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नजरिया- भ्रष्टाचार की मौत मरे 60 मासूम , आखिर कब ‘सुधरेगा’ हमारा सिस्टम ?

गोरखपुर के बीआरडीए कॉलेज में 60 से ज्यादा मासूमों की हत्या कर दी गई। इसके बाद भी शासन-प्रशासन वही रटे रटाये जवाब दिए जा रहा है। एक बार सोचकर देखिए कि जिन घरों के चिराग बुझे हैं,उनके दिल पर इस वक्त क्या गुजर रही होगी ? यकीनन इसका जवाब जब आप ढूंढेगे तो आपका दिल सिहर जाएगा। जब आप अस्पताल में एक मां को अपने लाड़ले के खोने के गम में छाती पीट-पीटकर रोते हुए देखेंगे, तो आपसे रहा नहीं जाएगा। जब एक पिता की आंखों में अपने लाडले के जाने के एहसास के बारे में आप सोचेंगे तो आपका शरीर कांप उठेगा। लेकिन एक वो हैं, जिन्हें इन सबसे फर्क ही नहीं पड़ रहा।

ये ‘सिस्टम’ का फेल्योर है

सच तो ये है कि आजकल सरकारी मुलाजिम निर्दयी हो गए हैं। उन्हें तो बस एक ही काम आता है। वो है आंकड़ों को सेट करना। यही नहीं इस मामले में यूपी के मुखिया योगी आदित्यनाथ की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। हालांकि उन्होंने बच्चों की मौत को गंदगी से छोड़ा है। पर असल में ये हमारे सिस्टम के फेल्योर को दर्शाता है।

‘भ्रष्टाचार’ लील गया 60 से ज्यादा जिंदगियां

60 से ज्यादा मासूमों की सांसे थमना ये दिखाता है कि आधुनिकता के इस दौर में भी हमारा सिस्टम कितना कमजोर है। सवाल खड़ा होता है कि आखिर हम तरक्की कैसे कर रहे हैं ? जब अस्पताल ही मौत की सीढ़ी हैं, तो इसके आगे हम क्या सोंचे ? ऐसा नहीं है कि सिर्फ गोरखपुर के अस्पताल ही नर्क बने हुए हैं। बल्कि पूरे यूपी का यही हाल है। या कहें पूरे देश में यही हो रहा है। रोज हजारों जानें यू हीं जा रही हैं। चाहे केन्द्र की सरकार हो या राज्य सरकारें उन्हें इसकी जड़ में जाना होगा। हम जरुर सोचते हैं कि भ्रष्टाचार ऊपर से हो रहा है। पर हकीकत दरअसल कुछ और है। वो तो हमारे जैसे छोटे जगहों से शुरु हो रहा है।

किसी के पास नहीं है जवाब

ये बच्चे जो आज काल के गाल में समाएं हैं, वो भ्रष्टाचार की ही देन है। ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने की वजह से इन बच्चों की मौत हुई। अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी इसलिए हुई, क्योंकि इसकी सप्लाई करने वाली कंपनी का पैसा बकाया था। पर क्यों ? सरकारी आयोजनों में तो खूब पैसा खर्च होता है। तो फिर सरकारी अस्पताल क्यों नहीं दुरुस्त होते ?  है कोई नेता जो इस बात का जवाब देगा। जवाब तो है ही नहीं किसी के पास।
इस मामले में भी वही पुरानी कहानी आगे होगी। जांच टीम गठित होगी। जांच होगी भी। अफसरों का ट्रांसफर भी होगा। पर कुछ दिन के बाद सब सामान्य। सब भूल जाएंगे कि 60 बच्चे भ्रष्टाचार की मौत मरे थे। देश में सरकार बदले तीन साल हो गए हैं। पर सबकुछ ठीक नहीं हो रहा है। मानता हूं अभी वक्त लगेगा। लेकिन ये मामले हमें सोचने पर मजबूर करते हैं। कोई कड़ा कदम उठाना बहुत जरुरी है सरकारों के लिए। सिर्फ सोचने और कमेटियां गठित करने से काम बिलकुल नहीं चलेगा। अगर सख्त कदम नहीं उठे भविष्य में तो 60 क्या 60, 000 बच्चों के मरने की खबर भी हम और आप सुनेंगें।
ज्ञानरंजन झा की फेसबुक वॉल से
(लेखक युवा पत्रकार हैं, लगातार अलग-अलग विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं)

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