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सोशल मीडिया वायरल: इलेक्शन फंडिंग के लिए जेटली का नया जुगाड़!

इलेक्शन फंडिंग के लिए जेटली ने नया इंतज़ाम किया है. अब इलेक्शन फंडिंग इलेक्शन बांड के जरिए होगी. इलेक्शन बांड के जरिए राजनीतिक पार्टियों चंदा देने के नए मैकेनिज्म को समझना जरूरी है.

1.कम्पनी एक्ट में संशोधन किया गया.क्या था यह संशोधन? संशोधन से पहले कोई कंपनी राजनीतिक पार्टियों को अपने मुनाफा का अधिक से अधिक 7.5% ही चंदा दे सकती थी. अब यह प्रतिबंध हटा लिया गया है. कोई कम्पनी जितना चाहे वह इलेक्शन बांड के जरिए चन्दा दे सकती है.

2.कम्पनी एक्ट में एक और संशोधन किया गया. पहले किसी कम्पनी के तीन साल का मुनाफा देखा जाता था. अब ऐसा करना जरूरी नहीं रह गया है.

3.अब यह सम्भव है कि रातोरात कोई कम्पनी खड़ी कर ली जाए और राजनीतिक पार्टियों को चन्दा दे दिया जाए भले ही उस कम्पनी का मुनाफे का कोई रिकॉर्ड न हो.

4.इस तरह नकली Shell Company बना कर राजनीतिक चंदा देने का अनुकूल माहौल बनाया गया है.

5.पहले कम्पनियों को अपने शेयर होल्डर्स को बताना पड़ता था कि उसने किस पार्टी को चंदा दिया है. अब चूँकि इलेक्शन बांड के जरिए पार्टियों को पैसा दिया जाएगा, इसलिए यह सूचना कि किस पार्टी को कितना चन्दा दिया गया है शेयर होल्डर्स के साथ साझा करना जरूरी नहीं होगा. शेयर होल्डर्स को इतना ही पता होगा कि कंपनी ने कितने के इलेक्शन बांड खरीदे हैं.

6.पहले पार्टी को 20000 से अधिक देने वाले दाताओं के नाम घोषित करने पड़ते थे. अब घोषित करने की जरूरत नहीं रह गई है. यह सबसे पड़ा परिवर्तन है. कहा गया कि पारदर्शिता आएगी, लेकिन इससे तो जितनी पारदर्शिता सिस्टम में थी वह भी ओझल होने जा रही है.

7.फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट, 2010 में संशोशन किया गया. पहले पार्टियों के लिए विदेशी चन्दा लेना संभव नहीं था. अब कुछ शर्तों के साथ चन्दा लिया जा सकेगा.

8.अब जनता नहीं जान पाएगी कि किन कम्पनियों ने उसकी पार्टी को चंदा दिया है. पहले भी सिर्फ घोषित चंदे के बारे में ही लोग जानते थे, अघोषित के बारे नहीं, लेकिन अब उस तरह की रिपोर्टें भी नहीं आएँगी जिस तरह की रिपोर्ट अभी आई थी जिसमें बताया गया था कि कॉर्पोरेट डोनेशन का कितना प्रतिशत बीजेपी को मिला और कितना प्रतिशत कांग्रेस को.

दूसरी तरफ बैंकों को और उसके सरकारी आकाओं को सब पता होगा कि कौन किसे चन्दा दे रहा है. बैंकों को पता होगा कि विपक्षी पार्टियों को कौन लोग चंदा दे रहे हैं.

9.वैसे चन्दा देने वाली ऐसी कौन सी कंपनी होगी जो पार्टियों को बताए नहीं कि हमने आपको चन्दा दिया है? ऐसा नेकी कर दरिया में डाल वाले व्यवसायी लोग कहाँ बचे हैं.

बस जनता की नज़र से सब कुछ पूरी तरह ओझल होने जा रहा है.

यह बहुत बड़ा बदलाव है. दुर्भाग्य से इसपर चर्चा नहीं हो रही है. सरकार के प्रचार तंत्र ने यह बात सबके दिमाग में बैठा दी है कि नकद होने वाले लेन-देन से काला-धन पैदा और प्रसारित होता है.  कारोबार अगर बैंक के माध्यम से हो जाए या डिजिटल हो जाए तो सबकुछ सफेद हो जाएगा. दो दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय की 48% काले धन को वैध बनाना बैंक और वित्तीय संस्थानों के जरिए ही होते हैं.

भविष्य में शायद राजनीतिक पार्टियाँ काले धन को वैध बनाना के सबसे बड़े केंद्र बन जाएँ.

 

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