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साइकिल की सीट गवांने के बाद, अब मुलायम चलेंगे ये दांव!

नई दिल्ली। सपा में चल रही लंबी लड़ाई में चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव को विजेता घोषित कर दिया है। पार्टी, पद और पहचान अपने बेटे के हाथों हारने के बाद अब मुलायम सिंह यादव के पास गिने-चुने रास्ते ही बचे हैं।

देखा जाए तो अब मुलायम सिंह यादव के सामने कुल मिलाकर बस तीन ही विकल्प बचे हैं। मुलायम के पास सबसे पहला विकल्प यह है कि वह कोर्ट जाकर चुनाव आयोग के फैसले पर स्टे की अपील करें। हालांकि इस विकल्प को अपनाने से मुलायम को कोई खास फायदा होने वाला नहीं है क्योंकि आज यूपी चुनाव अधिसूचना जारी हो जाएगी फिर इस मामले में न्यायपालिका के दखल की गुंजाइश बेहद कम होगी।

मुलायम के पास दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि वह अखिलेश को राष्ट्रीय अध्यक्ष मानते हुए संरक्षक की भूमिका स्वीकार कर लें। हालांकि मुलायम इस विकल्प को शायद ही चुनें क्योंकि इससे उनके राजनीतिक संन्यास की भूमिका तैयार होगी और वह इसे किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करना चाहेंगे।

जिस विकल्प की सबसे ज्यादा संभावना नजर आ रही है वह यह कि मुलायम अपने बेटे के खिलाफ चुनावों में जाएं और अलग चुनाव लड़कर जनमत को अपने पक्ष में दिखाएं। अगर वह अखिलेश गुट से ज्यादा वोट और सीटें ले आए तो उन्हें ही असली समाजवादी पार्टी माना जाएगा, पर ऐसा होने की संभावना बहुत कम है।

अब तक जिस तरीके के संकेत मिल रहे हैं, उनसे मुलायम के सामने चुनावों में जाने का रास्ता चुनने की मजबूरी होगी। सोमवार को पार्टी ऑफिस में उन्होंने अखिलेश को निशाने पर लिया था। वह चुनाव में अखिलेश की हार में ही अपनी जीत देखेंगे। अखिलेश के खिलाफ उन्होंने जो मुस्लिम कार्ड खेला, वह उनकी रणनीति का हिस्सा है। समाजवादी पार्टी के यादव+मुस्लिम वोट बैंक के सामने वह खुद को एक बेबस पिता के रूप में पेश कर सहानुभूति हासिल करना चाहेंगे। मुसलमानों को अखिलेश के पाले में जाने से रोकने के लिए उनके खेमे को बीजेपी समर्थित भी साबित कर सकते हैं।

हालांकि, कुछ जानकार मानते हैं कि यह विकल्प भी मुलायम के काम नहीं आएगा क्योंकि नई पार्टी बनाने और उसे लोगों के बीच प्रचारित करने में वक्त लगता है। यूपी चुनाव का पहला नोटिफिकेशन मंगलवार को आने वाला है। यानी मुलायम के पास इस विकल्प को चुनने के लिए वक्त ही नहीं है।

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