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ताकि गुलनाज पहले जैसी दिखें

मुजम्मिल

स्तन कैंसर यानी ब्रेस्ट कैंसर जिसे सामान्य बोलचाल में सीने का कैंसर भी बोलते हैं। आंकड़ों की बात करें तो यह बीमारी भारतीय महिलाओं में तेजी से बढ़ने वाली बीमारियों में दूसरे-तीसरे नंबर पर है। हर साल करीब डेढ़ लाख महिलाएं इससे ग्रसित होती हैं। अपने देश में बीमारी का असर पश्चिमी देशों की अपेक्षा कम है। यहां करीब 25 महिलाओं में से एक में स्तन कैंसर का पता लगता है। पश्चिमी देशों में ये आंकड़ा 8 है। साल 2018 में यहां करीब 1.62.468 महिलाओं में स्तन कैंसर का पता चला। शहरी और ग्रामीण महिलाओं में भी स्तन कैंसर के आंकड़े अजीब तरह के स्टैटिक्स दिखाते हैं। ग्रामीण महिलाओं में स्तन कैंसर का औसत 60  में 1 है तो शहरों में ये आंकड़ा 22 से 25 में 1 का है।

खैर, यह तो रही आंकड़ों की बात। लेकिन इस बार हमने उन महिलाओं को तलाशने की कोशिश की जो इस बीमारी से पीड़ित हैं और वाकई इस बीमारी के सामाजिक असर से जूझ रही हैं। ऐसे हजारों महिलाओं की तकलीफें कैंसर अस्पतालों में बिखरी हुर्इं हैं।

ताकि गुलनाज पहले जैसी दिखें

शाहजहांपुर की गुलनाज ने भी स्तन कैंसर का आॅपरेशन करवाया। गुलनाज भाग्यशाली है कि उनके पति चांद मोहम्मद उनके साथ हैं। चांद ने बताया कि इसी रमजान से गुलनाज के स्तनों में गांठ का पता चला। गांठ 15 दिनों में ही बड़ी हो गई। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कैंसर की बात कहकर तुरंत आॅपरेशन कराने को कहा।

गुलनाज के दो आॅपरेशन हो चुके हैं कीमो थेरेपी और केंकाई के लिए बार बार आना पड़ता है। चांद मोहम्मद (50) बताते हैं कि गुलनाज के इलाज में करीब सवा तीन लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इलाज के लिए 70 हजार रुपए 5 रुपए सैंकड़े के हिसाब से साहुकार से कर्ज लिया है। 20 हजार किसी सगे संबधी ने दिए। बेटा सोफा मिस्त्री है उसने कुछ बचत किया था। चांद खेतों में 150-250 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी करते हैं। गुलनाज (40) साल बताती हैं कि अब उन्हें अपने जीवन में अधूरापन महसूस होता है। उन्हें लगता है कि किसी स्त्री की पहचान शरीर के इसी हिस्से से होती है वो हिस्सा हटाना पड़ा। लेकिन चांद ने गुलनाज का साथ देते हुए कहा कि वो न तो दूसरी शादी करने वाले और न उन्होंने ऐसा सोचा है। हां चांद यह सवाल जरूर पूछा कि क्या उनकी पत्नी की ब्रेस्ट सर्जरी सरकारी स्तर पर हो सकती है? चांद को किसी ने बताया कि भारतीय और विदेशी फिल्मों की हिरोइनों ने भी बे्रस्ट कैंसर के बाद सर्जरी कराई है। चांद मोहम्मद है कि यदि ऐसा कोई रास्ता निकल जाए तो वो गुलनाज की सर्जरी जरूर कराएंगे। ताकि वो पहले जैसी लगे।

 

छात्ती औरत की पहचान होवे है, इसे हटवाना पड़ गयो… भइया (गीता के पति) न चाहते थे कि आॅपरेशन हो लेकिन डॉक्टर ने कहा बीमारी बढ़ गई है हटाना ही पड़ेगो। उन्ने (गीता के पति) कहा कि गांठ है निकड़वा ले लेकिन छात्ती हटवाने की जरूरत न है… डॉक्टर ने कहा कि हटना जरूरी है… आॅपरेशन के बाद से भइया से दूरी हो गई है… वो दूर ही रहे हैं… अपने से फोन भी न करें हैं.. आज भी इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ…। ये बात बताते हुए गीता अपने आंसुओं को नहीं रोक पाईं हालांकि उनकी आंखों में नमी तो पहले से ही थी हमने बस बहाना दे दिया। 35 साल की गीता मुरादाबाद के अमरोहा की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। उन्होंने करीब एक महीने से अपने बच्चों की शक्ल तक नहीं देखी। वो अपने तीनों बच्चों को याद करती हुई कहती हैं कि एक 11 साल का है दूसरा 6 साल का, तीसरी बेटी है चार साल की। जब से आॅपरेशन हुआ है पति से दूरियां बढ़ गर्इं हैं। मैं जिंदा हूं या मर गई उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। गीता कहती हैं और क्या बताऊं उन्हें तो ये भी नहीं पता कि मेरा इजाज कहां चल रहा है वो कभी देखने नहीं आए। गीता को पिछले साल 25 दिसंबर को कैंसर का पता चला था। तब से अकेले ही जीटीबी कैंसर अस्पलात में इलाज करवा रही हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनके जेठ रहते हैं।

इनके साथ उन्होंने आकर यहां धर्मशाला में कमर ले लिया है। क्योंकि कैंसर के रोगियों को अस्पताल में बिना किसी लोकल गारेंटर के कमरा नहीं देते हैं। जेठ भी उन्हें बोझ समझने लगे हैं। गीता अपने दाम्पत्य जीवन की कहानी सुनाते सुनाते कई बार अपने आंसू पोछती हैं। उन्होंने जितनी देर अपनी बात बताई वो लगातार आंसू ही पोछती रहीं। उन्होंने कहा कि जब से छाती हटवाई है तब से लगता है कि मैं किसी काम की ही नहीं रही। बस बच्चे ही उम्मीद हैं। उन्हें लगता है कि उनका पति अब उन्हें अपने साथ रखने से मनाकर देगा। गीता को लगता है कि वो केवल पांचवीं तक ही पढ़ी हैं इसलिए अच्छी नौकरी भी नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा ‘बीमारी से तो ना मरी लेकिन अपने ही मुंह मोड़ लेवे हैं’। गीता बार बार अपनी इस स्थिति के लिए मौत मांग रही थीं। गीता को उम्मीद है कि उसके पति धार्मिक प्रवृत्ति के हैं इसलिए शायद दूसरी शादी न भी करें लेकिन स्तन के कैंसर की वजह जो स्थिति उनके सामाने है उससे सोचकर अस्पताल के गर्म वातावरण में ठीक ठाक कपड़े पहने होने के बावजूद कांप रही थी।

 

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