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वीर विनोद छाबड़ा की कहानियां: डब्बा खाली, पेट खाली!

साल 1990 की बात है। हम दोपहर नीलांचल पर सवार हुए। रास्ते भर थोड़ा-थोड़ा खाया। अरे भाई, चाचा के घर जा रहे हैं। किसी पराये के घर नहीं। वहीं जम कर खायेंगे।
रात करीब 11 बजे उनके घर जा पहुंचे। वो हमें देख कर हैरान रह गए। अरे, बिना किसी पूर्व सूचना के आ गए।

सरप्राईज़ चाचाजी! हमने उनकी चरण वंदना की। फिर जल्दी से फ्रेश होकर पालथी मार कर बैठ गए। पेट में चूहे कूद रहे हैं। लेकिन चाचाजी परेशान। हमने कारण पूछा। उन्होंने बताया कि गैस ख़त्म हो गयी है, अभी थोड़ी देर पहले। हीटर परसों से ख़राब पड़ा है।

हमने कहा, कोई बात नहीं। ताज़ा नहीं तो जो बासी हो वही परोस दो। पता चला वो भी नहीं बचा। दस मिनट पहले आ गए होते तो कल्याण हो जाता। सड़क पर मुफ़्त में पहरेदारी करने वाले को डाल दिया गया है। न दालमोठ और न ही बिस्कुट की खुरचन। एक बूंद दूध तक कि नहीं थी। चीनी तक का डिब्बा खाली निकला। यह बस चांस की बात है।

हम मन ही मन कह रहे थे कि कैसे लोग होते हैं दिल्ली वाले? लेकिन कज़िन ने हार नहीं मानी। स्कूटर उठाया और आस-पास के सारे होटल छान मारे। मगर हमारी ही किस्मत ही ख़राब थी। कहीं कुछ नहीं मिला। नाते-रिश्तेदार दस किलोमीटर से पहले तक तो कोई नहीं।

हमने कहा कि इतनी सर्दी में कहां जाओगे? अड़ोसी-पड़ोसी को जगाने की बात चली तो हमने मना कर दिया। रात का एक बज चुका है। हम समझ लेंगे कि आज ब्रत पर हूं। और फिर बड़े बड़े शहरों में ऐसी छोटी-मोटी घटनाएं होती ही रहती हैं।

तब हम चालीस साल के जवान होते थे। बर्दाश्त करने का माद्दा था। सो पानी पीकर जैसे-तैसे सो गए। सुबह सबसे पहले हमें ही उठाया गया। स्कूटर के पीछे खाली सिलेंडर लेकर बैठो। गैस लानी है। वापसी पर दूध की थैलियां भी।

आइंदा से हमने कान पकड़े। सीख मिली कि किसी के घर पर सरप्राईज़ विज़िट की दस्तक नहीं देंगे।

वीर विनोद छाबड़ा: लेखक बिजली विभाग से रिटायर्ड हैं। दशकों से फ्रीलांस पत्रकारिता कर रहे हैं। खेल और सिनेमाई जगत पर खूब लिखते हैं। अविभाजित भारत के पश्चिमी भाग से बंटवारे के समय ही परिवार इस ओर आकर लखनऊ बसा। लखनऊ में ही पूरा जीवन गुजरा। मस्त पंजाबी और अल्हण अंदाज की वजह से फेसबुक पर हजारों फॉलोवर्स हैं।

About Anchal Shukla

Young journalist from New Delhi. कराटे में ब्लैकबेल्ट चैंपियन। भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी की प्रशिक्षु नृत्यांगना। लचीली पर बेहद मजबूत। राजनीति से लेकर खेलों(हर तरह के खेल), मनोरंजन(हर इंडस्ट्री की खबरें), व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय खबरें(व्यापार, तनाव, युद्ध) के साथ ही साहित्य में भी रूचि। सबकुछ समेटे और समाज की बुराइयों से लड़ने की ताकत रखने वाली मजबूत कलमकार बनने की कोशिश...

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