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SC ने आम्रपाली ग्रुप के 3 डायरेक्टरों को हिरासत में भेजा, कहा- लुकाछिपी बहुत हुई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट ग्रुप आम्रपाली की हीलाहवाली पर मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। शीर्ष अदालत के आदेश पर ग्रुप के तीन डायरेक्टरों- अनिल कुमार शर्मा, शोव प्रिया और अजय कुमार को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कोर्ट ने कहा- लुकाछिपी का खेल बहुत हुआ। जब तक आप हमारे आदेशों का अनुपालन नहीं करेंगे, दस्तावेज नहीं सौंपेंगे, तब तक पुलिस हिरासत में रहेंगे। आम्रपाली ग्रुप पर 40 हजार खरीदारों को वक्त पर घर का पजेशन न दे पाने का आरोप है। खरीददारों ने घर मिलने में देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

कोर्ट ने पहले कहा था- ज्यादा स्मार्ट बने तो एक-एक संपत्ति बेचकर बेघर कर देंगे

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने पिछली सुनवाई में कहा था, “असली समस्या यह है कि आपने लोगों को घर का पजेशन देने में देरी की। आपको सभी प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी और आप इसकी व्यवस्था कहां से करेंगे?”

इस पर ग्रुप ने जवाब दिया कि प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए हमें करीब 4000 करोड़ रुपए की जरूरत पड़ेगी। बेंच ने पूछा कि आपने 2764 करोड़ रुपए का फंड डायवर्ट किया है, उसे कैसे वापस करेंगे?

बेंच ने मौजूदा और 2008 के बाद ग्रुप छोड़ने वाले निदेशकों के बारे में सवाल किए थे और कहा था- 15 दिन के भीतर ग्रुप के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों की अचल संपत्ति का ब्योरा पेश करें।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि आम्रपाली के प्रोजेक्ट की देखरेख कर रही कंपनियों की जानकारी दें। यह भी बताएं कि इन्होंने कितना फंड जमा किया और कितना खर्च किया। कोर्ट ने बिजली कंपनियों को ग्रुप के दो प्रोजेक्ट को दोबारा कनेक्शन देने के निर्देश भी दिए थे। कंपनियों ने भुगतान बकाया रहने पर कनेक्शन काट दिया था।

एनबीसीसी से मांगा था प्रस्ताव

2 अगस्त को नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन इंडिया लिमिटेड (एनबीसीसी) ने अदालत से कहा था कि वह आम्रपाली ग्रुप के प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए तैयार है।

एनबीसीसी के प्रस्ताव पर बेंच ने कहा कि 30 दिन के भीतर पुख्ता प्रस्ताव पेश करें और यह भी बताएं कि तय समयसीमा में प्रोजेक्ट कैसे पूरा कर पाएंगे। इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने ग्रुप को फटकार लगाते हुए कहा था कि वे गंदा खेल खेल रहे हैं।

अदालत ने ग्रुप की सभी 40 कंपनियों की अचल संपत्तियों और बैंक अकाउंट अटैच करने के निर्देश दिए थे। साथ ही 2008 से अब तक के बैंक अकाउंट्स की जानकारी भी मांगी थी और इन्हें सीज करने के निर्देश दिए थे।

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