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HAZARIBAG-RANCHI EXPRESS WAY

झारखंड: NH-33 हाईवे के तकनीकी खामियों को लेकर संजय मेहता ने NHAI पर खड़े किए सवाल

हजारीबाग( पंकज मिस्त्री): बरही निवासी और यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज के छात्र संजय मेहता ने चुटुपालु घाटी NH-33 हाईवे के तकनीकी खामियों  को लेकर राष्ट्रीय उच्च पथ परिवहन निगम के कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है.

मीडिया को साक्ष्य के साथ जानकारी देते हुए कहा है कि NH-33 चुटुपालु घाटी की तकनीकी खामी को लेकर उन्होंने सात सितंबर 2017 को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखा था.

पत्र में बताया गया था कि झारखंड की राजधानी रांची से NH-33 होते हुए रामगढ़ जाने के दौरान चुटुपालु घाटी में सड़क की संरचना मुड़ी हुई है एवं  यह तकनीकी रूप से गलत है. तीखा मोड़ होने की वजह से यहां बड़े वाणिज्यिक वाहन नियमित तौर पर दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं. अब तक बड़े-छोटे वाहनों समेत तीस से अधिक दुर्घटना इस स्थल पर हो चुकी है. जिसकी वजह से कई लोगों की जान भी जा चुकी है. इस स्थल पर जान-माल की व्यापक क्षति हुई है.

उन्होंने अनुरोध करते हुए लिखा था कि चुटुपालु घाटी NH-33 के सड़क को सीधा कर तकनीकी खामी को दूर किया जाए, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पूरे NH-33 में एक्सीडेंट जोन को चिन्हित कर सुधार किया जाए.

मेहता ने इसे अत्यंत आवश्यक बताते हुए लिखा था कि NH-33 पर घटित दुर्घटना के कारण कई परिवार तबाह हो चुके हैं. जनसामान्य को भविष्य में होनेवाले संभावित नुकसान से बचाने के लिए इस पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाए एवं इसकी कार्ययोजना तैयार की जाए.

संजय मेहता के इस शिकायत को मंत्रालय में शिकायत संख्या 2017/02867 के तहत दर्ज किया गया था एवं उस पर कार्रवाई भी हुई थी.

मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट रांची के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अजय कुमार सिन्हा को पत्र अग्रसारित किया था. शिकायत पर परियोजना निदेशक अजय कुमार सिन्हा ने नौ दिसंबर 2017 को शिकायतकर्ता संजय मेहता को जवाब देते हुए लिखा कि NH-33 के इस सेक्शन में वाहनों की गति सीमा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा है.

दुर्घटना का कारण वाहनों की तीव्र गति है. इसके निर्देश के लिये बोर्ड एवं सांकेतिक चिन्ह लगाये गये हैं.  साथ ही यह भी बताया गया कि NH-33 के 95 एवं 96.88 किमी को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है.

सड़क को सुधारने के बजाय  शिकायतकर्ता को गोल-मोल जवाब देकर  परियोजना निदेशक ने मामले को बंद कर दिया. परिणाम यह हुआ कि एक बड़ी दुर्घटना घाटी में घट गयी जिसके कारण जान माल की व्यापक क्षति हुई.

क्या कहते हैं संजय मेहता

संजय मेहता ने कहा चुटुपालु घाटी में  लगातार घटित हो रही सड़क दुर्घटना को NHAI द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया. लगभग एक साल पहले केंद्रीय मंत्रालय को विस्तार से बताया लेकिन NHAI वाहनों की तीव्र गति का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारियों से मुँह मोड़ लिया. यह काफी हास्यास्पद है की लोगों की सुरक्षा को लेकर NHAI गंभीर नहीं दिखाई देता. उम्मीद है कि अब स्थिति में सुधार होगी.

 

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