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SC ने बार-बार याचिका देने वाले पर जुर्माना भरने तक लगाई पाबंदी

सुप्रीम कोर्ट ने एक असाधारण आदेश में सीरियल जनहित याचिकाकर्ता वकील अशोक पांडे पर सख्ती की है। उन्हें यह आदेश दिया है कि जब तक वह 25,000 रुपये का जुर्माना अदा नहीं करेंगे, उन्हें नई याचिकाएं दायर नहीं करने दिया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की पीठ ने पांडे पर यह जुर्माना सोमवार को एक व्यर्थ याचिका दायर करने पर लगाया गया था। इस याचिका में उन्होंने लड़कों के लिए शादी की उम्र 18 वर्ष करने के लिए सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया था।

कोर्ट ने कहा, पहले पैसे जमा कीजिए

जस्टिस मदन लोकुर की पीठ में शुक्रवार को पांडे की एक याचिका लगी थी। लेकिन उन्होंने देखा कि उन पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने जुर्माना लगाया हुआ है। इसके बाद जस्टिस लोकुर की पीठ ने कहा कि आप पहले पैसे जमा कीजिए उसके बाद ही मामला सुना जाएगा। इस याचिका में उन्होंने बहुविवाह रोकने तर्था ंहदुओं में तलाक समाप्त करने का निर्देश देने का आवेदन किया था।

पैसे नहीं है, जुर्माना कहां से दें

कोर्ट के इस आदेश पर पांडे में कहा कि पैसा उनके पास नहीं है कहां से जुर्माना देंगे। लेकिन कोई बात नहीं, उनका मुद्दा जीवित है याचिका लंबित है। उनकी एक याचिका सोमवार को फिर से जस्टिस लोकुर की पीठ में सुनवाई के लिए आ रही है।इसमें उन्होंने मांग की है सामान्य वर्ग आयोग बनाया जाए, क्योंकि सभी जाति वर्गों का आयोग है। यह पूछे जाने पर जस्टिस लोकुर आपको कैसे सुनेंगे, उन्होंने कहा कि यह याचिका उन्होंने एक मित्र के नाम से डाली है, बहस खुद करेंगे। बहस करने से रोकने का तो कोई आदेश नहीं है ना।

अशोक पांडे : हाईकोर्ट ने रोक लगाई तो सुप्रीम कोर्ट में ठिकाना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अशोक पांडे की एक याचिका को अवमानना माना और कोर्ट में घुसने से रोक दिया था। इसके खिलाफ अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने यह सजा समाप्त कर दी थी। हाईकोर्ट में प्रवेश से रोके जाने के बाद अशोक पांडे गत नवंबर में दिल्ली आ गए। वह यहां अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिकाएं दायर कर रहे हैं। सर्वोच्च अदालत में अब तक उनकी सभी सात याचिकाएं खारिज हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट में दो और सीरियल याचिकाकर्ता:-

अश्वनी उपाध्याय: दागी नेताओं पर रोक लगवाई

भाजपा नेता अश्वनी उपाध्याय पिछले डेढ़ साल में 50 से अधिक याचिकाएं दायर कर चुके हैं। मगर उनकी कुछ याचिकाओं पर कोर्ट ने आदेश भी पारित किए हैं। हाल ही में उनकी याचिका पर कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था दागी उम्मीदवारों से अलग से शपथपत्र लिया जाए और उनका प्रचार किया जाए।

मनोहर लाल शर्मा- कोलगेट की पोल खोली

मनोहर लाल शर्मा भी कोर्ट में कई याचिकाएं दायर कर चुके हैं। एक याचिका पर अदालत ने 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस याचिका में उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। यह शर्मा की याचिका ही थी, जिसमें कोर्ट ने 200 से ज्यादा कोयला ब्लाक आवंटन घोटाला उजागर हुआ।

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