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14 साल बाद लक्ष्मी रवि का विशेष संयोग

भोपाल। मां सरस्वती की उपासना का पर्व वसंत पंचमी सोमवार को राजधानी में हर्षोल्लास एवं भक्तिभाव के साथ मनाई जा रही है। इस बार वसंत पंचमी पर 14 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। वसंत पंचमी का पर्व अबूझ मुहूर्त के तौर पर जाना जाता है। लेकिन इस बार शुक्र अस्त होने के कारण अबूझ मुहूर्त में भी विवाह नहीं हो सकते हैं।

ज्योतिषमठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के मुताबिक वसंत पंचमी जैसे साढ़े 3 अबूझ मुहूर्त होते है, जिनमें अक्षय त्रितिया एवं नवमी भी शामिल है। मान्यता है कि अबूझ मुहूर्त किसी भी शुभकार्य के लिए श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक होता है। शुभकार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त में बिल्कुल भी सोचने-विचारने एवं पंचाग आदि देखने की आवश्यकता नहीं होती है। लेकिन इस बार शुक्र अस्त होने के कारण अबूझ मुहूर्त में भी शादियां नहीं हो पाएंगी। हालांकि गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार, हवन-भागवत एवं अन्य शुभकार्य किए जा सकते हैं मां चामुण्डा दरबार के पुजारी पं. रामजीवन दुबे एवं ज्योतिषाचार्य विनोद रावत के मुताबिक इस बार वसंत पंचमी पर उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो इससे पहले 2004 में बना था।

पं. दुबे के मुताबिक धर्म ग्रंथों के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर वसंत पंचमी का पर्व मनाया जावेगा। इस दिन ज्ञान व संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। वसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती जयंती पूजा पाठ महाआरती प्रसाद वितरण के साथ मनाई जाएगी। पं. रामजीवन दुबे एवं ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम के मुताबिक वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा करने से बुद्धि तेज होती है। जो बच्चे पढ़ाई-लिखाई में खासे कमजोर होते हैं, उन्हें इस दिन मां सरस्वती की आरधना एवं पूजा पाठ करना चाहिए। इससे उनकी बुद्धि प्रखर होती है एवं पढ़ाई-लिखाई में मन एकाग्रित होता है। वसंत पंचमी के उपलक्ष्य में मां चामुंडा दरबार एवं ज्योतिषमठ संस्थान में विशेष पूजापाठ किया जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार वसंत पंचमी के दिन सफेद फूल, चंदन, एवं सफेत वस्त्र धारण करके देवी सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान भगवान गणेश का भी ध्यान करना चाहिए।

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