब बनाने लगे। साथ ही यह भी कहते अगर तुझे साथ रहना है तो एक गाड़ी और कुछ पैसे दहेज के रूप में हमें दो तब तुम्हे परिवार में रखेंगे।

आरोपी अतुल कुशवाहा कानपुर से विधायक सत्यदेव पचौरी का करीबी है इसलिए पुलिस इसके खिलाफ कार्यवाई नहीं करती।

नोएडा में भी कई बार आरोपी द्वारा मारपीट की गई। नोएडा सैक्टर 24 थाने में ही दो बार अतुल कुशवाहा के खिलाफ मारपीट का मुकदमा पीड़िता ने दर्ज कराया गया लेकिन यहां पर भी कुछ बीजेपी नेताओं के दवाब में मामला दहेज अधिनियम से जुड़ी धाराओं में नहीं दर्ज किया गया।

राजनीतिक पहुंच होने की वदह से अतुल कुशवाहा पुलिस को अपनी उंगलियों पर नचाता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है दहेज अधिनियम में केश दर्ज होने के बाद भी यह गिरफ्त से बाहर है और पुलिस इसका साथ दे रही है

अतुल के परिजान बोलते हैं नहीं है उन लोगों का उससे सम्बन्ध लेकिन पार्टियों में कई बार गए साथ और अतुल भी रहता है घर पर

दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद जब नोएडा पुलिस मीडिएशन का समन लेकर अतुल के घर पहुंचती है तो उनकी मां छुन्नी देवी घर में मिलती हैं। जो पुलिसकर्मी को जानकारी देती हैं कि उनका अतुल से कोई सम्बन्ध नहीं है।

अपनी मां, नानी और छोटे भाई के साथ एक पार्टी में अतुल कुशवाहा। यह तस्वीर अतुल ने अपने फेसबुक पर 19 अप्रेल 2018 को रात्रि 10:55 बजे शेयर किया था। अगर यह अपने परिवार के साथ नहीं रहता तो इस फोटो और पार्टी में क्या कर रहा है?

इतना ही नहीं छुन्नी देवी  एक कागज भी दिखाती हैं जिसमें उनका कहना रहता है कि वह अतुल से सारे रिश्ते तोड़ चुकी हैं। लेकिन उनके पास में रहने वाले लोग बताते हैं कि अतुल अक्सर अपने घर आता है और वह परिवार से अलग नहीं है। अतुल कई मौकों पर अपने परिजनों के साथ पाया गया है। यहां तक कि उसने खुद अपनी मां के साथ कई फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रखा है।

चार महीने चक्कर लगाने के बाद दर्ज किया गया दहेज अधिनियम के तहत मामला

पीड़िता तहरीर लिए ठंड के दिनों में सुबह 10 बजे से देर रात्रि तक नियमित लगभग चार महीने तक पति अतुल और उसके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए महिला थाना नोएडा का चक्कर काटती रही। काफी मशक्कत और मीडिया द्वारा मामला उठाए जाने के बाद दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामला दर्ज हुए लगभग एक साल हो गए हैं लेकिन रिश्वत लेकर IO ने आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं की और न ही चार्जशीट में उसे दोषी बताया है।

मामला मुकदमा अपराध संख्या 60/2017 U/s IPC 498-A, 323, 313 और दहेज अधिनियम 3 व 4 के तहत मामला दर्ज है। आरोपी पीड़िता का जबरन गर्भपात भी करा चुका है।

एक साल हो गए नहीं दाखिल हुई चार्जशीट

मामला दर्ज किए लगभग 1 साल हो गए हैं लेकिन अभी भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है। मामले की विवेचना कर रहे महिला थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर बार-बार उसी FIR का हवाला दे रहे हैं जो कानपुर में मामूली धाराओं में पीड़िता ने अपनी जान बचाने के लिए दर्ज कराई थी। अब सीओ सिटी थर्ड भी यही बात कह रहे हैं कि वहां दहेज अधिनियम के तहत क्यों नहीं मामला दर्ज कराया गया। जबकि उन्हें यह बता दिया गया कि वहां पुलिसकर्मियों ने आरोपियों की राजनीति में पहुंच होने के नाते साथ नहीं दिया।

सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर

विवेचक देते हैं विवेचना अधिकारी बदलने की धमकी

पीड़िता का आरोप है कि विवेचक सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर ने आरोपी अतुल कुशवाहा से रिश्वत के तौर पर लगभग दो लाख रुपए ले लिए हैं। वह विवेचना अतुल के पक्ष में कर रहे हैं और जो चार्जशीट अभी सीओ सिटी थर्ड के पास उन्होंने सबमिट की है उसमें सिर्फ आरोपी के पक्ष की बातें लिखी गई हैं। यानि नोएडा पुलिस ने यहां भी महिला की तकलीफों का सौदा कर डाला।

मुझे अब न्याय नहीं, मौत चाहिए, जिम्मेदारी सिर्फ SI बिजेंद्र पर्रिहर: पीड़िता

नोएडा पुलिस द्वारा ढुलमुल रवैये से विवेचना करने और रिश्वत लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद पीड़िता को अब न्याय की उम्मीद नहीं रह गई है। पीड़िता का कहना है कि वह अब अपनी जिंदगी को खत्म करना चाहती है इसके लिए पति अतुल कुशवाहा और उसके परिजन कम और सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र पर्रिहर ज्यादा होंगे। पीड़िता का कहना है कि जहां की पुलिस चार्जशीट दाखिल करने में एक-एक साल लगा रही हो और आरोपी का ही साथ दे रही हो तो ऐसी पुलिस न्याय दिलाने में उसकी क्या सहायता करेगी।

About Akhil Kumar

Check Also

कर्नाटक चुनाव:-प्रधानमंत्री मोदी और कांग्रेस के अदयक्ष राहुल गांधी एक दूसरे पे बार पलटबार किये

कर्नाटक विधानसभा चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहे हैं वैसे ही बीजेपी और कांग्रेस एक …