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…ये चीज लड़कियों पर पड़ती है भारी!

मुजम्मिल

क्या आप यह मान सकते हैं कि एक-दो सेंटीमीटर की कोई नाजुक सी झिल्ली, पांच फीट की लड़कियों के पूरे अस्तित्व पर भारी पड़ सकती है! यह सुनने में बड़ा अजीब लगता होगा। लेकिन अफसोस है कि ये सच्चाई हैं, एक झिल्ली जिसे विज्ञान की भाषा में ‘हाइमन’ कहा जाता है, हम लड़कियों के पूरे अस्तित्व को किसी भी पल कटघरे में खड़ा कर सकती है। बहुत सी लड़कियां शायद ही कभी इसे देख या महसूस कर पाती होंगी लेकिन इस गुलाबी झिल्ली का काला साया, अक्सर उनके जेहन पर छाया रहता है।

अब जब बात हाइमन से शुरू हो गई तो पहले इसके बारे में ही बात कर लेते हैं।ज्यादातर लड़कियों की योनि में जन्मजात एक गुलाबी झिल्ली होती है। मान्यता यह है कि अगर किसी लड़की का हाइमन ब्रेक हो चुका है तो उसके यौन संबंध बन चुके हैं। इसे उस लड़की की वर्जिनिटी खत्म हो जाना या फिर ‘यौनशुचिता’ या ‘कौमार्य’ का भंग हो जाना भी कहा जाता है. भारतीय समाज में इसे आज भी न सिर्फ बेहद शर्मनाक माना जाता है बल्कि यह लगभग अस्वीकार्य ही है.

हम ये मानती हैं कि इसी यौनशुचिता की रक्षा में हमारा न सिर्फ पूरा बचपन और कैशोर्य कैद कर दिया जाता है, बल्कि हमारी बुनियादी आजादी भी हमसे छीन ली जाती है. ‘वर्जिनिटी को बचाने का सारा टंटा ही सिर्फ इसलिए है कि महिलाएं अपने पति को खुश कर सके वही उनके जीवन का पहला पुरुष है।वही है, जिसके लिए आपने खुद को सालों दूसरे लड़कों/पुरुषों से बचाकर रखा है।शादी से पहले लड़कियों को हजार तरह के निर्देश दिये जाते हैं – यहां मत जाओ, उससे मत मिलो, लड़कों से दोस्ती नही करो शाम तक तक लौट आना, रिश्तेदारों के यहां मत जाना मुझे लगता है कि ये प्रतिबंध सिर्फ उनके कौमार्य की रक्षा को दिमाग में रखकर ही लगाए जाते हैं.’ पटना में एक कंपनी में काम करने वालीं राधिका शर्मा बताती हैं की इस बात को हम ऐसे भी कह सकती हैं – वर्जिनिटी हमारी तो हैं लेकिन हमारी होकर भी ये हमारी नही हो पाई।इसलिए हममें से कई अब यह भी मानने लगी हैं कि जब ये हमारे लिए है ही नहीं तो इसे बचाकर रखने का क्या फायदा।

धीरे-धीरे वह वक्त आने वाला है जब कौमार्य को बचाए रखने का यह चलन ज्यादातर लड़कियों के लिए एक फिजूल की बात होने जा रहा है।लेकिन आज भी ऐसी लड़कियों की कमी नहीं जो इसे ना कुछ मानते हुए भी अपनी वर्जिनिटी तोड़ने की हिम्मत नहीं कर पाती। इनमें से कुछ के आड़े संस्कारों का हैवी डोज आ जाता है तो कुछ के दिमाग में हर वक्त यह चलता रहता है कि अगर किसी ने जान लिया तो क्या होगा? कई बार सही मौका ना मिल पाना भी इसकी वजह बनता है. इस मामले में अब एक अच्छी बात यह हो गई है कि ये लड़कियां अब उन्हें बुरा नहीं मानतीं जिन्होंने अपनी मर्जी से वर्जिनिटी खोने को चुना है।

बिहारशरीफ से आने वाली मार्केटिंग प्रोफेशनल काजल बीते कई सालों से मुंबई में रहती हैं. वे बताती हैं, वर्जिनिटी‘ कोई इतनी बड़ी चीज नहीं है, जिसे लेकर इतना बवाल मचाया जाये अगर लड़के अपने लिए कोई वर्जिन लड़की चाहते हैं तो उन्हें भी पहले अपनी वर्जिनिटी संभालकर रखनी चाहिए।लड़कियों की वर्जिनिटी को लेकर पूरा समाज आज भी बेहद सजग है और चाहता है कि लड़कियां वर्जिन ही रहें।लेकिन लड़कों के बारे में ऐसा नहीं सोचा जाता. मुझे समाज के इस दोहरे पैमाने से शिकायत है।

लेकिन वर्जिनिटी को लेकर इतनी खुली सोच रखने वाली काजल अपने बारे में एक चौंकाने वाली जानकारी देती हैं. वे कहती हैं कि उनकी उम्र 35 साल होने जा रही है और वे अब तक वर्जिन हैं।इसकी वजह पूछने पर वे कहती हैं कि ‘इतने सालों तक घर से दूर रहने के बावजूद आज भी मेरे दिमाग की कंडीशनिंग काफी हद तक वैसी ही है.। सच ये है कि खुद को कई बार बिल्कुल आजाद छोड़ने के बाद मैंने नोटिस किया कि मैं इसके लिए अपने आप को सहज नहीं पाती हूं. फिर जिस चीज में हम सहज ही नहीं तो एंजॉय क्या करेंगे. मुझे लगता है कि मेरे संस्कारों और मां-बाप का भरोसा तोड़ने से जुड़े अपराधबोध के डर से ही मैं आज तक चाहे-अनचाहे वर्जिन हूं।

दिल्ली की एक विज्ञापन कंपनी में काम करने वाली अंजली वर्जिनिटी पर महिलाओं की सोच की थोड़ी औऱ स्पष्ट तस्वीर दिखाती हैं, ‘मुझे लगता है कि लड़के चाहते तो हमेशा यही हैं कि उनकी पत्नी वर्जिन हो। अगर नहीं है तो भी चल जाता है. यह चला लेना ही बताता है कि अंदर ही अंदर लड़कों को इस बात से बड़ा फर्क पड़ता है. सो, उन्हें सच बताना आफत मोल लेना है. इसलिए मैं सोचती हूं कि बॉयफ्रेंड या पति के इस बारे में पूछने पर झूठ बोलना ही ज्यादा सही है. वरना इस बात को लेकर वे कभी खराब मूड में या फिर किसी और मौके पर ताना मार सकते हैं या और भी ज्यादा सीन क्रियेट कर सकते हैं.’ लेकिन वर्जिनिटी को लेकर हमारी सोच में आए खुलेपन को दिव्या के इन शब्दों से भी समझा जा सकता है – ‘वैसे मुझे लगता है कि आज के समय में ऐसे ‘अच्छे’ लड़की-लड़के मिलने मुश्किल ही हैं, जो वर्जिन हों।

इस तरह हम लड़कियों के लिए वर्जिनिटी अपने आप में कोई बड़ा सवाल नहीं रह गया है. यही बात बहुत हद तक साफ-सुथरी और सुलझी समझ वाले लड़कों और मां-बाप पर भी लागू होती है. फिर भी हमें यह स्वीकार करना पड़ेगा कि आज भी इससे जुड़ी कई खतरनाक सोच हमारे समाज में मौजूद हैं. इनमें से एक यह कहती है कि जो लड़की किसी भी वजह से अपनी वर्जिनिटी खो चुकी है, वह ‘खेली-खाई’ है और सबके लिए उपलब्ध है. इसके लिए कुछ इन शब्दों का सहारा लिया जाता है – ‘अरे जब एक बार किसी के साथ मजे ले चुकी हो तो फिर हमसे क्या दिक्कत है!’

तलाकशुदा महिलाएं अक्सर इसकी शिकार होती हैं. मेरठ के एक प्राइवेट स्कूल की अध्यापिका स्वस्ति आर्य बताती हैं कि ‘मुझे लगता है कि कई लोगों को ऐसा लगता है कि मैं उनके लिए आसानी से अवेलेबल हूं! मेरी तरफ से ऐसा कोई भी इशारा पाए बगैर वे यह मान कर चलते हैं कि शादी के बाद मैं सेक्स की हैबिचुअल हो चुकी हूं और चूंकि अब मेरे साथ पति नहीं है तो वे उसकी कमी पूरी करने को आतुर रहते हैं. ये सोचना भर ही कितना ज्यादा डिस्गस्टिंग है कि सिर्फ मेरी वर्जिनिटी खत्म होने से मैं उन सबको हमेशा अवेलेबल लगती हूं.’ स्वस्ति जैसे अनुभव रखने वाली लड़कियों के लिए व्यक्तिगत रूप से वर्जिनिटी कोई बड़ा मुद्दा न होते हुए भी बड़ा हो जाता है. इस तरह के उदाहरण बाकी लड़कियों को अपना वर्जिनिटी स्टेटस छुपाने के लिए मजबूर तो करते ही हैं, कई बार एक मर रहे रिश्ते को ढोने की वजह भी बन जाते हैं.

यौनशुचिता को लेकर चली आ रही समाज की सोच को ही पोसते हुए, विज्ञान ने हाइमन की सिलाई जैसी चीजों को भी प्रचलन में ला दिया है. हालांकि हमारे देश में इसकी पहुंच बहुत कम लड़कियों तक है लेकिन इसका प्रचलन में आना ही इस बात की तरफ इशारा करता है, कि हम विवाह पूर्व भी अपनी सेक्सुअल लाइफ जीना तो चाहती हैं. लेकिन अपनी ‘अच्छी लड़की’ वाली इमेज भी नहीं टूटने देना चाहती हैं ताकि पति की तरफ से वर्जिन पत्नी को मिलने वाली इज्जत और प्यार हमें मिल सके।

लेकिन यह चाह तो अब हम लड़कियों में जागने लगी है कि जैसे लड़कों के लिए अपनी वर्जिनिटी खोना कोई बड़ा मसला कभी नहीं रहा, हमारे लिए भी ना हो. पर अभी तो बहुत कोशिशों के बाद भी हम इस मसले पर उतनी सहज नहीं हैं, जितना कि दिखाती हैं. बस अब इस पर होने वाले बवाल से बचने के लिए हम झूठ बोलने में जरूर सहज हो गई हैं।

असल में वर्जिनिटी के सवाल पर हम कुछ गफलत में हैं. हम अक्सर ही वर्जिनिटी तोड़ने के सवाल पर एक ही समय में, दो तरह से सोचती हैं. एक तरफ हम ऐसे सभी कैरक्टर सर्टिफिकेट्स को चिंदी-चिंदी फाड़ डालना चाहती हैं, जिसे हमारी वर्जिनिटी जारी करती है. दूसरी तरफ हम खुद भी इसे चाहे-अनचाहे बचाये रखना चाहती हैं. हम कहीं न कहीं अभी भी इस सोच से ग्रसित हैं कि वर्जिनिटी खो चुकी लड़कियां ‘गंदी’ होती हैं! मां-बाप लड़कियों को विवाह पूर्व यौन संबंधों से बचाने के लिए अक्सर ही ‘हम तुम पर बहुत भरोसा करते हैं’ के भावनात्मक हथियार का प्रयोग करते हैं. ऐसे में यदि दुर्गा जैसी कोई लड़की अपनी वर्जिनिटी खत्म करती भी है तो वह अपने मां-बाप का भरोसा तोड़ने के अपराधबोध में रहती है.

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