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मुझे न्याय नहीं मौत चाहिए, नोएडा पुलिस में SI बिजेंद्र पर्रिहर बिक चुके हैं: दहेज पीड़िता

नोएडा: दहेज के लिए अपनों के द्वारा सताई गई एक पीड़िता पुलिस के पास इस उम्मीद से जाती है कि उसके साथ न्याय किया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं होता। लगभग एक साल के इंतजार के बाद उसे पता चलता है कि मामले की विवेचना कर रहे नोएडा महिला थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर को आरोपी पति अतुल कुशवाहा द्वारा अच्छी खासी रकम दे दी गई है और उन्होंने सारा मामला ही उल्टा कर दिया। शर्मनाक बात यह है कि मामला दर्ज होने के एक साल बाद भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।

नोएडा पुलिस द्वारा ढुलमुल रवैये से विवेचना करने और रिश्वत लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद पीड़िता को अब न्याय की उम्मीद नहीं रह गई है। पीड़िता राखी (काल्पनिक नाम) का कहना है कि वह अब अपनी जिंदगी को खत्म करना चाहती है इसके लिए पति अतुल कुशवाहा और उसके परिजन कम और सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र पर्रिहर ज्यादा होंगे। पीड़िता का कहना है कि जहां की पुलिस चार्जशीट दाखिल करने में एक-एक साल लगा रही हो और आरोपी का ही साथ दे रही हो तो ऐसी पुलिस न्याय दिलाने में उसकी क्या सहायता करेगी।

आरोपी कुछ नेताओं के साथ अपनी फोटो खिचवा रखा है इसी का फायदा वह उठाता है और पुलिस कार्यवाई नहीं करती

महिला सुरक्षा का दावा करके यूपी में सरकार बनाने के बाद बीजेपी इस मुद्दे को भूल चुकी है। अब आलम यह हो गया है कि खुद सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ रहनेवाले कुछ लोग इतने दहेज लोभी हो गए हैं कि अपनी पत्नी को घर से निकाल दिया है।

परिजनों के मुताबिक अतुल उनके साथ नहीं रहता लेकिन तस्वीर कुछ औऱ ही बयां कर रही है।

इस शख्स का नाम अतुल कुशवाहा है। मूल रूप से यह कानपुर में रहता है औऱ लगभग डेढ़ साल पहले इसने अपनी पत्नी को घर से सिर्फ इस वजह से क्योंकि प्रेम विवाह होने की वजह से उसे ससुराल से दहेज नहीं मिल सका था। काफी समय तक लिव इन रिलेशनशिप में रहने के बाद पीड़त महिला के दवाब बनाने पर अतुल ने उससे शादी की थी। शादी को दो तीन महीने तक सब ठीक रहा और उसके बाद अतुल और उसके परिवार का दहेज रूपी दानव का घिनौना चेहरा धीरे-धीरे सामने आने लगा।

दहेज के दानवों अतुल कुशवाहा (पति), ससुर रामलखन कुशवाहा, सास छुन्नी देवी कुशवाहा, देवर अनुज कुशवाहा ने नवविवाहिता को जान से मारने की कोशिश की। पीड़िता किसी तरह घर से भागकर कल्याणपुर थाने (कानपुर) पहुंचती है। वहां वह मामले की पूरी जानकारी पुलिस को देती है। मामला घरेलू होने की वजह से विवचक जगदीश वर्मा ने मामला दहेज अधिनियम में दर्ज करने की बजाय IPC 323 और 354 में दर्ज किया। आरोप यह भी है पीड़िता जो तहरीर लेकर थाने गई थी उसे बदलने के लिए उसपर दवाब बनाया गया और मामूली आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।

पीड़िता जीवन यापन के लिए भागकर नोएडा चली है। लेकिन यहां पर भी अतुल कुशवाहा और उसके परिवार ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और तलाक देने के लिए दवाब बनाने लगे। साथ ही यह भी कहते अगर तुझे साथ रहना है तो एक गाड़ी और कुछ पैसे दहेज के रूप में हमें दो तब तुम्हे परिवार में रखेंगे। नोएडा में भी कई बार आरोपी द्वारा मारपीट की गई। नोएडा सैक्टर 24 थाने में ही दो बार अतुल कुशवाहा के खिलाफ मारपीट का मुकदमा पीड़िता ने दर्ज कराया गया लेकिन यहां पर भी कुछ बीजेपी नेताओं के दवाब में मामला दहेज अधिनियम से जुड़ी धाराओं में नहीं दर्ज किया गया।

चार महीने चक्कर लगाने के बाद दर्ज किया गया दहेज अधिनियम के तहत मामला

पीड़िता तहरीर लिए ठंड के दिनों में सुबह 10 बजे से देर रात्रि तक नियमित लगभग चार महीने तक पति अतुल और उसके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज कराने के लिए महिला थाने का चक्कर काटती रही। काफी मशक्कत और मीडिया द्वारा मामला उठाए जाने के बाद दहेज अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर

पीड़िता के मुताबिक, मामले की विवेचना कर रहे महिला थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर बार-बार उसी FIR का हवाला दे रहे हैं जो कानपुर में मामूली धाराओं में पीड़िता ने अपनी जान बचाने के लिए दर्ज कराई थी। अब सीओ सिटी थर्ड भी यही बात कह रहे हैं कि वहां दहेज अधिनियम के तहत क्यों नहीं मामला दर्ज कराया गया। जबकि उन्हें यह बता दिया गया कि वहां पुलिसकर्मियों ने आरोपियों की राजनीति में पहुंच होने के नाते साथ नहीं दिया।

पीड़िता का आरोप है कि विवेचक सब इंसपेक्टर बिजेंद्र कुमार पर्रिहर ने आरोपी अतुल कुशवाहा से रिश्वत के तौर पर लगभग दो लाख रुपए ले लिए हैं। वह विवेचना अतुल के पक्ष में कर रहे हैं और जो चार्जशीट अभी सीओ सिटी थर्ड के पास उन्होंने सबमिट की है उसमें सिर्फ आरोपी के पक्ष की बातें लिखी गई हैं। यानि नोएडा पुलिस ने यहां भी महिला की तकलीफों का सौदा कर डाला।

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