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सूरजकुंड मेले में संस्कृतियों का संगम

दीपक दुआ

दिल्ली से सटे फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके में 1987 में शुरू किया गया सूरजकुंडमेला आज पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान पा चुका है। अब ‘सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीयक्राफ्ट्स मेला’ के नाम से मशहूर यह मेला अब विश्व का सबसे बड़ा क्राफ्ट मेला बन चुकाहै। हर साल फरवरी के पहले पखवाड़े की गुनगुनी धूप में लगने वाले इस मेले का इंतजारआम लोगों के अलावा भारत भर के वे कलाकार और कारीगर भी करते हैं जो यहां हर सालआकर अपनी बनाई हुई चीजें बेचते और प्रदर्शित करते हैं।

इस साल 2 से 18 फरवरी तकआयोजित किए जा रहे इस मेले का थीम राज्य उत्तर प्रदेश और पार्टनर देश किरगिजस्तानहै। वैसे यहां आपको भारत के हर राज्य की कला, शिल्प और खानपान की वस्तुओं केअलावा करीब 20 देशों के कारीगर और उनका सामान मिलेगा। इस मेले को देखने के लिएजहां एक पूरा दिन भी कम पड़ता है वहीं यह भी तय है कि इसे देखने के बाद यहां बिताए पलों और संजोए आनंद को बयान करने के लिए शब्द भी कम पड़ने लगते हैं।

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