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खराब होने पर बदले नहीं, बल्कि ठीक किए जाएंगे प्राकृतिक जोड़

 

 

नई दिल्ली:आने वाले समय में घुटने, कूल्हे और कंधे जैसे जोड़ों के खराब होने पर उन्हें बदले जाने के बजाए उन्हें ठीक किया जाएगा। कार्टिलेज रिजेनरेशन अथवा रेस्टोरेशन की नई तकनीकों से यह संभव हो सकेगा। इन तकनीकों के बारे में इंडियन कार्टिलेज सोसायटी के तत्वाधान में इस सप्ताह होने वाली संगोष्ठी में देश विदेश के कार्टिलेज विशेषज्ञ विचार विमर्श करेंगे।

इंडियन कार्टिलेज सोसायटी (आईसीएस) के अध्यक्ष डा. राजू वैश्य ने आज यहां बताया कि डा. राजू वैश्य ने बताया कि कार्टिलेज रिजेनरेशन एवं रिस्टोरेशन की नई तकनीकों से अब उम्मीद जगी है कि ओस्टियो आर्थराइटिस एवं अन्य कारणों से खराब होने वाले घुटने एवं अन्य जोड़ों को बदलना नहीं पड़े बल्कि प्राकृतिक जोड़ों को ही ठीक कर दिया जाए।

डा. राजू वैश्य ने बताया कि सात और आठ दिसंबर को जयपुर में इंडियन कार्टिलेज सोसायटी की पांचवी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी होने जा रही है जिसमें करीब 200 कार्टिलेज विशेषज्ञ कार्टिलेज रिजेनरेशन एवं रेस्टोरेशन के बारे में चर्चा करेंगे।

डा. राजू वैश्य ने बताया कि इस साल की संगोष्ठी का अध्यक्षीय मुख्य थीम है – रिप्लेसमेंट से बेहतर है रिजेनरेशन। आज अस्थि चिकित्सा के क्षेत्र नई तकनीकों के विकास होने के बाद से खराब जोड़ों के स्थान पर कृत्रिम जोड़ लगाने के बजाए जोड़ों के उतकों को रिजेनरेट करके प्राकृतिक जोड़ों को बचा लिया जाए। हाल के दिनों में विकसित कार्टिलेज रिजेनरेशन तकनीकों से प्राकृतिक कार्टिलेज बनाने में मदद मिलती है और इस कारण जोड़ों को बदलने की जरूरत या तो खत्म हो जाती है या टाली जा सकती है। इस तरह की तकनीक खास तौर पर उन युवाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी जिनके घुटने या अन्य जोड़ कार्टिलेज के क्षतिग्रस्त होने या आर्थराइटिस के कारण खराब हो गए हैं।

इस संगोष्ठी के आयोजन सचिव डा. सौरभ माथुर ने बताया कि इस सम्मेलन में देश-विदेश से 150 से 200 एक्सपर्ट्स हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें अमरीका, ब्रिटेन, पौलेंड, हंगरी, इराक, ईरान, अफगानिस्तान जैसे देशों के विषेशज्ञ भी शामिल हैं। इस दौरान डॉ ब्रूस राइडर, डॉ जैकेक वल्वस्की, प्रो. राजी जैसे एक्सपर्ट्स मुख्य स्पीकर के रूप में मौजूद रहेंगे। इस सम्मेलन में विशेषज्ञ आर्टिकुलर कार्टिलेज इम्प्लांटेशन, स्टेम सेल्स थेरेपी, स्केफोल्ड जैसी तकनीकों के बारे चर्चा करेंगे।

आईसीएस के पूर्व अध्यक्ष डा. निशिथ शाह ने बताया कि कार्टिलेज हमारे शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण संरचनात्मक घटक है। यह मजबूत उतक है लेकिन हड्डियों की तुलना में अधिक मुलायम एवं लचीला है। कार्टिलेज विशिष्ट कोशिकाओं से बने होते हैं जिन्हें कोंड्रोसाइट्स कहा जाता है और ये कोशिकाएं बहुत अधिक मात्रा में कॉलेजन फाइबर, प्रोटियोग्लाकैन और इलास्टिन फाइबर से बने एक्स्ट्रासेलुलर मैट्रिक्स यौगिक उत्पादिक करती हैं।

डा. दीपक गोयल ने बताया कि कार्टिलेज के उतक में अपनी खुद की मरम्मत करने की क्षमता होती है लेकिन इसमें यह क्षमता बहुत ही सीमित होती है क्योंकि इसमें रक्त कोशिकाएं  नहीं होती है और लेकिन हीलिंग की प्रक्रिया के लिए रक्त जरूरी होता है। कार्टिलेज पुनर्निर्माण के लिए आज अनेक तकनीकों का उपयोग हो रहा है और अनुसंधानकर्ता कार्टिलेज को उत्पन्न करने की नई विधियों का विकास करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि लोगों को ओस्टियो आर्थराइटिस के दर्द से मुक्ति मिले और वे अपने प्राकृतिक जोड़ों के साथ ही लंबा जीवन जी सकें।

 

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