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Rafale

चुनाव तक चलता रहेगा ‘राफेल’ पर रार, अभी संसद में जारी है जंग!

नई दिल्ली। राफेल पर रार की शुरुआत तो इसके सौदे के तय होते ही हो गई थी.. लेकिन पिछले साल के चुनावी मौसम और मौजूदा साल के आने वाले चुनावी त्यौहार को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस फिर से आमने-सामने आ चुकी हैं। इस पूरे मामले में पीएम ने इंटरव्यू के दौरान अपनी बात रखी, तो तुरंत ही कांग्रेस सक्रिय हो गई और अपने जवाबी हथियार का मुंह बीजेपी की ओर मोड़ दिया है।

लोकसभा में दिनभर चला ‘राफेल’पर रार

बीजेपी-कांग्रेस नेताओं में हुई जबरदस्त बहस

राफेल को लेकर एक-दूसरे को घेरते रहे बड़े नेता

फ़्रांस से रफ़ाल फाइटर जेट सौदे में विपक्षी पार्टियों के भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर लोकसभा में खूब बहस हुई.. बहस के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस सौदे को लेकर कई तरह से सवाल खड़े किए. लोकसभा में बहस के दौरान राहुल ने सरकार के सामने चार सवाल खड़े किए.

सवाल नंबर 1- किसने वायुसेना की 126 रफ़ाल की ज़रूरतों को 36 में तब्दील किया. इस सौदे में बदलाव किसने किया और क्यों किया? पुरानी डील को इस सरकार ने क्यों बदला?

सवाल नंबर 2- हर कोई जानता है कि यूपीए सरकार 526 करोड़ में 126 रफ़ाल ख़रीदने जा रही थी. अब मोदी सरकार 1600 करोड़ में 36 रफ़ाल ख़रीदने जा रही है. आख़िर ये क़ीमत क्यों बदली गई?

सवाल नंबर 3- फ़्रांस ने ख़ुद कहा है कि एचएएल से विमान बनाने का काम छीनकर अनिल अंबानी को देने का फ़ैसला भारत सरकार का था. आख़िर एचएएल से यह काम क्यों छीना गया? एचएएल ने कई लड़ाकू विमान बनाए हैं लेकिन उसे ये काम नहीं दिया गया.

सवाल नंबर 4- 10 दिन पहले कंपनी बनाने वाले अनिल अंबानी, जो कि 45 हज़ार करोड़ के क़र्ज़ में हैं, उनकी कंपनी को रफ़ाल का कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया गया?

राहुल गांधी जब मोदी सरकार से सवाल पूछ रहे थे तो अनिल अंबानी का भी नाम लिया. अनिल अंबानी के नाम लेने पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आपत्ति जताई और कहा कि जो सदन में नहीं है उसका नाम राहुल गांधी ना लें. इसके बाद राहुल गांधी ने अनिल अंबानी को डबल ए कहना शुरू कर दिया.

राहुल गांधी ने कहा कि सु्प्रीम कोर्ट ने जेपीसी बनाने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है. राहुल ने कहा कि गोवा के मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मीटिंग में कहा है कि उनके पास रफ़ाल की फ़ाइलें पड़ी हुई हैं और पूरा सच उनके पास है. राहुल गांधी जब लोकसभा में सवाल पूछ रहे थे तो उन्होंने एक टेप चलाने की अनुमति मांगी. इस टेप के बारे में कहा जा रहा है पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कैबिनेट मीटिंग में कहा है कि रफ़ाल का पूरा सच उनके पास है.

इस मांग पर अरुण जेटली ने आपत्ति जताई और कहा कि इस टेप में कोई सत्यता नहीं है. लोकसभा अध्यक्ष ने इसकी अनुमति नहीं दी.

संसद में राहुल गांधी के सवालों का जवाब देने के लिए मोदी सरकार की तरफ़ से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मोर्चा संभाला. अरुण जेटली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रफ़ाल पर विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है. जेटली ने कहा कि राहुल गांधी झूठ पर झूठ बोल रहे हैं क्योंकि फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस बात को ख़ारिज कर दिया है कि क़ीमत के बारे में उन्होंने मनमोहन सिंह से कुछ कहा था.

जेटली ने कहा कि इस देश में कुछ ऐसे परिवार हैं जिन्हें पैसे का गणित तो समझा में आता है, लेकिन देश की सुरक्षा समझ में नहीं आती है. राहुल के डबल ए के जवाब में बोफ़ोर्स तोप में कथित भ्रष्टाचार में नाम आए क्वात्रोकी का नाम लिया. डबल ए के जवाब में जेटली ने कहा कि क्या राहुल बचपन में क्यू यानि क्वात्रोकी की गोद में खेले थे.

राहुल गांधी के सवालों पर जेटली ने ऑगस्टा, बोफ़ोर्स और नेशनल हेरल्ड को लेकर सवाल पूछे. जेटली ने कहा कि तीनों मामले में राहुल गांधी के परिवार पर सीधे आरोप हैं.

राहुल गांधी को जवाब देते हुए अरुण जेटली ने कहा, ”2001 से फ़ौज लड़ाकू विमान की मांग कर रही थी और 2012 में इसकी प्रक्रिया शुरू हुई. जब देश की सरकार बदली तो एयरफ़ोर्स ने फिर मांग की. 2015 में हमने फिर से प्रक्रिया को शुरू किया.

जेटली ने कहा कि ‘जो यूपीए के ज़माने में शर्तें थीं उनसे बेहतर शर्तों पर सौदा करने का हमने फ़ैसला किया. इस बातचीत में एयरफ़ोर्स विशेषज्ञों को शामिल किया गया. हमने सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 2016 में दसां के साथ समझौता किया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कहा है कि सारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है..

अरुण जेटली ने कहा कि 500 करोड़ और 1600 करोड़ की तुलना बेकार है. उन्होंने कहा कि एयरक्राफ़्ट में सिर्फ जहाज़ नहीं होता.. बल्कि असली क़ीमत उसमें लगे हथियारों की होती है. उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट में एक शर्त थी कि हर साल दाम बढ़ेगा. हमने जो समझौता किया है वो वेपन और बेसिक एयरक्राफ़्ट के दाम दोनों शामिल हैं. एनडीए का सौदा हथियारबंद एयरक्राफ़्ट का है. अगर वही डील लेकर चलते तो इसमें 11 सालों का वक़्त लगता

अरुण जेटली ने ऑपसेट पार्टनर को लेकर भी अपनी बात सामने रखी. उन्होंने जेपीसी की मांग को भी खारिज कर दिया.. औऱ कहा कि सुप्रीम कोर्ट बोल चुका है कि इस मामले वो पूरी प्रक्रिया से संतुष्ट है.

ये सभी तथ्य लोकसभा में हो रही बहस में सामने आए, हालांकि इस दौरान कांग्रेसी सांसद सदन में कागज के जहाज भी उड़ाते दिखे, तो लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने उन्हें डाटा भी.

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