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Sabarimala temple

आज बंद हो जाएंगे सबरीमाला मंदिर के कपाट, महिलाएं नहीं कर सकीं प्रवेश

नई दिल्ली: सबरीमाला मंदिर में दर्शन का आज आखरी दिन है. केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के कपाट पारंपरिक मासिक पूजा के लिए खुले थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन पांच दिनों में 10 से 50 साल तक की एक भी महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई है. ऐसी खबरें हैं कि आज महिलाओं द्वारा फिर से मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश हो सकती है. वहीं समाचार एजेंसी एएनआई का कहना है कि केरल पुलिस ने पंबा में मीडिया कर्मियों के शिविर को चेतावनी जारी की है. पुलिस अधिकारियों ने इस क्षेत्र को खाली करने के लिए मीडिया को सूचित किया है. पुलिस का कहना है कि मीडिया पर हमले हो सकते हैं.

काफी संख्या में पुरुष श्रद्धालु पहुंचे

गौरतलब है कि सबरीमला मंदिर में रविवार को भी छह महिलाओं को प्रवेश से रोका गया. प्रसिद्ध मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर चल रहा गतिरोध जारी है. दस से 50 वर्ष उम्र वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिबंध हटाने के आदेश को लागू करने का श्रद्धालु विरोध कर रहे हैं. श्रद्धालुओं ने अयप्पा के मंत्रों का उच्चारण करते हुए तेलुगु बोलने वाली छह महिलाओं को मंदिर में पहुंचने से पहले ही रोक दिया. उच्चतम न्यायालय द्वारा सदियों पुराने प्रतिबंध को पिछले महीने हटाने के बाद मासिक पूजा के लिए मंदिर के दरवाजे पांच दिन पहले खोले गए थे.पहाड़ियों और पम्बा में लगातार बारिश के बावजूद काफी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं.

12 महिलाओं को मंदिर जाने से रोका गया

एक कार्यकर्ता सहित कुछ युवतियां ‘नैश्तिक ब्रह्मचारी’ (शाश्वत ब्रह्मचर्य) मंदिर में बुधवार से ही प्रवेश करने का प्रयास कर रही हैं लेकिन पुजारियों के समर्थन में श्रद्धालु उनका मार्ग रोक रहे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि वे परम्परा को तोड़ने की अनुमति नहीं देंगे. अभी तक मौजूद संकेतों के मुताबिक दस से 50 वर्ष उम्र वर्ग की एक भी महिला मंदिर में नहीं पहुंच पाई है. मासिक पूजा के बाद सोमवार को मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे. पुलिस सूत्रों के मुताबिक मासिक पूजा के लिए मंदिर के कपाट खोले जाने के बाद से अभी तक दस से 50 वर्ष उम्र वर्ग में 12 महिलाओं को मंदिर में पूजा करने से रोका गया है.

राजनीति गरमाई

भाजपा ने मामले में केंद्र से हस्तक्षेप करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए जाने की मांग की है जबकि कांग्रेस ने राजग सरकार द्वारा अध्यादेश लाए जाने की मांग की है. सबरीमला मंदिर के परम्परागत संरक्षक पंडालम शाही परिवार ने आरोप लगाया कि माकपा नीत एलडीएफ सरकार मासिक धर्म उम्र वर्ग की महिलाओं को ‘‘नैश्तिक ब्रह्मचारी’’ मंदिर में प्रवेश देकर मंदिर की पवित्रता को बर्बाद करने का प्रयास कर रही है. रविवार को 47 वर्षीय एक महिला मंदिर के गर्भ गृह ‘नडाप्पंधाल’ के नजदीक पहुंच गई लेकिन श्रद्धालुओं ने ‘‘स्वामिये शरणम अयप्पा’’ का मंत्रोच्चार करते हुए उसे वहां प्रवेश करने से रोक दिया जबकि मंदिर मंदिर की तरफ जा रहीं पांच महिलाओं को भी श्रद्धालुओं ने रोक दिया.

40 साल की महिला को रोका

वहां मौजूद एक बुजुर्ग महिला श्रद्धालु ने कहा कि महिला के पहचान पत्र में उसके जन्म का वर्ष 1971 अंकित था और वह ‘अनुमन्य उम्र’ तक नहीं पहुंच पाई थी इसलिए अन्य श्रद्धालुओं ने मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे रोक दिया. इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने अपने रिश्तेदारों के साथ आईं दो महिलाओं को मंदिर के रास्ते में ही रोक दिया जिनकी उम्र 40 वर्ष के करीब थी. पुलिस ने दोनों महिलाओं को सुरक्षित निकाला. पुलिस ने कहा कि दोनों ने उन्हें बताया कि मंदिर की परम्परा की उन्हें जानकारी नहीं थी, इसलिए वे सबरीमला आ गईं

विशेष सत्र बुलाने की मांग

महिलाओं को आधार शिविर निलक्कल लाए जाने के बाद उन्होंने पुलिस को लिखित में जवाब दिया कि वे मंदिर की सदियों पुरानी परम्परा को नहीं तोड़ना चाहती थीं. उच्चतम न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्य में बढ़ते प्रदर्शन के बीच भाजपा ने रविवार को केरल सरकार से आग्रह किया कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर एक प्रस्ताव पारित किया जाए जिसमें संकट से निपटने में केंद्र से हस्तक्षेप करने की मांग हो. भाजपा के राज्य अध्यक्ष पी एस श्रीधरन पिल्लई ने दावा किया कि प्राचीन मंदिर की परम्पराओं को तोड़ने का विरोध माकपा के सदस्य भी कर रहे हैं जहां देश भर से लाखों श्रद्धाजु जुटते हैं.

बीजेपी नेता गिरफ्तार

सबरीमला के मुख्य प्रवेश बिंदु निलक्कल के पास लगे सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन करने के लिए भाजपा नेताओं के एक समूह को गिरफ्तार किया गया. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता कांग्रेस के रमेश चेन्निथला ने केंद्र सरकार से अपील की कि उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलटने के लिए अध्यादेश लाया जाए. माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य एस. रामचंद्रन पिल्लई ने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले का विरोध करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम है और पूरे केरल के समाज का उनको समर्थन हासिल नहीं है.उन्होंने सबरीमला पर अदालत के फैसले को लागू करने का समर्थन किया. इस बीच सबरीमला कर्म समिति ने अदालत के फैसले को ‘‘जल्दबाजी’’ में लागू करने के माकपा नीत सरकार के फैसले के विरोध में आंदोलन तेज कर दिया है.

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