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मोतिगरपुर थाना (फाइल फोटो)

सुलतानपुर: फौजी के घर लाखों की चोरी, मोतिगरपुर पुलिस बरामद कर रही है आधार कार्ड-पासबुक!

क्राइम रिपोर्टर: भास्कर पांडेय

 सुलतानपुर/मोतिगरपुर (भास्कर पांडेय): एक बार फिर से मोतिगरपुर थाने की पुलिस की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। कुछ दिन पहले एक फौजी के घर में लाखों रुपए की ज्वैलरी और लाइसेंसी रिवाल्वर चोरी कर ली जाती है। मामले में दो आरोपियों को जेल भी भेज दिया जाता है लेकिन बरामदगी के रूप में सिर्फ फौजी के किसी परिजन का आधार कार्ड और पीएनबी की पासबुक बरामद दिखाया जाता है।

पीड़ित दिलीप कुमार पुत्र हनुमान प्रसाद मिश्रा निवासी-श्रीराम नगर, दियरा के मुताबिक, उसके घर से कुछ चोर लगभग 10 दिन पहले रात्रि में लगभग 5 लाख कीमत के ज्वैलरी, कुछ नगदी और लाइसेंसी रिवाल्वर पर हाथ साफ कर देते हैं। मामले में थाना मोतिगरपुर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है। पुलिस दो आरोपियों को मामले में गिरफ्तार भी करती है लेकिन उनके पास से सिर्फ एक पीएनबी की पासबुक और एक आधार कार्ड बरामद करती है।

पुलिस से जब रिवाल्वर के बारे में जानकारी मांगी गई तो एसओ आशुतोष मिश्रा ने बताया कि उनकी रिवाल्वर का पता उन्होंने लगा लिया है लेकिन आरोपी को वह अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाए हैं। आरोपी को कबतक गिरफ्तार किया जाएगा इस बात की जानकारी एसओ ने नहीं दी। यानि पीड़ित को सामान बरामदगी से जुड़ी जानकारी नहीं दी जा रही है। शायद इसलिए कि पुलिस उसे खुद ही ‘रखने’ के चक्कर में है।

मोतिगरपुर थाना (फाइल फोटो)मोतिगरपुर थाने की पुलिस के मुताबिक उसे आरोपियों के पास से पीड़ित का पासबुक और उसके परिवार के एक शख्स का आधार कार्ड मिला। इसके अलावा कान में पहनने वाला एक छोटा सा आभूषण भी पुलिस के मुताबिक बरामद किया गया है। ऐसे में यह समझ नहीं आ रहा है कि अगर पुलिस तीन चीज आरोपियों के पास से रिकवर कर पाने में सक्षम हो गई है तो बाकी चीजें कहां हैं?

थानाध्यक्ष मोतिगर पुर आशुतोष मिश्रा (फाइल फोटो)

 

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल:

  1. कही ऐसा तो नहीं कि पुलिस ने सारा माल बरामद किया हो और दिखाने के लिए छोटे-मोटे सामान सामने कर दिए हो औऱ सारा माल खुद ही….?
  2. अगर ऐसा नहीं है तो आरोपी से पूछताछ करके उस जगह पर पुलिस क्यों नहीं गई जहां उसने जेवर आदि को बेचा हो?
  3. क्या अन्य आरोपियों को पुलिस बचाना चाहती है जो घटना के इतने दिन बाद भी बाहर घूम रहे हैं? क्या पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने में असमर्थ हो चुकी है? या अपराधी इतना शातिर है कि वह पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहा?

स्थानीय पुलिस पर नहीं है भरोसा, उच्च अधिकारी करें मामले की जांच: पीड़ित

पीड़ित ने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए मामले की जांच उच्च अधिकारी से कराए जाने की विनती की है। पीड़ित का कहना है कि उसे स्थानीय थाने में तैनात पुलिसकर्मियों पर भरोसा नहीं है। वह आरोपियों को बचाना चाहते हैं। बड़ी मुश्किल से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है लेकिन जब एसओ आशुतोष मिश्रा कुछ कागज लेकर उनके पास आए और उसपर दस्तखत करने को कहा तो पीड़ित ने उनपर दस्तखत करने से इनकार कर दिया। वो कागज आधार कार्ड बरामदगी और पीएनबी की पासबुक से बरामदगी से जुड़े थे।

About Akhil Kumar

ए. के. शुक्ला (क्राइम एडिटर एंड सीईओ) एक युवा पत्रकार हैं। लगभग 7 वर्षों तक आप वेब मीडिया और टीवी मीडिया के लिए काम कर चुके हैं। महुआ न्यूज, श्री न्यूज, नेशनल वॉयस, जिया न्यूज जैसे संस्थानों में बतौर एसोसिएट प्रोड्यूसर काम कर चुके हैं और श्री न्यूज के साथ-साथ रक्षक न्यूज, लाइव इंडिया जैसे शीर्ष क्रम के चैनलों की बेवसाइट के लिए सब एडिटर, सीनियर सब एडिटर, कॉपी एडिटर जैसे पदों पर काम कर चुके हैं। आपकी रुचि अपराध और राजनीति से जुड़ी खबरों के प्रति ज्यादा है।

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