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सत्येन भंडारी की कहानियां: पासू भैया का शोले वाला यादगार रोल

पासू भैया, चार जमात आगे थे हमसे. नाम उनका परशुराम हुआ करता था, वे पासू भैया कब हुए, उनके माता-पिता भी नहीं जानते थे. हाँ यह अवश्य तस्दीक कर दी थी कि यह उनका घरेलू अथवा प्यार का नाम नहीं था.

पासू भैया, पांच भाई-बहनों में से एक थे. सारे के सारे आबनूसी वर्ण के! इन पांच भाई-बहनों में से दो ही को ख्याति प्राप्त थी मुहल्ले के लौंडो के बीच. इनके अतिरिक्त जो प्रसिद्ध था सारे महल्ले में, वे थीं ‘ढुन्नी’, अर्थात पासू भैया की इकलौती बहिन, दुर्गेशनंदिनी! माता-पिता के बडे प्रेम से रखे गए नामों की दुर्गति का श्रेय, महल्ले के लफाडिये छोकरों को जाता था. जहाँ पासू भैया अपने काम से काम रखने वाले बालक प्रसिद्ध थे, ‘ढुन्नी’देवी अपने समय की चलती-बोलती व्हाट्सऐप थीं. सारे बच्चे उनकी इस प्रतिभा के शिकार हो चुके थे कभी न कभी!

“आज आपके राजू ने इस्कूल से गुत्ती मारी….”
“आज ठाकुर सर ने खूब सुताई की हरी की!”
“ये रोज स्कूल में भेल खाता है!!”……

जैसी शिकायतों से तंग आकर सबने उसे ‘ढुन्नी’ कहना शुरू कर दिया था….

पासु भैया मेरी ही स्कूल के विद्यार्थी थे. पढाई-लिखाई में ढ़ोल पर चतुर थे…..स्ट्रीट-स्मार्ट!! व्यवहार ज्ञान कूट कूट कर भरा था उनमें. महल्ले की एक कन्या पर जी आया हुआ था उनका पर कहने की हिम्मत न थी. अपने शराबी पिता से बड़ा डरते. लड़की भी फ़िदा थी उनपर! बिल्ली (पिता) के गले में घंटी बांधने की फ़िराक में रहा करते पासु भैय्या!

हर होली में धमाल होती इनके घर. पिता शराब पीकर तो अम्मा ढोलक बजा कर होली के रंगों में चमक भर देते. ऐसी ही एक होली में सारे लोग आनंद ले रहे थे. मिठाइयां खाई जा रहीं थीं, रंग खेला जा रहा था. इतने में पासु भैय्या आकर बैठ गए ढोलकी बजाने.

अब दृश्य ये है की, पासु भैया ढोलकी बजा रहें हैं, उनकी प्रियतमा नाच रही हैं और अम्मा गा रहीं हैं….

“आज बिरज में होली रे रसिया….”

और पिता बीच-बीच में, अपने अनर्गल संवादों की पिपुड़ी बजा रहें हैं!!!

“अबे, ढोलकी फोड़ मत डालियो, माटीमिले!!!”

अचानक पासु भैया उठे और ऐलान कर डाला….

“मैं इस छोकरी से शादी बनाना चाहता हूँ! कोई माई का लाल जिसे परेशानी हो अब्भी बोल दे! अब्भी यानी अब्भी!! बाद में मत बोलना की बोला नहीं…बाबू तुम भी बोल डालो, बाद में नहीं सुनूंगा मैं….”

बाबू के पहले ही अम्मा चीख पड़ी….

“माटीमिले, इसका बाप दहेज़ में फूटी कौड़ी नहीं देने का….पूछ इसको देंगा क्या? कायको मसखरी कर रा? तेरा बाप क्या बोलेगा, मैं ही नहीं बोलती हूँ!”

बाबू को होश न थे, पर अंदाजा आ रहा था परिस्थिति का. कहने लगा;

“बिलकुल नहीं मानेंगा मैं. मैं मानेंगा नहीं….क्या!!”

“ऐसा न? एकबार और सोच ल्यो….फिर मत बोलना!”

“अरे हौ रे माटीमिले …..सोच लिया!”

अबकी दोनों, माता-पिता, एकसाथ चिल्ला पड़े….

पासु भैया शोले वाला सीन कर रहे थे….

“देख लो महल्ले वालों, ये मेरे माँ-बापू क्या बोल रहे हैं सबके सामने? फिर मेरे को दोष नहीं देना! नाथा काका तुमको ऐतराज होंगा तो तुम भी बोल डालो अभीच!”

नाथा काका सुंदरी के बापू थे. उनको कोई परेशानी न थी, बोले;

“मेरेको कोई वांधा नहीं! तुम लोग राजी हो जाओ सब, उत्ताच!”

“तो महल्ले वालों, मेरे माँ-बाप को ही तकलीफ़ है मेरा घर बसने की! साला ऐसे जीने से क्या फायदा? मैं इस कुंवे में कूद कर जान दे देता हूँ. नहीं करता शादी इससे! खुश!!”

कहकर पासु भैया कूंए की जगत पर चढ़ गए. सारा मोहल्ला चीख पड़ा और उनके साथ उसके माँ-पिता भी!

“माटीमिले, ये दिन दिखाने को जिन्दा था क्या रे? पैदा होते ही मर जाता! इस उमर में क्या मिलेगा रुलाकर? तेरे मन आये,वह कर पर जान मत दे!”

माँ बैन कर कर के बोलने लगी. नशे में धुत्त पिता अलग चिल्ला रहे थे पासु भैया के. पासु भैया कुंए में पांव लटका कर बैठे थे मरने को!

“अबे, नीचे उतर जा अब…तेरे माँ-बाप राजी हो गए!”

एकबार और हामी भरवाकर पासु भैया ने मरना कैंसिल कर दिया और नीचे उतर आये. उनके माता-पिता और भाई-बहिन उनसे लिपट कर रो रहे थे.

फिर, पासु भैया के तीन बच्चे हो जाने के उपरांत पता चला की होली वाले दिन, अपनी प्रेयसी व उसके बापू के संग मिलकर नाटक किया था पासु भैया ने! उनके घर के झगड़ों के दरमियाँ, सास-बहू के बीच हो रही डायलोग बाजी से सारे मोहल्ले को मिली यह जानकारी!

(सत्येन भंडारी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी हैं। त्यागपत्र देकर सरकारी नौकरी से पीछा छुड़ाकर अकोला (महाराष्ट्र) में रह रहे हैं। जो लिखता हैं, वो अपने संस्मरण होते हैं। खुद को कहानीकार कहने से परहेज करते हैं। आप जो पढ़ रहे हैं मन के भाव और जीवन में घटे किस्से हैं। नौकरी के पश्चात, अकेलेपन से निजात पाने हेतु लिखना आरंभ किया। अच्छा लगता है।

About Anchal Shukla

Young journalist from New Delhi. कराटे में ब्लैकबेल्ट चैंपियन। भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी की प्रशिक्षु नृत्यांगना। लचीली पर बेहद मजबूत। राजनीति से लेकर खेलों(हर तरह के खेल), मनोरंजन(हर इंडस्ट्री की खबरें), व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय खबरें(व्यापार, तनाव, युद्ध) के साथ ही साहित्य में भी रूचि। सबकुछ समेटे और समाज की बुराइयों से लड़ने की ताकत रखने वाली मजबूत कलमकार बनने की कोशिश...

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