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PoK में चीनी सैनिकों की मौजूदगी पर तहसीन पूनावाला ने पीएम मोदी से किया सवाल, आखिर हमनें क्या किया?

नई दिल्ली। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को उस पीओके के संबंध में खत लिखा है, जहां पाकिस्तान की सरपरस्ती में चीनी सैनिक घुसे बैठे हैं। ये वो जगह है, जिसे हम भारतीय अपना कहना नहीं अघाते, पर हम उसके लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। तहसीन पूनावाला ने पाक अधिकृत कश्मीर में चल रही पाकिस्तान की कारगुजारियों पर सरकार को सचेत होने के लिए तो कहा ही है, साथ ही सरकार से सवाल पूछा है कि हम हाथ पर हाथ धरे आखिर क्यों बैठे हैं। पढ़ें तहसीन पूनावाला के पत्र का हिंदी अनुवाद…

प्रधानमंत्री जी, ये पत्र मैं आपको गिलगिट बालिस्तान(पीओके का हिस्सा) में चीन और पाकिस्तान द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्यों पर ध्यान खींचने के लिए लिख रहा हूं। मैं आश्वस्त हूं कि आपके पास ये जानकारी होगी कि पीओके में जो भी निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, वहां पर सशस्त्र चीनी सैनिकों की मौजूदगी है। ये साफ है कि चीनी सेना की मौजूदगी और चीनी निर्माण कार्य भारत की संप्रभुता पर खतरा है।

सर, हम सभी जानते हैं कि गिलगिट बालिस्तान का इलाका हमारे महान राष्ट्र का अभिन्न अंग है। ऐसे में विदेशी सेना की मौजूदगी में कराए जा रहे निर्माण कार्य हमारी संप्रभुता पर हमला है। ये हमारे आंतरिक मामले में विदेशी हस्तक्षेप भी है।

ये सर्वविदित है कि अक्टूबर 1947 में महाराजा हरि सिंह के साथ समझौते के तहत समूचा जम्मू कश्मीर राज्य भारत का हिस्सा है, इसमें पाक अधिकृत कश्मीर अर्थात पीओके भी शामिल है। भारत की संसद ने 22 अक्टूबर 1994 को रिजोल्यूशन पाक करते भी इस बात को दोहराया है, साथ ही पाकिस्तान से इस इलाके को खाली करने की बात भी कही है। पर अब पाकिस्तान ने चीन से हाथ मिला लिया है। जिसकी वजह से पीओके में चीनी सैनिक मौजूद हैं। ये भारत की अखंडता और संप्रभुता पर बेहद गंभीर खतरा है। चूंकि आप हमारे चुने हुए प्रधानमंत्री हैं और देश के अगुआ हैं। ऐसे में ये आपकी जिम्मेदारी है कि आप हमारे देश की संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखें। पर आपकी खामोशी आपके विफलता की कहानी स्वयं बयां कर रही है। पूरा पत्र अंग्रेजी में इस प्रकार है…

“This is to draw your attention towards the construction activity being undertaken by Pakistan and China in the Gilgit Baltistan region of Pakistan Occupied Kashmir. I am sure that you would be aware that the said construction is being undertaken by full deployment of Military Forces of both Pakistan and China and the same is a grave and imminent threat to the Sovereignty of our great Republic.

Sir, as you would be aware that the Gilgit-Baltistan area is an integral part of iur great Republic and therefore any activity construction or military being undertaken by a foreign nation is an attack on sovereignty of India and seriously compromises our nationalistic credentials and safety.

Sir, it is pertinent here to remind you that the signing of the Instrument of Accession by Maharaja Hari Singh in October 1947 resulted in the entire princely state of Jammu and Kashmir becoming an integral part of India including the Pakistan occupied Kashmir. Further, the Parliament of India on February 22, 1994 passed a resolution affirming that including the Pakistan Occupied Kashmir is an integral part of our Republic and Pakistan must vacate the areas of the Indian state of Jammu and Kashmir, which they have occupied through aggression. Instead now, Pakistan has joined hands with China and has allowed Chinese army into Pak Occupied Kashmir, which is a violation of all agreements and treaties. Furthermore the Chinese army stationed in PoK is a serious and grave threat to our great nation. Sir, you being the elected head of the Government, it is your duty to protect and preserve the sovereignty and integrity of the Nation. Your silence on this issue points towards your failure to uphold our sovereignty.

It is a cause of grave concern that the Government of India under your leadership has been silent on the same and with few exceptions of feeble attempts towards opposing the construction activity not much has been done.

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Sir, it is high time that your Government undertake some serious action and raise the issue at international level including and not limited to United Nations Organisation and should also undertake deployment of our military forces to ensure that no infiltration takes place.

Failure on your part to undertake such serious diplomatic exercise would reflect a serious foreign policy failure. The inaction on your part will further weaken your nationalistic credentials and will betray the nationalistic stand taken by your government while taking actions against students and activist alike. It will seem to the nation that all slogans of nationalism are mere political slogans or “Jumlas” and hold no real value at all. Further, if the said ause of concern is not resolved urgently the same will compromise our sovereignty and I will be considered to approach the Hon’ble Supreme Court to direct your government on this issue.”

Last year, after a number of frequent incursions in Ladakh area, Chinese People’s Liberation Army (PLA) troops were spotted at forward posts along the Line of Control (LoC) on the Pakistani side of Kashmir. bThere were reports that the Army had spotted the presence of senior PLA officials at the forward posts opposite Nowgam sector in North Kashmir.

The PLA troops were first spotted in the later half of 2015 as well as opposite Tangdhar sector, where Chinese government-owned China Gezhouba Group Company Limited has been building a Jhelum-Neelum 970 MW Hydel power project.

About Anchal Shukla

Young journalist from New Delhi. कराटे में ब्लैकबेल्ट चैंपियन। भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी की प्रशिक्षु नृत्यांगना। लचीली पर बेहद मजबूत। राजनीति से लेकर खेलों(हर तरह के खेल), मनोरंजन(हर इंडस्ट्री की खबरें), व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय खबरें(व्यापार, तनाव, युद्ध) के साथ ही साहित्य में भी रूचि। सबकुछ समेटे और समाज की बुराइयों से लड़ने की ताकत रखने वाली मजबूत कलमकार बनने की कोशिश...

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